LIC के आईपीओ की तस्वीर साफ हो गई है। देश की सबसे बड़ी कंपनी 4 मई यानी बुधवार को अपना आईपीओ लॉन्च करेगी। यह इश्यू 9 मई को बंद हो जाएगा। खास बात यह है कि इश्यू साइज घटने के बावजूद यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। एलआईसी ने बुधवार दोपहर प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस आईपीओ के बारे में अहम बातें बताईं।
इससे पहले पेटीएम की पेरेंट कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड ने 18,300 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश किया था। यह आईपीओ पिछले साल नवंबर में आया था। इससे पहले कोल इंडिया ने 15,199 करोड़ रुपये का आईपीओ लॉन्च किया था। यह आईपीओ नवंबर 2010 में आाया था।
इससे पहले रिलाय पावर ने फरवरी 2008 में आईपीओ से 11,563 करोड़ रुपये जुटाए थे। जेनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन का आईपीओ 11,176 करोड़ रुपये का था। यह अक्टूबर 2017 में आया था।
LIC ने कहा है कि सरकार इस आईपीओ के जरिए कंपनी में अपनी 3.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने जा रही है। आईपीओ में एक शेयर की कीमत 902-949 रुपये तय की गई है।
सरकार एलआईसी के कुल 22.13 करोड़ शेयर इस आईपीओ के जरिए बेचेगी। इस तरह वह इस इश्यू से करीब 20,557 करोड़ रुपये जुटाएगी। पहले सरकार की योजना इस आईपीओ से करीब 60,000 करोड़ रुपये जुटाने की थी।
इनवेस्टर्स को LIC के आईपीओ में एक लॉट यानी कम से कम 15 शेयरों के लिए अप्लाई करना होगा। अगर कोई इनवेस्टर ज्यादा शेयरों के लिए बोली लगाना चाहता है तो वह 15 शेयरों के मल्टीपल में बोली लगा सकता है।
एलआईसी के आईपीओ में 2.21 करोड़ शेयर पॉलिसीहोल्डर्स के लिए रिजर्व होंगे। इससे एलआईसी के करोड़ों पॉलिसीहोल्डर्स के लिए शेयर अलॉट होने की संभावना बढ़ जाएगी।
रिटेल इवनेस्टर्स को प्रति शेयर एलआईसी के शेयर में 45 रुपये का डिस्काउंट मिलेगा। एलआईसी अपने कर्मचारियों को भी प्रति शेयर 45 रुपेय का डिस्काउंट देगी। इसके मुकाबले पॉलिसीहोल्डर्स को कंपनी प्रति शेयर 60 रुपये का डिस्काउंट देगी। इसका मतलब है कि एलआईसी अपने पॉलिसीहोल्डर्स को सबसे ज्यादा डिस्काउंट देगी।
इस इश्यू के आधे सेयर क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए रिजर्व होंगे। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए 15 फीसदी शेयर रिजर्व होंगे। बाकी शेयर रिटेल इनवेस्टर्स के लिए होंगे।