अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी पर एक ही समय दो कोर्ट में मामलों की क्यों हो रही सुनवाई?

सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने 15 अप्रैल को केजरीवाल को तुरंत राहत देने से इनकार कर दिया था। 15 अप्रैल को ही कुछ घंटे बाद दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट की जज कावेरी बावेजा ने केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 23 अप्रैल तक बढ़ा दी थी। इस तरह एक ही दिन केजरीवाल को दो कोर्ट्स से बड़ा झटका लगा

अपडेटेड Apr 17, 2024 पर 6:28 PM
केजरीवाल को 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया। उन्हें 22 मार्च को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने आबकारी नीति (Liquor Policy) मामले में ईडी (ED) की तरफ से उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने 15 अप्रैल को केजरीवाल को तुरंत राहत देने से इनकार कर दिया था। अब इस मामले में 29 अप्रैल को सुनवाई हो सकती है। 15 अप्रैल को ही कुछ घंटे बाद दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट की जज कावेरी बावेजा ने केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 23 अप्रैल तक बढ़ा दी थी। इस तरह एक ही दिन केजरीवाल को दो कोर्ट्स से बड़ा झटका लगा। हालांकि, यह ध्यान में रखना जरूरी है कि केजरीवाल ने न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाए जाने का विरोध नहीं किया। उन्होंने सिर्फ कोर्ट के 21 मार्च के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। कोर्ट के बाद के आदेशों को चुनौती नहीं दी गई है।

एक ही दिन एक ही मसले पर आए दो आदेशों से इन दोनों मामलों और उन पर एक साथ जिस तरह से सुनवाई हो रही है, उससे सवाल पैदा होता है। मनीकंट्रोल दोनों मामलों के बीच फर्क बता रहा है। हम आपको यह भी बता रहे हैं कि अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला केजरीवाल के पक्ष में रहता है तो उसके नतीजे क्या होंगे।

राउज एवेन्यू की कार्यवाही

केजरीवाल को 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया। उन्हें 22 मार्च को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। यह संविधान के आर्टिकल 22 के मुताबिक है। इसमें कहा गया है कि गिरफ्तारी के बाद व्यक्ति को 24 घंटे के अंदर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना जरूरी है। जब व्यक्ति मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाता है तो अभियोजन पक्ष को व्यक्ति की गिरफ्तार की वजह बताना होता है। उसे यह भी बताना जरूरी है कि वह व्यक्ति की कस्टडी क्यों चाहता है। आरोपी को यह हक है कि वह अपनी दलील पेश कर यह बताएं कि उसकी गिरफ्तारी क्यों न्यायोचित नहीं है।


केजरीवाल के मामले में कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद केजरीवाल को ईडी की कस्टडी में भेज दिया। 27 मार्च को सुनवाई में ईडी ने कोर्ट को बताया कि उसे कुछ और दिन की हिरासत चाहिए क्योंकि केजरीवाल पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे।

1 अप्रैल को ईडी ने कोर्ट से केजरीवाल को न्यायिक हिरासत में भेजने की गुजारिश की क्योंकि उसे उनकी हिरासत की अब जरूरत नहीं है। तब से केजरीवाल न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी के मुताबिक, मामले की जांच अहम स्थिति में है और अगर केजरीवाल को जमानत मिली तो वह तथ्यों से छेड़छाड़ कर सकते हैं।

ईडी को केजरीवाल की गिरफ्तारी के 60-90 दिन के अंदर चार्जशीट दाखिल करनी है। अगर ईडी समयसीमा के अंदर चार्जशीट दाखिल नहीं करता है तो केजरीवाल नियम के मुताबिक जमानत के हकदार हैं। हालांकि, केजरीवाल उसी कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल कर उनकी न्यायिक हिरासत को चुनौती दे सकते हैं। यह मुश्किल हो सकता है, क्योंकि PMLA, 2002 के तहत जब तक दो शर्तें पूरी नहीं होती तब तक बेल मिलना मुश्किल है। पहला, पहली नजर में यह दिखना चाहिए कि आरोपी ने कोई नियम नहीं तोड़ा है। दूसरा, जमानत मिलने पर उसके किसी तरह का नियम तोड़ने की संभावना नहीं है।

केजरीवाल ने संवैधानिक प्रावधान के आधार पर अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देने का फैसला किया। केजरीवाल के मुताबिक, उनकी गिरफ्तार संविधान के बुनियादी ढांचे के खिलाफ है।

सुप्रीम कोर्ट में कार्यवाही

केजरीवाल की गिरफ्तार का मामला इस हफ्ते तब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जब दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। केजरीवाल ने ईडी की कस्टडी में भेजे जाने के तुरंत बाद आर्टिकल 226 और 227 के तहत रिट याचिका दाखिल की थी। रिट याचिका तब दाखिल की जाती है जब किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है। इसमें आम तौर पर नागरिक के मौलिक अधिकारों के हनन पर सरकार के कदम पर सवाल उठाए जाते हैं।

मुख्यमंत्री ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल खड़े कर ईडी पर हमला बढ़ाया है। उनकी दलील है कि लोकसभा चुनावों के ठीक पहले उन्हें गिरफ्तार किया गया। उन्होंने यह दलील दी है कि उनकी गिरफ्तार PMLA के प्रावधानों के मुताबिक नहीं है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, ईडी ने लोगों को उनके खिलाफ बयान देने के लिए बाध्य किया। इसके बदले उन्हें लोकसभा चुनाव के टिकट ऑफर किए गए या उन्हें माफ किया गया।

हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी और उनकी गिरफ्तारी को सही ठहराया। कोर्ट ने यह कहा कि ईडी ने उन्हें छह महीनों में 9 बार समन जारी किए। लेकिन, केजरीवाल न तो जांच में शामिल होने के लिए आए और न ही उन्होंने समन को चुनौती दी। कोर्ट का मानना है कि केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय के लिए खुद केजरीवाल जिम्मेदार हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि ईडी ने यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत जुटाए है कि केजरीवाल घोटाले से मिले पैसे के इस्तेमाल में शामिल थे।

दोनों मामलों के बीच फर्क

राउज एवेन्यू और सुप्रीम कोर्ट के मामले में मुख्य अंतर यह है कि राउज एवेन्यू में चल रहा मामला आपराधिक मामले की सुनवाई से पहले का मामला है जो आबकारी नीति मामले में केजरीवाल के खिलाफ चलाया जाने वाला है। सुप्रीम कोर्ट का मामला उनकी गिरफ्तारी की संवैधानिक वैधता के सवाल को लेकर है।

राउज एवेन्यू कोर्ट में चल रहे मामले में आखिर में आबकारी नीति मामले में केजरीवाल दोषी साबित हो सकते हैं या वह निर्दोष साबित हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले में फोकस इस पर है कि उनकी गिरफ्तारी संविधान के प्रावधान के मुताबिक है या नहीं। हालांकि, अगर सुप्रीम कोर्ट उनकी गिरफ्तारी को गलत बताता है तो राउज एवेन्यू में चल रही कार्यवाली पूरी तरह से नहीं रुकेगी। राउज कोर्ट में आबकारी नीति मामले में केजरीवाल के शामिल होने को लेकर कार्यवारी जारी रहेगी। चूंकि अभी सुनवाई शुरू नहीं हुई है और चार्टशीट अब तक फाइल नहीं की गई है, सुप्रीम कोर्ट आबकारी नीति में उनकी भूमिका से उन्हें पूरी तरह से बरी नहीं कर सकता।

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