Bihar Loksabha Election: बिहार में NDA के लिए चिंता का सबब बन सकती हैं ये लोकसभा सीट

Bihar Loksabha Election: 2019 के लोकसभा चुनाव में NDA को मिली प्रचंड जीत के बीच कुछ सीट ऐसी थीं, जहां BJP को इस बार परेशानी हो सकती है। पिछले लोकसभा चुनाव में बिहार की कम से कम छह सीट पर जीत का अंतर एक लाख वोटों से कम था और इनमें से चार सीट गंगा के दक्षिणी क्षेत्र में हैं

अपडेटेड Mar 18, 2024 पर 6:15 AM
Bihar Loksabha Election: बिहार में कुछ 2019 लोकसभा चुनाव में कुछ सीट ऐसी थीं, जहां BJP को इस बार परेशानी हो सकती है

Bihar Loksabha Election: बिहार में पांच साल पहले विपक्ष को करारी शिकस्त देने वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) इस लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) में सभी 40 सीट पर जीत हासिल करने की उम्मीद कर रहा है। हालांकि, इनमें से लगभग एक-चौथाई सीट ऐसी हैं, जो NDA के लिए चिंता का सबब बन सकती हैं। लोकसभा चुनाव 2019 में 'मोदी की सुनामी' में BJP, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की जनता दल यूनाइटेड (JDU) और दिवंगत राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) को संयुक्त रूप से 39 सीट पर जीत मिली थी। राज्य में NDA का वोट प्रतिशत 53 से ज्यादा था, जो विपक्षी 'महागठबंधन' को मिले वोटों से लगभग 20 प्रतिशत ज्यादा था।

लेकिन NDA को मिली प्रचंड जीत के बीच कुछ सीट ऐसी थीं, जहां BJP को इस बार परेशानी हो सकती है। पिछले लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) में बिहार की कम से कम छह सीट पर जीत का अंतर एक लाख वोटों से कम था और इनमें से चार सीट गंगा के दक्षिणी क्षेत्र में हैं।

जहानाबाद सीट पर विपक्ष एकजुट


इनमें से एक लोकसभा सीट जहानाबाद है, जहां JDU के चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी जीत हासिल करने में कामयाब रहे थे, लेकिन जीत का अंतर मात्र 1,751 वोटों का था। जहानाबाद सीट पर उपविजेता रहे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता सुरेंद्र प्रसाद यादव ने पहले इस इलाके का प्रतिनिधित्व किया था।

इस बार RJD ने एक समय अपनी कट्टर प्रतिद्वंद्वी रही भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के साथ गठबंधन किया है। दोनों दलों ने विधानसभा चुनावों में जहानाबाद और आसपास के इलाकों में काफी अच्छा प्रदर्शन किया था।

यह क्षेत्र कुछ दशक पहले तक धुर-वामपंथी कार्यकर्ताओं और जमींदारों की निजी सेना के बीच खूनी संघर्ष के लिए सुर्खियों में रहता था।

विधानसभा चुनाव 2020 में RJD-CPI(M) गठबंधन ने जहानाबाद लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सभी सीट पर जीत हासिल की थी।

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर NDA और 'महागठबंधन' दोनों ही माथापच्ची में जुटे हैं और यह तय करने की कोशिश कर रहे हैं कि इस बार किस पार्टी को यह सीट दी जाए और किसे उम्मीदवार बनाया जाए।

पाटलिपुत्र से भी कड़ा मुकाबला

इस बार पटना साहिब से सटे पाटलिपुत्र में भी कड़ा मुकाबला देखे जाने की उम्मीद है हालांकि ज्यादातर शहरी आबादी BJP समर्थक मानी जाती है।

विधानसभा चुनावों में औरंगाबाद और काराकाट लोकसभा क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाली सीट पर भी 'महागठबंधन' ने एकतरफा जीत हासिल की थी। NDA 2009 से इन दोनों लोकसभा सीट पर जीत दर्ज करती आ रही है।

लोकसभा चुनाव 2019 में दक्षिण बिहार की दो अन्य सीट, जिन पर BJP ने आसान जीत दर्ज की थी उनमें आरा और सासाराम क्षेत्र शामिल हैं, लेकिन 2020 विधानसभा चुनाव में महागठबंधन मतदाताओं को प्रभावित करने में सफल रहा था। आरा से मौजूदा सांसद केंद्रीय मंत्री आर के सिंह हैं। सासाराम (सुरक्षित) निर्वाचन क्षेत्र को कभी पूर्व उप-प्रधानमंत्री जगजीवन राम का गढ़ माना जाता था।

किशनगंज सीट पर NDA ज्यादा मेहनत की जरूरत

NDA को गंगा के उत्तरी क्षेत्र में किशनगंज लोकसभा सीट पर अतिरिक्त प्रयासों की जरूरत हो सकती है। 2019 के लोकसभा चुनाव में NDA गठबंधन को इसी सीट पर हार का सामना करना पड़ा था।

NDA को कटिहार, छपरा, सीवान और महाराजगंज लोकसभा सीट पर भी कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जहां विधानसभा चुनावों में गठबंधन ने अच्छा प्रदर्शन किया था।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।