Loksabha Election 2024: 90% उम्मीदवारों का ऐलान, 100 मौजूदा सांसदों का टिकट कटा, लोकसभा चुनाव में कितनी कारगर है BJP की ये रणनीति
Loksabha Election 2024: BJP ने पिछले साल के आखिर में हुए विधानसभा चुनावों में भी कुछ ऐसा रणनीति अपनाई थी, जब उसने चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले ही अपनी कुछ मजबूत सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया था। इसी तरह लोकसभा चुनाव में भी पार्टी ने शेड्यूल से पहले ही उम्मीदवारों का ऐलान करना शुरू कर दिया था
MoneyControl News
अपडेटेड Mar 26, 2024 पर 2:28 PM
Loksabha Election 2024: 90% उम्मीदवारों का ऐलान, 100 मौजूदा सांसदों का टिकट कटा
Loksabha Election 2024: भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस लोकसभा चुनाव (Loksabha Polls) में करीब-करीब 440 सीट पर लड़ने जा रही है। पार्टी ने पहले चरण के मतदान से चार हफ्ते पहले ही इन सीटों में से 90 फीसदी यानी करीब 402 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। देश में आम चुनाव की शरुआत 19 अप्रैल से होने वाली है। सात चरणों मतदान होगा और करीब 44 दिनों तक लोकसभा चुनाव चलेंगे। BJP ने अपने मौजूदा लोकसभा सांसदों में से 100 या लगभग एक तिहाई का टिकट काट दिया है। पार्टी की इस रणनीति के पीछे कई बड़े मैसेज हैं।
पहला तो ये कि आगामी चुनावों में हर एक BJP उम्मीदवार को अपने संसदीय क्षेत्र में प्रचार करने के लिए कम से कम एक महीने का समय मिलेगा। ये उस लड़ाई के लिए अहम, जहां BJP प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी के लिए 370 सीटों के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए 2019 में सीटें जीतने की अपनी स्ट्राइक रेट को 70% से बढ़ाकर 2024 में 83% करना चाहती है।
सत्ता विरोधी लहर को कम करने की कोशिश
दूसरा, 100 से ज्यादा सांसदों को चुनावी मैदान से बाहर करने का मतलब है कि बीजेपी अपने मौजूदा सांसदों को किनारे करने में जरा भी संकोच नहीं करती है। खासकर, जिनके बारे में पार्टी को लगता है कि वे दोबारा नहीं जीत सकते।
इसमें गाजियाबाद से जनरल वीके सिंह, बक्सर से अश्विनी चौबे और नई दिल्ली से मीनाक्षी लेखी जैसे कुछ बड़े नाम और केंद्रीय मंत्री शामिल हैं। बीजेपी ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, रमेश बिधूड़ी और प्रवेश वर्मा जैसे विवादित नेताओं को भी टिकट नहीं दिया।
ये सब सत्ता विरोधी लहर को कम करने की भी एक कोशिश है। हालांकि, पार्टी का कहना है कि हटाए गए उम्मीदवारों के खिलाफ फैक्टर काम कर रहा है, जबकि प्रधान मंत्री की अपील मजबूत बनी हुई है।
'हर एक सीट पर बीजेपी का उम्मीदवार कमल'
बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने News18 को बताया, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय सम्मेलन में कैडर को अपने पहले संदेश में ये साफ कर दिया था कि हर एक सीट पर बीजेपी का उम्मीदवार कमल है।”
तीसरा, पार्टी ने अपने लिए 370 सीटें और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के लिए 400 से ज्यादा सीटें हासिल करने का लक्ष्य रखते हुए बड़ी ही सावधानी से सीट शेयरिंग की है।
उदाहरण के लिए- आंध्र प्रदेश में तेलुगु देशम पार्टी और पवन कल्याण के साथ हुए गठबंधन को देखें, तो इसने यहां छह सीटों पर BJP की संभावनाओं को उज्ज्वल कर दिया है। पिछली बार एक भी सीट नहीं मिलने के बाद वो राज्य में चुनाव लड़ेगी।
पंजाब और ओडिशा में नहीं बनी बात
बीजू जनता दल के साथ गठबंधन काम नहीं आया, क्योंकि BJP को लगता है कि संबित पात्रा पुरी से और अपराजिता सारंगी भुवनेश्वर जीत सकते हैं, लेकिन BJD ये सीटें छोड़ने को तैयार नहीं थी।
हालांकि, पंजाब में BJP की संभावनओं को थोड़ा झटका लगा है। भारतीय जनता पार्टी पंजाब में अकेले लोकसभा चुनाव लड़ेगी। क्योंकि स्थानीय शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ उसकी बातचीत नहीं बन पाई है।
महाराष्ट्र में, BJP ने एकनाथ शिंदे और अजीत पवार के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने की योजना वाली 27 सीटों में से 23 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है।
कैसी है कांग्रेस की तैयारी?
BJP के अब तक के 402 उम्मीदवारों की तुलना में, कांग्रेस केवल 280 सीटों पर लड़ने की योजना बना रही है, जिसमें से उसने अब तक 193 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है।
BJP ने पहली लिस्ट में ही अपनी पारंपरिक सीट- वाराणसी से PM मोदी और गांधीनगर से गृह मंत्री अमित शाह समेत लगभग सभी हाई-प्रोफाइल उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इसके उलट कांग्रेस ने अभी तक यह घोषित नहीं किया है कि उसकी पारंपरिक सीट- रायबरेली और अमेठी से कौन चुनाव लड़ेगा।
करो-मरने वाले चुनाव में, कई लोगों को उम्मीद थी कि अमेठी और रायबरेली से कांग्रेस की लिस्ट में पहला नाम गांधी भाई-बहन का होगा ताकि कैडर को यह विश्वास दिलाया जा सके कि इन चुनावों में पार्टी जी तोड़ मेहनत करनी है। लेकिन सस्पेंस अभी भी जारी है, बीजेपी ने भी अपनी रायबरेली सीट को फिलहाल रोक रखा है, क्योंकि वो पहले कांग्रेस के नाम का इंतजार कर रही है।