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हर बार पीएम उम्मीदवार के तौर पर पेश होकर बहुमत के साथ सरकार बनाने का रिकॉर्ड बना गये मोदी!

नरेंद्र मोदी आज तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने जा रहे हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में पड़ोसी देशों के शासनाध्यक्षों और करीब आठ हजार अतिथियों की मौजूदगी में मोदी और उनकी मंत्रिपरिषद के सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगी। स्वतंत्र भारत के इतिहास में ये एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है, जब कोई नेता पहली से लेकर तीसरी बार, लगातार, पीएम बना लोकसभा चुनावों में आधिकारिक तौर पर पीएम पद का उम्मीदवार घोषित होने और अपनी पार्टी या गठबंधन को पूर्ण बहुमत दिलाने के बाद।

Brajesh Kumar Singhअपडेटेड Jun 09, 2024 पर 12:08 PM
हर बार पीएम उम्मीदवार के तौर पर पेश होकर बहुमत के साथ सरकार बनाने का रिकॉर्ड बना गये मोदी!
Narendra Modi Oath Taking Ceremony: 2024 की जीत के साथ मोदी एक अनूठा रिकॉर्ड भी बना गये हैं, प्रधानमंत्री उम्मीदवार के तौर पर चुनाव में जनता के सामने प्रथम बार से लेकर तीसरे बार तक पेश होने और हर बार अपनी पार्टी या फिर चुनाव पूर्व गठबंधन को बहुमत दिलाने का।

जवाहरलाल नेहरू जब 1947 में पहली बार प्रधानमंत्री बने थे, तो महात्मा गांधी की कृपा से। गांधी ने सरदार पटेल के पक्ष में कांग्रेस का बहुमत होने के बावजूद नेहरू को कांग्रेस का अध्यक्ष बनवाया, मई 1946 में। उस समय देश में कांग्रेस की पंद्रह प्रदेश समितियां थी, उनमें से बारह ने पटेल के लिए समर्थन दिया था, एक भी प्रदेश कांग्रेस समिति ने नेहरू को समर्थन नहीं दिया था। लेकिन गांधी की इच्छा के कारण सरदार पटेल ने अध्यक्ष की रेस से खुद को बाहर किया और गांधी की योजना के मुताबिक नेहरू को अध्यक्ष की कुर्सी पर औपचारिक तौर पर बिठाया गया जुलाई 1946 में।

ये सबको पता था कि जो भी व्यक्ति कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी पर उस समय बैठेगा, वही सितंबर 1946 की अंतरिम सरकार में वायसराय की एक्जक्यूटिव काउंसिल का सदस्य होगा और फिर स्वतंत्रता हासिल होने पर देश का प्रथम प्रधानमंत्री। हुआ भी यही, इसी कारण 15 अगस्त 1947 को नेहरू स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने।

पटेल का हक मारकर गांधी ने नेहरू को जबरदस्ती कांग्रेस अध्यक्ष बनाया

सवाल उठता है कि आखिर गांधी ने पटेल का वाजिब हक मारते हुए क्यों नेहरू को जबरदस्ती कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया और फिर इसी नाते देश का पहला प्रधानमंत्री भी बनवाया। इसका कारण भी खुद गांधी ने ही बताया है। सरदार पटेल तो गांधी की बात मानते हुए देश और पार्टी हित में नेहरू का नेतृत्व स्वीकार करने के लिए तैयार हो सकते थे, लेकिन नेहरू सरदार पटेल के लिए ऐसा नहीं कर सकते थे, वो कांग्रेस छोड़कर विपक्ष की कोई पार्टी ज्वाइन करने से भी परहेज नहीं करते। गांधी की आशंका निर्मूल भी नहीं थी।

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