Sula Vineyards IPO: देश की सबसे बड़ी वाइन कंपनी सुला विनयार्ड्स (Sula Vineyards) के इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) को पहले दो दिन निवेशकों का फीका रिस्पांस मिला। हालांकि आखिरी दिन आज 14 दिसंबर को निवेशकों ने यह इसमें दिलचस्पी दिखाई और यह करीब 2.33 गुना अधिक सब्सक्रिप्शन पाकर बंद होने में सफल रहा। कंपनी ने अपने IPO के तहत कुल 1.88 करोड़ शेयरों को बिक्री के लिए रखा था, जिसके बदले में उसे 4.38 करोड़ शेयरों की बोली मिली है। सुला वाइनयार्ड्स के आईपीओ में सबसे अधिक दिलचस्पी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशन इनवेस्टर्स (QIB) ने दिखाई, जिन्होंने अपने हिस्से के शेयरों को करीब 4.13 गुना अधिक सब्सक्राइब किया।
वहीं रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित शेयरों के हिस्से में कंपनी को 1.65 गुना अधिक सब्सक्रिप्शन मिला है। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स (NII) ने अपने लिए आरक्षित शेयरों के लिए 1.51 गुना अधिक बोली दी है।
Sula Vineyards का 960 करोड़ रुपये का आईपीओ 12 दिसंबर को खुला था और आज इसमें पैसे लगाने का आखिरी मौका था। कंपनी को किस कैटेगरी के निवेशक से कितनी बोली मिली, इसकी डिटेल नीचे देखी जा सकती है-
क्वालिफाईड इंस्टीट्यूशनल बॉयर्स (QIB)- 4.13 गुना
नॉन-इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स (NII)- 1.51 गुना
(सोर्स: BSE, 14 Dec 2022)
ग्रे मार्केट से निगेटिव संकेत
सुला के शेयरों की ग्रे मार्केट में एक्टिविटी निगेटिव संकेत दे रही है। इसके शेयर एक रुपये के डिस्काउंट GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर ट्रेड हो रहे हैं। हालांकि बाजार के जानकारों के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स और वित्तीय प्रदर्शन के आधार पर निवेश से जुड़ा फैसला लेना चाहिए।
Sula Vineyards IPO की डिटेल्स
सुला आईपीओ के तहत कोई भी नया शेयर नहीं जारी होगा। कंपनी के मौजूदा शेयरधारक ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत 960 करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री करेंगे। इस इश्यू के लिए प्राइस बैंड 340-357 रुपये और लॉट साइज 42 शेयरों का है। इसका मतलब हुआ कि खुदरा निवेशकों को प्राइस बैंड के अपर प्राइस के हिसाब से कम से कम 14994 रुपये निवेश करने होंगे। शेयरों का अलॉटमेंट 19 दिसंबर को फाइनल होगा और लिस्टिंग 22 दिसंबर को हो सकती है।
कंपनी के बारे में डिटेल्स
सुला का कारोबार वर्ष 2003 में शुरू हुआ था और यह लगातार घरेलू वाइन मार्केट में लीडर बनी हुई है। वित्त वर्ष 2009 में इसका मार्केट शेयर 33 फीसदी था जो वित्त वर्ष 2012 में बढ़कर 50 फीसदी पर पहुंच गया। इसके बाद से कंपनी ने अपनी बाजार हिस्सेदारी को बरकरार रखा है।