Rajnath Singh Interview: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने शुक्रवार (5 अप्रैल) को नेटवर्क18 ग्रुप के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी (Rahul Joshi) के साथ एक स्पेशल इंटरव्यू में इलेक्टोरल बॉन्ड (Electoral Bonds) के मुद्दे पर विपक्षी पार्टियों को मुंहतोड़ जवाब दिया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड को 'असंवैधानिक' करार दिए जाने के सवाल पर राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी राजनीतिक पार्टी को चुनावी चंदा देता है और उसका खुलासा हो जाता है तो इसमें किसी को क्या आपत्ति हो सकती है। इसमें बुरी बात क्या है? उन्होंने कहा कि अब डोनर के नाम बाहर आ चुके हैं।
राहुल जोशी ने रक्षा मंत्री से पूछा कि क्या अब लोग राजनीतिक दलों को कैश चंदा अधिक देंगे? इस पर राजनाथ सिंह ने कहा, "अब भविष्य बताएगा कि जो हम लोगों ने ये स्कीम (इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम) लागू की थी वह कितनी सही थी। यह समय बताएगा।" उन्होंने कहा कि यह स्कीम राजनीतिक फंडिंग में पार्दर्शिता के लिए लाई गई थी।
राजनाथ सिंह ने आगे कहा, "कहा जाता है कि इलेक्टोरल बॉन्ड किसका है। किस कंपनी के द्वारा दिया गया है। किस कैपलिस्ट के द्वारा दिया गया है इसकी जानकारी होनी चाहिए। कल को तो कोई ये भी कहेगा कि देश में किस व्यक्ति ने किस राजनीतिक पार्टी को वोट दिया इसकी भी जानकारी देनी चाहिए। क्या आप इसे स्वीकार करेंगे।"
रक्षा मंत्री ने विपक्षी पार्टियों पर हमला बोलते हुए सवाल किया कि दुनिया का कोई भी देश, जहां हेल्दी डेमोक्रेसी होगी वह इसे (किस पार्टी को वोट किया उसे सार्वजनिक करना) स्वीकार करेगा? उन्होंने पूछा कोई व्यक्ति अपना मत किस उम्मीदवार या पार्टी को दे रहा उसका भी खुलासा होना चाहिए?
विपक्ष के इस आरोपों पर कि रेड के बाद कंपनियों द्वारा 4,000 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे गए, इसके जवाब में राजनाथ सिंह ने कहा, "मान लीजिए, अगर ये आरोप सही है...हालांकि मुझे इस बारे में पता नहीं है...लेकिन क्या ये कर (चंदा देने के बाद) देने के बाद उनके केस बंद हो गए? इस सवाल का भी जवाब विपक्ष को देने चाहिए।"
सिंह ने कहा कि अगर किसी कंपनी पर केस चल रहे हैं तो वह चलते रहेंगे। चुनाव के दौरान डोनेट करने की वजह वह बंद नहीं हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि चुनावी चंदा देने की वजह से किसी के खिलाफ चल रहे केस बंद होने के सवाल ही नहीं है। एजेंसियां अपना काम करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि रेड और चुनावी चंदे को जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
आपको जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए केंद्र की चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द कर दिया था। शीर्ष अदालत ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए निर्वाचन आयोग को चंदा देने वालों, चंदे के रूप में दी गई राशि और चंदा प्राप्तकर्ताओं का खुलासा करने का आदेश दिया था।