Loksabha Elections 2024: 1 मार्च से हर दिन 100 करोड़ कैश जब्त कर रहा चुनाव आयोग, अब तक कुल 4,650 करोड़ की जब्ती

Loksabha Elections 2024: चुनाव आयोग ने बताया देश की 18वीं लोकसभा के चुनाव के लिए शुक्रवार को पहले चरण का मतदान होगा, जिससे पहले प्रवर्तन एजेंसियों ने धनबल पर रोक लगाने के लिए 4,650 करोड़ रुपये से ज्यादा की जब्ती की है

अपडेटेड Apr 15, 2024 पर 9:21 PM
Loksabha Elections 2024: 1 मार्च से हर दिन 100 करोड़ कैश जब्त कर रहा चुनाव आयोग

Loksabha Elections 2024: चुनाव आयोग (EC) ने सोमवार को कहा कि लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) के मद्देनजर अधिकारियों ने कैश, नशीले पदार्थ और शराब समेत कुल 4,650 करोड़ रुपए की जब्ती की है। कुल जब्ती में 45 प्रतिशत हिस्सेदारी नशीले पदार्थों की है। आयोग ने कहा कि एक मार्च से की गई जब्ती, 2019 के संसदीय चुनाव के दौरान जब्त किए गए 3,475 करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर गई है।

आयोग ने 16 मार्च को सात चरणों में लोकसभा चुनाव कराने की घोषणा की थी। पहले चरण का मतदान 19 अप्रैल को और अंतिम चरण का मतदान एक जून को होना है।

4,650 करोड़ रुपये से ज्यादा की जब्ती


एक बयान के मुताबिक, "ऐसे में जब 2024 के आम चुनाव की प्रक्रिया जारी है, आयोग देश में लोकसभा चुनाव के 75 सालों के इतिहास में सबसे ज्यादा जब्ती करने की राह पर है।" आयोग ने कहा कि अधिकारियों ने एक मार्च से प्रतिदिन 100 करोड़ रुपए मूल्य की जब्ती की है।

देश की 18वीं लोकसभा के चुनाव (Lok Sabha Election 2024) के लिए शुक्रवार को पहले चरण का मतदान होगा, जिससे पहले प्रवर्तन एजेंसियों ने धनबल पर रोक लगाने के लिए 4,650 करोड़ रुपये से अधिक की जब्ती की है।

कुल 4,658 करोड़ रुपए मूल्य की जब्ती में 395 करोड़ रुपए नकद, 489 करोड़ रुपए से अधिक की शराब और 2,069 करोड़ रुपए मूल्य के मादक पदार्थ शामिल हैं।

इन राज्यों से बड़ी संख्या में जब्ती

आयोग ने कहा कि राजनीतिक वित्तपोषण के अलावा काले धन का इस्तेमाल, समान अवसर को प्रभावित कर सकता है। यह जब्ती, प्रलोभन और कदाचार मुक्त लोकसभा चुनाव कराने तथा समान अवसर सुनिश्चित करने के उसके संकल्प का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

पिछले कुछ सालों में गुजरात, पंजाब, मणिपुर, नगालैंड, त्रिपुरा और मिजोरम में चुनावों के दौरान बड़ी मात्रा में जब्ती की गई है।

आयोग ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने पिछले महीने आम चुनाव की घोषणा करते हुए धन बल को एक प्रमुख चुनौती बताया था।

चुनाव आयोग ने कहा कि चुनाव प्रचार में राजनीतिक नेताओं की मदद करते पाये गए करीब 106 सरकारी अधिकारियों के खिलाफ उसने कड़ी कार्रवाई की है।

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