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गाजीपुर के महारण में मुख्तार की मौत से सहानुभूति बटोर पाएगा अंसारी परिवार? BJP ने भी लगाया एड़ी चोटी का जोर, क्या कहता है वोटर

UP Lok Sabha Chunav 2024: इस चुनाव में इस धरती पर ऐसा चुनावी महाभारत हो रहा है, जिसमें सभी के अपने-अपने दावे हैं। अंसारी परिवार दावा कर रहा है कि यहां पर सहानुभूति के नाम पर वोट पड़ेंगे। किसके प्रति सहानुभूति? सपा नेता कहते हैं कि मुख्तार अंसारी के निधन के बाद लोगों में सहानुभूति है। अंसारी परिवार को लगता है कि लोग बहुत दुखी हैं और मुख्तार के जाने से परेशान भी, लेकिन जमीन पर इस तरह का कुछ दिखता नहीं है

Brijesh Shuklaअपडेटेड May 27, 2024 पर 8:54 PM
गाजीपुर के महारण में मुख्तार की मौत से सहानुभूति बटोर पाएगा अंसारी परिवार? BJP ने भी लगाया एड़ी चोटी का जोर, क्या कहता है वोटर
गाजीपुर के महारण में मुख्तार की मौत से सहानुभूति बटोर पाएगा आंसारी परिवार?

गंगा की गोद में बसा हुआ गाजीपुर। प्रसिद्ध लेखक और महाभारत जैसे सीरियल के संवाद लिखने वाले डॉक्टर राही मासूम रजा इसी धरती पर पैदा हुए। कभी यह कम्युनिस्टों की धरती थी। प्रसिद्ध वामपंथी नेता सरजू पांडे इसी धरती पर पैदा हुए। गंगा तट पर ही जनसंघ के नेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था कि जिस दिन गाजीपुर की धरती पर उनकी पार्टी का झंडा फहरेगा, उस दिन उत्तर प्रदेश की धरती पर जनसंघ की सत्ता होगी। इस चुनाव में इस धरती पर ऐसा चुनावी महाभारत हो रहा है, जिसमें सभी के अपने-अपने दावे हैं। अंसारी परिवार दावा कर रहा है कि यहां पर सहानुभूति के नाम पर वोट पड़ेंगे। किसके प्रति सहानुभूति? सपा नेता कहते हैं कि मुख्तार अंसारी के निधन के बाद लोगों में सहानुभूति है। अंसारी परिवार को लगता है कि लोग बहुत दुखी हैं और मुख्तार के जाने से परेशान भी, लेकिन जमीन पर इस तरह का कुछ दिखता नहीं है।

भारतीय जनता पार्टी ने इस बार मनोज सिन्हा की जगह पर पारस नाथ राय को मैदान में उतारा है। मनोज सिन्हा इस समय जम्मू कश्मीर के उप-राज्यपाल हैं। अफजाल अंसारी पिछले चुनाव में BSP के टिकट पर मनोज सिन्हा से लगभग एक लाख 20,000 वोटों से जीते थे। तब समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच चुनावी गठजोड़ था, लेकिन बाद में अफजाल अंसारी समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए और वो साइकिल पर सवार होकर मैदान में आ गए।

डंके की चोट पर BSP पर जा रहा उसका वोटर

बहुजन समाज पार्टी ने इस बार डॉक्टर उमेश कुमार सिंह को मैदान में उतारा है। उमेश कुमार सिंह बनारस यूनिवर्सिटी के महामंत्री रह चुके हैं, लेकिन पिछले चुनाव और इस चुनाव में काफी अंतर है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच गठजोड़ था। इसका असर मतदान पर हुआ था और परिणाम पर भी।-

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