इस बार का लोकसभा चुनाव सबसे लंबी अवधि तक चलने वाला चुनाव होगा। चुनाव की अवधि 44 दिन की है और इस दौरान गर्मी भी अपने पीक पर रहेगी। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, अप्रैल और मई में भयंकर गर्मी रहने का अनुमान जताया गया है। इस बार के लोकसभा चुनावों की अवधि 2004 के चुनाव के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। उस समय भी गर्मियों में ही चुनाव हुए थे।
इसे इस उदाहरण से समझा जा सकता है: 2004 में लोकसभा चुनाव सिर्फ 4 चरणों और 21 दिनों में हुए थे। उस वक्त अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने तय समय से 6 महीना पहले ही चुनाव करवा लिया था। यह चुनाव भी अप्रैल और मई में हुआ था। इसके बाद चुनाव का सीजन बदल गया। इससे पहले 1999 में सितंबर और अक्टूबर में चुनाव हुए थे। यह चुनाव भी 30 दिनों के भीतर संपन्न हो गया था। 1999 का आम चुनाव मध्यवधि चुनाव था। वाजपेयी सरकार द्वारा विश्वास मत हासिल नहीं कर पाने की वजह से उनकी सरकार गिर गई थी। इससे पहले 1998 का लोकसभा चुनाव भी मध्यवाधि चुनाव ही था, जब इंद्र कुमार गुजराल को अपनी सत्ता गंवानी पड़ी थी। यह चुनाव फरवरी में 13 दिनों के अंदर हुआ थी।
2004 से गर्मियों में ही चुनाव हो रहे हैं, क्योंकि हर सरकार 5 वर्षों का अपना कार्यकाल पूरा करती आ रही है। एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने बताया कि अगर सरकार 'एक देश एक चुनाव' को लेकर रामनाथ कोविंड कमेटी की रिपोर्ट स्वीकार कर लेती है, तो 2029 में सभी लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होंगे।
1998 में लोकसभा चुनावों के लिए वोटिंग 13 दिनों के अंदर हुई थी। 1999 में चुनाव में कुल 29 दिनों का वक्त लगा। 2004 में चार चरणों में 21 दिनों में चुनाव संपन्न हुए थे। इसके बाद 2009 में 5 चरणों के दौरान कुल 28 दिनों का वक्त लगा था। इसके बाद चुनाव का टाइम लंबा होता चला गया है। 2014 में लोकसभा चुनाव कुल 9 चरणों में हुए और इसमें 36 दिन लगे। 2019 में भी चुनाव 7 चरणों में हुए और इसमें 39 दिनों का वक्त लगा।
चुनाव आयोग ने इस बार 7 चरणों के तहत 44 दिनों में चुनाव कराने का ऐलान किया है, जिसकी अवधि 19 अप्रैल से 1 जून के बीच होगी। पहली बार लोकसभा चुनाव का शेड्यूल बढ़कर 1 जून तक पहुंच जाएगा। नतीजों का ऐलान 4 जून को होगा।