MP Loksabha Election: क्या छिंदवाड़ा में आसान रहेगी कांग्रेस की जीत, कमल नाथ परिवार का फिर चलेगा जादू?
MP Loksabha Election: अपने पहले कार्यकाल में भी, 1980 से 1991 तक, वह लगातार चार बार चुने गए। इसके अलावा, वह सबसे ज्यादा बार चुने जाने वाले उम्मीदवारों की लिस्ट में भी शामिल होने से केवल एक जीत दूर हैं। नाथ CPI के इंद्रजीत गुप्ता और पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के 10 बार की जीत के रिकॉर्ड से पीछे एक कदम दूर हैं
MoneyControl News
अपडेटेड Apr 19, 2024 पर 12:32 AM
MP Loksabha Election: कांग्रेस का कंफर्ट जोन है छिंदवाड़ा, क्या जीत का सिलसिला जारी रख पाएगा कमल नाथ का परिवार
MP Loksabha Election 2024: काफी ज्यादा उथल-पुथल वाले संसदीय क्षेत्र में, अभी भी कुछ सीटें ऐसी हैं, जो न केवल वफादार हैं, बल्कि उन्होंने लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) में किसी दूसरी पार्टी को चुनने के बारे में कभी सोचा भी नहीं। ऐसा ही एक संसदीय सीट मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा है, जहां 19 अप्रैल को पहले चरण में मतदान होगा। छिंदवाड़ा लोकसभा सीट (Chhindwara Lok Sabha Seat) पर किसी भी दूसरी सीट की तुलना में सबसे ज्यादा बार कांग्रेस को वोट दिया गया है, यानी 17 में से 17 चुनावों में हर बार यहां कांग्रेस ही जीती।
भले ही आम चुनावों में इस सीट से कोई दूसरी पार्टी नहीं जीत पाई, लेकिन BJP के सुंदर लाल पटवा, 1997 का उपचुनाव जीतने में कामयाब रहे। पटवा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे थे। सीट के मतदान पैटर्न से यह कहना मुश्किल हो जाता है कि ये कांग्रेस के प्रति वफादार थी या कमल नाथ के प्रति, खासकर 1980 के बाद। लेकिन, एक विश्लेषण से पता चलता है कि 17 में से 11 बार यहां से कमल नाथ या उनके परिवार का ही कोई जीता है।
Loksabha Election 2024: छिंदवाड़ा से नौ बार जीते कमलनाथ
2019 में, उनके बेटे नकुल नाथ इस सीट से चुने गए और 1996 में, उनकी पत्नी अलका इस सीट से चुनी गईं। कमल नाथ खुद इस सीट से नौ बार - 1980, 1984, 1989, 1991, 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 जीत चुके हैं। वो एक ही सीट से लगातार पांच बार (1998-2014) चुने गए कुछ नेताओं में शुमार हैं।
अपने पहले कार्यकाल में भी, 1980 से 1991 तक, वह लगातार चार बार चुने गए। इसके अलावा, वह सबसे ज्यादा बार चुने जाने वाले उम्मीदवारों की लिस्ट में भी शामिल होने से केवल एक जीत दूर हैं। नाथ CPI के इंद्रजीत गुप्ता और पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के 10 बार की जीत के रिकॉर्ड से पीछे एक कदम दूर हैं।
2014 और 2019 में BJP की लहर होने के बावजूद, संसदीय क्षेत्र ने अपने नेता और उनके परिवार के प्रति अपनी वफादारी जारी रखी। News18 की तरफ से विश्लेषण किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि, 2019 के चुनावों में, कांग्रेस को इस सीट पर अब तक के सबसे ज्यादा वोट मिले।
Loksabha Election 2024: वोट शेयर और अंतर में भी कमल नाथ का रिकॉर्ड
जब जीत के अंतर और वोट शेयर की बात आती है, तो इस सीट पर कमल नाथ का रिकॉर्ड है। सबसे ज्यादा वोट मार्जिन 1999 के चुनावों में हासिल हुआ, जब उन्होंने 1.88 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की। इसके अलावा, 1984 के चुनाव में कांग्रेस और कमल नाथ ने 67.17 प्रतिशत के सबसे ज्यादा वोट शेयर के साथ ये सीट जीती थी।
उनके बाद, गार्गी शंकर मिश्रा ने छिंदवाड़ा सीट से सबसे लंबे समय तक सेवा की और 1967 और 1977 के बीच तीन बार चुने गए। आंकड़े बताते हैं कि 1962 के चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट पर सबसे कम 81,726 वोट हासिल किए थे।
लेकिन, जब सबसे कम अंतर से सीट जीतने की बात आती है, तो कांग्रेस ने 1977 के आपातकाल के बाद के चुनाव में सबसे मुश्किल लड़ाई देखी। मिश्रा केवल 7,000 वोटों के अंतर से जीते थे। 1957 के चुनाव में पार्टी को इस सीट पर अपना अब तक का सबसे कम 26.9 प्रतिशत वोट शेयर प्राप्त हुआ।
Loksabha Election 2024: 1991 के बाद कांग्रेस Vs बीजेपी
इसके अलावा, 1991 के बाद इस सीट पर BJP और कांग्रेस के बीच लड़ाई देखी गई और भगवा पार्टी दूसरे नंबर पर रही। 1984 में भी बीजेपी दूसरे नंबर पर रही, लेकिन कांग्रेस को सबसे कड़ी चुनौती तब मिली, जब अलका उम्मीदवार थीं, जो इस सीट से एकमात्र महिला सांसद थीं। उस साल बीजेपी के चौधरी चंद्रभान सिंह कुबेर सिंह को 2.60 लाख वोट मिले, अलका के 2.81 लाख वोटों से केवल 21,000 कम।
Loksabha Election 2024: कमल नाथ ने 1996 और 2019 का चुनाव क्यों छोड़ दिया?
छिंदवाड़ा के इतिहास में 1996 अलग था। इस सीट पर एक महिला रेस में थी, वो भी सिर्फ थोड़े समय के लिए और सिर्फ एक डमी उम्मीदवार के तौर पर। 65 करोड़ रुपए के जैन हवाला मामले में चार्जशीट दाखिल होने के कारण कमल नाथ को टिकट नहीं दिया गया।
अपनी चार्जशीट में, CBI ने आरोप लगाया कि जैन बंधुओं ने नवंबर 1989 और अप्रैल 1991 के बीच कमल नाथ को 22 लाख रुपए की रिश्वत दी थी, जब वह सांसद थे।
लेकिन, सीट बचाने के लिए और कमलनाथ के बागी हो जाने के कारण उनकी पत्नी अलका को मौका मिला। वह अच्छी तरह से कामयाब रहीं, लेकिन अगले साल मामले से बरी होने के बाद ही उन्होंने कमल नाथ के लिए सीट खाली कर दी।
1997 में इस सीट पर उपचुनाव हुआ, लेकिन जनता ने कमल नाथ को स्वीकार नहीं किया। बीजपेी ने जीत हासिल की, क्योंकि सुंदर लाल पटवा ने 37,600 से कुछ ज्यादा वोटों के अंतर से सीट जीती। अगले साल, 1998 के लोकसभा चुनाव में, नाथ ने पटवा को 1.53 लाख वोटों के अंतर से हराया।
अगले पांच लोकसभा चुनावों में उन्होंने बिना किसी असफलता के इस सीट से जीत हासिल की। 2014 के चुनावों में, छिंदवाड़ा राज्य में कांग्रेस की जीती दो सीटों में से एक थी। दूसरी सीट गुना है, जहां से ज्योतिरादित्य सिंधिया जीते हैं।
2019 के चुनावों से थोड़ा पहले, दिसंबर 2018 में, उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था। यही वो समय था, जब नकुल तस्वीर में आए और उस साल राज्य से अकेले कांग्रेस सांसद थे।
2024 की लड़ाई
एक बार फिर कांग्रेस ने 2024 के चुनाव के लिए नकुल को टिकट दिया है। इस बार उनका मुकाबला विवेक बंटी साहू से है, जो दो बार विधानसभा चुनाव में नाथ से हार चुके हैं। 2019 के उपचुनाव में उन्होंने साहू को लगभग 26,000 वोटों से और 2023 में लगभग 36,600 वोटों से हराया।
छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र की सभी सात विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। यह सीट बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए महत्वपूर्ण है और दोनों को भरोसा है कि वे जीतेंगे।
जबकि कांग्रेस के लिए यह सीट इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके पास न केवल 17 लोकसभा चुनावों की विरासत है, बल्कि यह अकेली सीट है, जिस पर पार्टी का मध्य प्रदेश में नियंत्रण है। हालांकि, BJP उस सीट को जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी, जिसे वो कभी हासिल नहीं कर पाई है।