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Tata Sons की बढ़ी आफत, इस कारण IPO से बचने की कोशिशें हो रही फेल

Tata Sons IPO: आईपीओ मार्केट में इस समय टाटा सन्स के आईपीओ को लेकर काफी चर्चा हो रही है कि इसका आईपीओ आएगा या नहीं। आरबाआई ने तो इसे लेकर टाटा सन्स की एक अपील ही खारिज कर दी। टाटा सन्स आईपीओ लाना नहीं चाहती है। जानिए जब यह आईपीओ लाना नहीं चाहती है तो लाने की बाध्यता क्यों है, इससे बचने के लिए टाटा सन्स ने क्या-क्या कर रही और इसके आईपीओ को किसे फायदा होगा

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Sep 13, 2026 पर 2:21 PM
Tata Sons की बढ़ी आफत, इस कारण IPO से बचने की कोशिशें हो रही फेल
Tata Sons IPO: टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टीज का कहना है कि टाटा सन्स की बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए जो कदम उठाए गए हैं, उनके कारण कंपनी की अनिवार्य लिस्टिंग से छूट मिलनी चाहिए।

Tata Sons IPO: आरबीआई ने टाटा सन्स की स्टॉक मार्केट में लिस्टिंग से जुड़े नियमों में छूट की अपील को खारिज कर दिया है। करीब $18.5 हजार करोड़ के टाटा ग्रुप के केंद्र में मौजूद टाटा सन्स में आईटी सर्विसेज, स्टील, हॉस्पिटैलिटी और कंज्यूमर गुड्स जैसे कई बिजनेस शामिल हैं और अब नियमों के मुताबिक इसके शेयर लिस्ट होने हैं। हालांकि टाटा सन्स ऐसा नहीं चाहती है तो इसने एनबीएफसी लाइसेंस सरेंडर करने का एप्लीकेशन डाला जिसे आरबीआई ने खारिज कर दिया। बता दें कि टाटा सन्स पिछले वर्षों से मार्केट में लिस्ट होने का विरोध कर रही है लेकिन अब पिछले कुछ महीने से इस पर दबाव बढ़ा है।

Tata Sons क्यों नहीं चाहती लिस्ट होना और अब क्यों है दबाव?

टाटा सन्स इसलिए मार्केट में लिस्ट नहीं होना चाहती है क्योंकि इसके बाद कंपनी पर नियामकीय निगरानी अधिक सख्त हो जाएगी। इसके अलावा इसे टाटा ग्रुप के अंदर होने वाले लेन-देन और गतिविधियों की अधिक जानकारियों का खुलासा करना होगा। इससे यह सामने आ जाएगा कि टाटा ग्रुप के अंदर पैसा किस तरह एक कंपनी से दूसरी कंपनी में जा रहा है तो इसके मालिकों की इसे लेकर जवाबदेही बढ़ जाएगी कि कंपनी की पूंजी किस तरह इस्तेमाल की जा रही है।

हालांकि मई में आरबीआई ने NBFCs की परिभाषा में बदलाव किया, जिससे टाटा सन्स पर लिस्टिंग का दबाव बढ़ा है। आरबीआई ने यह बदलाव इसलिए किया ताकि किसी बड़ी फाइनेंशियल कंपनी की दिक्कत का झटका पूरे फाइनेंशियल सिस्टम को न लगे। इससे पहले वर्ष 2018 में एक एनबीएफसी अपने कर्ज चुकाने में डिफॉल्ट कर गई थी। ऐसे में आरबीआई ने नियम बदले थे। साल 2022 में आरबीआई ने टाटा सन्स को अपर-लेयर एनबीएफसी की कैटेगरी में रखा यानी कि यह इतनी बड़ी कंपनी है जो दिक्कत में आती है तो पूरे वित्तीय सिस्टम पर असर पड़ सकता है। उस समय टाटा सन्स की बैलेंस शीट ₹1.5 लाख करोड़ से अधिक थी। आरबीआई के नियमों के मुताबिक ऐसी कंपनियों को तीन साल के भीतर लिस्ट होना जरूरी है।

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