Tata Sons को लिस्ट होना ही पड़ेगा! RBI गवर्नर की इस बात से चर्चा शुरू

Tata Sons News: टाटा ग्रुप की एनबीएफसी यूनिट टाटा सन्स की कंट्रोलिंग शेयरहोल्डर टाटा ट्रस्ट्स स्टॉक मार्केट में इसके शेयरों की लिस्टिंग से बचना चाह रही है। हालांकि अब आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने ऐसी बात कही कि टाटा ट्रस्ट्स को इसके लिए मानना ही पड़ सकता है। समझें पूरा मामला

अपडेटेड Oct 24, 2026 पर 8:40 AM
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RBI की परिभाषा के अनुसार जब तक कोई कंपनी NBFC है, कोर इंवेस्टमेंट कंपनी (CIC) है और पब्लिक फंड का एक्सेस है, उसका रजिस्ट्रेशन जरूरी है। वहीं अगर उसे अपर लेयर की कैटेगरी में रखा गया है तो उसे शेयरों की मार्केट में लिस्टिंग भी अनिवार्य है।

Tata Sons News: केंद्रीय बैंक RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि अपर लेयर एनबीएफसी को स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने का नियम है। उनका यह कहना टाटा सन्स की लिस्टिंग को लेकर आरबीआई के रुझान के मुताबिक ही है। हालांकि संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को सीधे तौर पर किसी कंपनी का नाम नहीं लिया। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने ये बातें एक मीडिया कंपनी के वर्ल्ड समिट सम्मेलन में कही। बता दें कि टाटा सन्स की लिस्टिंग को लेकर अंदरूनी तौर पर दो हिस्से बन चुके हैं, जिसमें से एक तो लिस्टिंग के पक्ष में है तो दूसरा इसके खिलाफ।

क्या कहा RBI गवर्नर ने?

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई की परिभाषा के अनुसार जब तक कोई कंपनी एनबीएफसी है, कोर इंवेस्टमेंट कंपनी (CIC) है और पब्लिक फंड का एक्सेस है, उसका रजिस्ट्रेशन जरूरी है। आरबीआई गवर्नर के मुताबिक वहीं अगर उसे अपर लेयर की कैटेगरी में रखा गया है तो उसे शेयरों की मार्केट में लिस्टिंग भी अनिवार्य है। आरबीआई के नियमों के मुताबिक अगर कोई एनबीएफसी अपर लेयर में है यानी कि वह काफी बड़ी है और सिस्टम के लिए काफी महत्वपूर्ण बन चुकी है तो उसे स्टॉक मार्केट में लिस्ट होना होगा।


Tata Sons की लिस्टिंग पर किसे है दिक्कत?

टाटा ग्रुप इस समय होल्डिंग कंपनी टाटा सन्स को लेकर अंदरूनी तौर पर बंटा हुआ है कि इसकी लिस्टिंग होनी चाहिए या नहीं। टाटा सन्स का बोर्ड आरबीआई के नियमों के मुताबिक शेयरों को लिस्ट करने के पक्ष में है तो दूसरी तरफ कंट्रोलिंग शेयरहोल्डर टाटा ट्रस्ट्स इससे बचने के लिए रास्ते खोज रही है। पिछले महीने आरबीआई ने टाटा संस के उस एप्लीकेशन को खारिज कर दिया था, जिसमें कंपनी ने अपना एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन रद्द करने की मांग की थी ताकि वह लिस्ट होने के लिए बाध्य रहे।

मौद्रिक नीतियों को लेकर क्या कहा गवर्नर ने

समिट में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि आमतौर पर मौद्रिक नीतियों का इस्तेमाल वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए नहीं किया जाता है लेकिन कुछ परिस्थितियों में इसका इस्तेमाल किया भी जा सकता है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारतीय रुपये पर दबाव बना हुआ है। इससे यह सवाल उठता है कि रुपये को समर्थन देने के आरबीआई के प्रयासों और मौद्रिक नीति से जुड़े फैसलों के बीच किस तरह तालमेल बैठाया जाता है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि अगर वित्तीय स्थिरता से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए मौद्रिक नीति का इस्तेमाल करने का फैसला लिया जाता है, तो इस पर मौद्रिक नीति समिति (MPC) में विचार-विमर्श किया जाएगा।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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