असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए होने वाले महामुकाबले की घड़ी नजदीक आ गई है। 9 अप्रैल 2026 को होने वाले मतदान से पहले विभिन्न सर्वे एजेंसियों ने ओपिनियन पोल सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में VoteVibe का ओपिनियन पोल सामने आया है। ‘वोट ट्रैकर’ ओपिनियन पोल को सीएनएन-न्यूज18 पर जारी किया गया है। इस ओपिनियन पोल के मुताबिक, राज्य में भारतीय जनता पार्टी की फिर से वापसी हो सकती है। वहीं चुनाव में कांग्रेस की करारी हार का अनुमान भी जताया गया है।
सीएनएन-न्यूज़18 पर जारी वोटवाइब के ताज़ा वोट ट्रैकर ओपिनियन पोल के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन असम के आगामी चुनावों में कांग्रेस को बड़े अंतर से हरा सकता है। साथ ही, यह गठबंधन 2021 के मुकाबले और भी मजबूत जनादेश के साथ सत्ता में वापसी करता दिख रहा है। इस सर्वे के मुताबिक, 126 सीटों वाली विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी को करीब 87 से 97 सीटें मिल सकती हैं। वहीं, कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन को केवल 26 से 36 सीटों तक ही सीमित रहने का अनुमान है। साल 2021 के चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने कुल 75 सीटें जीती थीं, जिनमें से 60 सीटें अकेले भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई थीं।
मुख्यमंत्री की पहली पंसद कौन?
इससे पहले 23 मार्च को सामने आए वोटवाइब के ओपिनियन सर्वे में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को 80 से 90 सीटें मिलने का अनुमान था। अब इस अनुमान को बढ़ाकर और ज्यादा सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। वोट शेयर की बात करें तो सर्वे के अनुसार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को करीब 44 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष को लगभग 36.7 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है। सर्वे में यह भी सामने आया कि करीब 47 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को अगली बार भी इस पद पर देखना चाहते हैं। वहीं, लगभग 35 प्रतिशत लोगों ने असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई को मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी दूसरी पसंद बताया है।
चुनाव में ये मुद्दे होंगे अहम
पूर्वोत्तर का अहम राज्य असम में 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा, जिसमें 126 विधायकों का चुनाव किया जाएगा। सर्वे में शामिल लोगों के मुताबिक, इस बार चुनाव में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और दिवंगत गायक जुबिन गर्ग की मौत की निष्पक्ष जांच जैसे मुद्दे प्रमुख बने हुए हैं। वहीं, लगभग 30 प्रतिशत लोगों का मानना है कि मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के दौरान भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को अच्छी तरह संभाला है। इसी तरह, करीब 29 प्रतिशत लोगों ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के दौरान भारत की कूटनीति काफी मजबूत रही है। इसके अलावा, 33 प्रतिशत लोगों ने बताया कि वे 9 अप्रैल को वोट देने का फैसला राज्य सरकार के कामकाज के आधार पर करेंगे। ऐसे में जुबिन गर्ग की मौत का मामला भी चुनाव में एक अहम मुद्दा बन सकता है।
जुबिन गर्ग की मौत बन सकती है बड़ा मुद्दा
राज्य के राजनीतिक जानकारों की राय के अनुसार, दिवंगत गायक जुबिन गर्ग से जुड़ा भावनात्मक मामला इस चुनाव में काफी अहम बन सकता है। राज्य सरकार ने भी उनकी मौत के बाद पहले 100 दिनों के भीतर न्याय दिलाने का वादा किया था। सर्वे के मुताबिक, करीब 42.6 प्रतिशत लोग मानते हैं कि यह मुद्दा आने वाले चुनावों में बड़ा असर डाल सकता है। इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस ने भी इसे अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल किया है। पार्टी ने इसे राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण मानते हुए लोगों तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने घोषणापत्र जारी करते समय कहा कि उनकी पार्टी जुबिन गर्ग मामले में 100 दिनों के भीतर न्याय दिलाने का वादा करती है।