LIC IPO: इश्यू से दूर रहने में निवेशकों की भलाई, प्रीमियम पर लिस्टिंग होने की उम्मीद कम-वैभव अग्रवाल
तेजी मंडी के वैभव अग्रवाल ने कहा, भले ही सब्सक्रिप्शन अच्छा रहेगा क्योंकि बड़ी संख्या में पॉलिसीहोल्डर्स ने डीमैट अकाउंट (Demat accounts) खुलवाए हैं, लेकिन इंडिविजुअल इनवेस्टर्स की भागीदारी कम रहने का अनुमान है
MoneyControl News
अपडेटेड Feb 28, 2022 पर 12:18 PM
LIC का IPO देश का अब तक का सबसे बड़ा इश्यू होगा
LIC IPO : सरकार जिसके लिए दो साल से तैयारी कर रही है, वह LIC का IPO आखिरकार सब्सक्रिप्शन के लिए खुलने वाला है। स्टॉक मार्केट के पार्टिसिपैंट्स के लिए यह एक फेस्टिवल से कम नहीं है। भारत का सबसे बड़ा IPO मार्च के मध्य में दलाल स्ट्रीट में दस्तक दे सकता है। यहां LIC को लेकर कुछ पॉजिटिव और निगेटिव बातें बताई जा रही हैं, जिसके आधार पर सब्सक्राइब करने को लेकर फैसला किया जा सकता है।
पॉजिटिव
एक बड़ी कंपनी
भारत में 4 में से 3 लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी LIC द्वारा बेची जाती हैं। यह भारत की सबसे बड़ी और दुनिया की पांचवीं बड़ी इंश्योरेंस कंपनी है। कंपनी की प्रीमियम के लिहाज से 64 फीसदी मार्केट शेयर है। कंपनी के 13.4 लाख बीमा एजेंट है, जिन्होंने मौजूदा दौर की एलआईसी को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई है।
बेहतरीन निवेश
LIC लगभग 39 लाख करोड़ रुपये की एसेट्स का प्रबंधन करती है, जो पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग (mutual fund industry) के प्रबंधन से ज्यादा है। यह धनराशि भारत के वित्त वर्ष 22 के कुल जीडीपी की 18.5 फीसदी है। सितंबर, 2021 तक LIC का एनएसई के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन का लगभग 4 फीसदी था।
कॉरपोरेशन का 13.4 बीमा एजेंट, 3,400 एक्टिव माइक्रो इंश्योरेंस एजेंट और 72 बैंकएश्योरेंस पार्टनर्स का विशाल नेटवर्क है। सितंबर, 2021 तक 28.25 करोड़ एक्टिव पॉलिसी से LIC ब्रांड के प्रति भरोसे का अंदाजा लगाया जा सकता है।
निगेटिव
कम परसिस्टेंसी रेश्यो (Persistency Ratio) यानी कम संतुष्टि
भले ही एलआईसी की अच्छी पैठ है, लेकिन वह प्राइवेट कंपनियों के हाथों अपना मार्केट शेयर गंवा रही है। वित्त वर्ष 22 की पहली छमाही में Persistency Ratio 13वें महीने में 78.8 फीसदी, 25वें महीने में 70.9% और 61वें महीने में 60.6% रहा। प्राइवेट कंपनियों के ये आंकड़े ज्यादा बेहतर हैं।
यदि कोई वित्तीय कंपनी आर्थिक संकट के चलते दिवालिया होती है तो सरकार उसे उबारने के लिए एलआईसी का इस्तेमाल करती है। 21,600 करोड़ रुपये में आईडीबीआई बैंक की 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के बाद एलआईसी ने उसमें 4,743 करोड़ रुपये लगाए। ऐसे कई मामले हुए हैं।
कम वीएनबी मार्जिन
LIC का वीएनबी (value of the new business) मार्जिन उसके कॉम्पिटिटर्स की तुलना खास अच्छा नहीं है। वित्त वर्ष 21 के लिए LIC का वीएनबी मार्जिन 9.9 फीसदी था, जबकि वित्त वर्ष 22 की पहली छमाही में 9.3 फीसदी था। वहीं एलआईसी की कॉम्पिटिटर्स का वीएनबी मार्जिन 20-25 फीसदी है।
क्या आपको करना चाहिए सब्सक्राइब?
बड़े आकार और विजिबिलिटी के बावजूद मैं (वैभव अग्रवाल, तेजी मंडी) कंपनी के आईपीओ से दूर करने की सलाह दूंगा, क्योंकि इसकी तुलना में दूसरी लिस्टेड कंपनियों के मीट्रिक्स बेहतर हैं। एलआईसी पीयर्स के हाथों अपना मार्केट शेयर गंवा रही है। कंपनी अपने मजबूत एजेंट बेस का फायदा नहीं उठा सकती।
भले ही सब्सक्रिप्शन अच्छा रहेगा क्योंकि बड़ी संख्या में पॉलिसीहोल्डर्स ने डीमैट अकाउंट (Demat accounts) खुलवाए हैं, लेकिन इंडिविजुअल इनवेस्टर्स की भागीदारी कम रहने का अनुमान है। इस आधार पर, LIC लिस्टिंग पर प्रीमियम वैल्युएशन हासिल नहीं कर सकती।
डिसक्लेमर : मनीकंट्रोल पर इनवेस्टमेंट एक्सपर्ट्स के विचार और निवेश के टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके मैनेजमेंट के नहीं। मनीकंट्रोल अपने यूजर्स को निवेश से जुड़े फैसले लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से संपर्क करने की सलाह देते हैं।