Bihar Loksabha Election: नीतीश कुमार के U-टर्न को कैसे भुना रहे हैं तेजस्वी यादव? BJP-JDU को कड़ी टक्कर देने की तैयारी

Bihar Loksabha Election: नीतीश कुमार अब भी राज्य में एक बड़ा नाम हैं, लेकिन उनकी राजनीति ने JDU की छवि पर भी जरूर कुछ असर किया है। उनके बार-बार पार्टी बदलने ने मतदाताओं और पार्टियों के बीच सवाल खड़े कर दिए हैं। तेजस्वी यादव ने नवंबर 2020 के विधानसभा चुनावों के दौरान नौकरियों का वादा करके RJD को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने में मदद की थी

अपडेटेड Apr 12, 2024 पर 1:35 PM
Bihar Loksabha Election: नीतीश कुमार के U-टर्न को कैसे भुना रहे हैं तेजस्वी यादव

Bihar Loksabha Election: बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की BJP और तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) की RJD के बीच सीधी लड़ाई होने वाली है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की JDU 16 लोकसभा सीटों पर और BJP को 17 सीटों पर लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2024) लड़ने पर सहमत हो गए हैं। बिहार से 40 सांसद चुनकर लोकसभा पहुंचते हैं। इस साल की शुरुआत से ही इस राज्य की राजनीति में काफी उठा-पटक देखने को मिली। जब जनवरी में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अपने पुरानी साथी BJP का रुख किया और NDA में शामिल हो गए। 2019 के लोकसभा चुनाव में NDA ने 39 लोकसभा सीटें जीतीं। BJP ने उन सभी 17 सीटों पर जीत हासिल की, जहां उसने चुनाव लड़ा था। JDU को 16 सीटें मिलीं, LJP को छह सीटें मिलीं।

BJP और RJD ने लगा दी पूरी ताकत

जमुई में अपनी हालिया चुनावी रैली के दौरान, पीएम मोदी ने दोहराया था कि NDA राज्य में सभी 40 और देश भर में 400 से ज्यादा सीटें जीतेगी। इस बीच, तेजस्वी लोगों से लोकसभा चुनाव में BJP के "प्रोपेगेंडा" में नहीं फंसने की अपील कर रहे हैं।


'मोदी की गारंटी' की 'चीन के माल' से तुलना करते हुए, तेजस्वी ने कहा कि प्रधानमंत्री 'कभी असली मुद्दों पर बात ही नहीं करते।'

RJD नेता ने X पर पोस्ट किया, “मोदी जी न तो नौकरियों के बारे में बात करते हैं और न ही छात्रों, युवाओं, किसानों या मजदूरों के बारे में। वह गांव और गरीबों की बात नहीं करते। मोदी जी शिक्षा, स्वास्थ्य, स्कूल या अस्पताल की बात नहीं करते। फिर 400 पार करने का क्या मतलब है?"

नीतीश के पलटने से JDU की छवि पर असर

भले ही नीतीश कुमार (Nitish Kumar) अब भी राज्य में एक बड़ा नाम हैं, लेकिन उनकी राजनीति ने JDU की छवि पर भी जरूर कुछ असर किया है। उनके बार-बार पार्टी बदलने ने मतदाताओं और पार्टियों के बीच सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने महागठबंधन से NDA में जाने के लिए मुख्यमंत्री पर बार-बार कटाक्ष किया। यादव ने राज्य विधानसभा में पूछा, "क्या पीएम मोदी गारंटी दे सकते हैं कि नीतीश कुमार फिर से यू-टर्न नहीं लेंगे।"

इधर JDU और NDA के गठबंधन एक महीना भी पूरा नहीं हुआ, उधर RJD ने जन विश्वास यात्रा निकाल दी। तेजस्वी ने बिहार के 40 में से 32 जिलों की यात्रा की।

उन्होंने बेरोजगारी, गरीबी, महंगाई और "नीतीश कुमार की अवसरवादिता" जैसे मुद्दों पर बात की। उन्होंने मतदाताओं को JDU के साथ गठबंधन सरकार में अपने कार्यकाल के 17 महीनों में अपने काम की भी याद दिलाई।

तेजस्वी की रणनीति कितनी कारगर?

उन्होंने कहा कि RJD के लिए एक नए शब्द- M-Y या मुस्लिम-यादव नहीं है, बल्कि BAAP (बहुजन-अगड़ा-आधी आबादी-गरीब) है, जिसमें न केवल पिछड़े बल्कि ऊंची जातियां, महिलाएं और गरीब भी शामिल हैं।

I.N.D.I.A. ब्लॉक बहुत ज्यादा विरोधाभासों से भरा हुआ है, ऐसा कहा जा रहा है कि RJD-कांग्रेस महागठबंधन में CPI-ML, CPM और CPI के शामिल होने से तेजस्वी यादव को मदद मिल सकती है।

RJD नेता शिवानंद तिवारी ने Hindustan Times को बताया, "इसमें कोई शक नहीं है कि NDA को 39/40 नहीं मिलने वाला है। तेजस्वी यादव का ग्राफ काफी ऊपर चला गया है। युवा मतदाता उनकी रैलियों में आ रहे हैं और उन्होंने महागठबंधन को बहुत जरूरी उत्साह दिया है। उनके मुकाबले नीतीश का शेयर नीचे आ गया है, उनके अपने ही लोग उनके दल-बदल को लेकर उनसे परेशान हैं।"

तेजस्वी यादव ने नवंबर 2020 के विधानसभा चुनावों के दौरान नौकरियों का वादा करके RJD को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने में मदद की थी।

NDA को छपरा, सीवान और महाराजगंज लोकसभा सीटों पर भी कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जहां उसे 2020 के विधानसभा चुनावों में बड़ी हार का सामना करना पड़ा। बिहार की 40 सीटों पर 19 अप्रैल से सात चरणों में मतदान होगा।

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