Arvind Kejriwal Arrest: क्या जेल से दिल्ली की सरकार चला पाएंगे केजरीवाल, मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी के बाद AAP के पास क्या है आगे का रास्ता?

Arvind Kejriwal Arrest: केजरीवाल की गिरफ्तारी के साथ, AAP का पूरा शीर्ष नेतृत्व अब सलाखों के पीछे है। हालांकि, मंत्री आतिशी ने दोहराया कि केजरीवाल मुख्यमंत्री बने रहेंगे। हालांकि, ऐसे में दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिए जाने को देखते हुए उपराज्यपाल की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। अगर केजरीवाल लंबे समय तक गिरफ्तारी में रहते हैं, तो ऐसे में दिल्ली की सरकार कैसे चलेगी

अपडेटेड Mar 22, 2024 पर 1:40 PM
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Arvind Kejriwal Arrest: अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के साथ, AAP का पूरा शीर्ष नेतृत्व अब सलाखों के पीछे है

Arvind Kejriwal Arrest: आम आदमी पार्टी (AAP) की जो आशंका थी आखिरकार वो सच हो गई और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को गिरफ्तार कर लिया गया। लोकसभा चुनाव (Loksabha Election 2024) से ठीक पहले पार्टी के संस्थापक की गिरफ्तारी शायद AAP के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका होगा। AAP ने हमेशा कहा है कि उसके नेताओं की गिरफ्तारी एक राजनीतिक साजिश तहत की गई है। इसके जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचकों को चुप कराने, लोकसभा चुनाव से पहले उनके प्रचार अभियान में रुकावट पैदा करने, पार्टी को तोड़ने और सरकार गिराने की पूरी पूरी कोशिशें की जा रही हैं।

केजरीवाल की गिरफ्तारी के साथ, AAP का पूरा शीर्ष नेतृत्व अब सलाखों के पीछे है। हालांकि, मंत्री आतिशी ने दोहराया कि केजरीवाल मुख्यमंत्री बने रहेंगे। उन्होंने कहा, “हमने हमेशा कहा है कि अरविंद केजरीवाल जेल से सरकार चलाएंगे। वह दिल्ली के मुख्यमंत्री बने रहेंगे।” AAP के शीर्ष रणनीतिकारों के मुताबिक, फिलहाल केजरीवाल का विकल्प ढूंढने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है।

कानून के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) तब तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं, जब तक उन्हें दोषी करार नहीं दिया जाता। दरअसल, जब सत्येन्द्र जैन और मनीष सिसौदिया को गिरफ्तार किया गया था, तब केजरीवाल ने उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने से पहले समय लिया था। ये दोनों बिना विभाग के मंत्री बने रहे।


व्यावहारिक रूप से AAP के मामले में जो बात मदद कर सकती है, वो ये है कि केजरीवाल के पास कोई विभाग नहीं है। हालांकि, राजनीतिक रूप से यह एक बुद्धिमानी भरा कदम नहीं हो सकता है।

हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के मामले में, झारखंड के मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दे दिया था और गिरफ्तारी से पहले राज्यपाल के सामने बहुमत साबित किया था, जिससे उनकी सरकार बच गई थी।

क्या कहता है नियम?

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुसार, दोषी साबित होने तक किसी चुने हुए प्रतिनिधि को पद नहीं छोड़ना होता है। हालांकि, पद पर बने रहने को लेकर एक नैतिक सवाल जरूर खड़ा होता है।

लालू यादव और, हाल ही में, हेमंत सोरेन ने इस्तीफा दे दिया था, राज्यपाल को बहुमत साबित किया और फिर उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

क्योंकि केजरीवाल ने इस्तीफा नहीं दिया है, इसलिए वह गिरफ्तार होने वाले पहले मौजूदा मुख्यमंत्री बन गए हैं। हालांकि, केजरीवाल को मुख्यमंत्री बने रहने के लिए अदालत या जेल से कुछ राहत की जरूरत होगी।

दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिए जाने को देखते हुए उपराज्यपाल की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

अगर केजरीवाल CM बने रहने का फैसला करते हैं, तो LG "संवैधानिक मशीनरी के टूटने" का हवाला दे सकते हैं और धारा 239 AB के तहत राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं। उपराज्यपाल धारा 239 AA के तहत सरकार को बर्खास्त करने के लिए भी यही कारण बता सकते हैं।

AAP के पास आगे क्या रास्ता?

AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह अक्सर असंतुष्ट विधायकों और कार्यकर्ताओं के लिए पार्टी के फायरफाइटर और संकट मोचन रहे। उनके भी सलाखों के पीछे होने से यह बड़ा सवाल है कि अब यह भूमिका कौन निभाएगा।

AAP मंत्री गोपाल राय, जो न केवल कैबिनेट में सबसे सीनियर मंत्री हैं, बल्कि AAP की स्थापना के दिनों से ही AAP के साथ हैं। उन्हें पार्टी को एकजुट रखने के लिए कदम उठाना होगा।

अगर केजरीवाल लंबे समय तक गिरफ्तारी में रहते हैं, तो AAP के रणनीतिकारों को भी लगता है कि ऐसे में उनका मुख्यमंत्री बने रहना राजनीतिक रूप से मुश्किल होगा। इसलिए पार्टी मुख्यमंत्री की सहमति से किसी को नियुक्त करने के लिए आगे बढ़ सकती है। ऐसी भी संभावना है कि केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल उनकी जगह भर दें।

केजरीवाल की गिरफ्तारी के साथ, पार्टी में अगले सबसे बड़े जन नेता पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान हैं। मान से यह भी उम्मीद की जाती है कि वह गुट को एकजुट रखने और पार्टी के अभियान को आक्रामक मोड में रखने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। पंजाब के मुख्यमंत्री के शुक्रवार को दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है।

गिरफ्तारी को चुनाव प्रचार का मुद्दा बनाएगी AAP

केजरीवाल पहले ही दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और गुजरात में पार्टी का अभियान शुरू कर चुके हैं। AAP 23 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। हालांकि, सलाखों के पीछे अपने सबसे बड़े चेहरे के साथ, बड़ा सवाल यह है कि क्या AAP के दूसरे नंबर के नेता अभियान को तेजी से चला पाएंगे या नहीं?

AAP के राष्ट्रीय महासचिव संदीप पाठक ने ट्वीट किया है कि केजरीवाल की गिरफ्तारी बीजेपी के लिए महंगी साबित होगी। पंजाब में AAP की जबरदस्त जीत के पीछे पाठक का ही हाथ है। वही वो व्यक्ति भी हैं, जो I.N.D.I.A. ब्लॉक के भीतर पार्टी के प्रमुख वार्ताकार हैं।

AAP को उम्मीद है कि वह केजरीवाल की गिरफ्तारी और AAP के दूसरे नेताओं की गिरफ्तारियों को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाएगी। पार्टी को उम्मीद है कि लोग उसका समर्थन करेंगे, क्योंकि केजरीवाल एक जन नेता हैं और उन्हें राष्ट्रीय राजधानी में बड़ा समर्थन हासिल है।

अभी के लिए, AAP की चुनौतियां कई गुना बढ़ गई हैं। कई सवाल खड़े हो गए हैं, जैसे- केजरीवाल कब तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे? अगर उनका मुख्यमंत्री पद पर बने रहना राजनीतिक रूप से अस्थिर हो जाता है, तो क्या वे किसी और को नियुक्त करेंगे? अगर केजरीवाल जेल से दिल्ली पर शासन करने का निर्णय लेते हैं, तो क्या उस स्थिति को चुनौती नहीं दी जाएगी और दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाने का रास्ता नहीं खुल जाएगा? AAP अपने विधायकों की सुरक्षा के लिए क्या करेगी? और आखिरकार, AAP के लोकसभा अभियान का नेतृत्व कौन करेगा?

प्रवर्तन निदेशालय की एक टीम गुरुवार शाम 7 बजे दिल्ली CM के आवास पर पहुंची। उससे कुछ देर पहले ही दिल्ली हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री को दंडात्मक कार्रवाई या गिरफ्तारी के खिलाफ अंतरिम राहत या सुरक्षा प्रदान करने से इनकार कर दिया था।

AAP की लीगल टीम हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने और गिरफ्तारी से सुरक्षा मांगने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने वाली थी, लेकिन ED के अधिकारी AAP से पहले ही पहुंच गए। दो घंटे की तलाशी और पूछताछ के कुछ देर बाद उन्होंने मुख्यमंत्री को गिरफ्तार कर लिया।

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