गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने का मुद्दे लेकर, जब लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरे एक कथावाचक, करना पड़ा बुरी हार का सामना

Uttarakhand Loksabha Election 2024: गोपालमणि महाराज के बड़ी तादाद में अनुयायी हैं, ऐसे में उन्हें लगा कि चुनाव के दौरान ये अनुयायी वोट में तब्दील होगें, लेकिन जब लोकसभा चुनाव का परिणाम सामने आया तो हर कोई हैरान था, जिन्हें लोग एक मजबूत प्रत्याशी मान रहे थे वें केवल 1.2 प्रतिशत बोट यानी 10,686 मत ही लेकर आए

अपडेटेड Apr 17, 2024 पर 9:07 PM
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गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने का मुद्दे लेकर, जब लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरे एक कथावाचक

Uttarakhand Loksabha Election 2024: कहते हैं राजनीति अनिश्चितताओं का खेल है, यहां किसी एक की जीत को लेकर आश्वस्त होना सही नहीं है। खासतौर पर तब, जब चुनावी मैदान में ऐसा व्यक्ति उतरा हो, जो किसी क्षेत्र विशेष में अपनी पहचान बना चुका हो। बावजूद इसके प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ जाता है। ऐसी ही एक किस्सा उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल लोकसभा सीट पर 2019 के चुनाव में देखने को मिला, जब यहां से प्रसिद्ध कथावाचक गोपाल मणि महाराज (Gopal Mani Maharaj) लोकसभा प्रत्याशी के रूप में चुनावी रण में उतरे, लेकिन जो नतीजा आया उसका गोपाल मणि महाराज को शायद अंदाजा भी नहीं था।

दरअसल देश-विदेश में बतौर कथावाचक अपनी एक अलग पहचान बना चुके गोपाल ‘मणि’ महाराज संसद का रास्ता देखने लगे और चुनावी मैदान उतर गए। 2019 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) में वो यहां से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में खड़े हुए।

1.2 प्रतिशत वोट लाए


गोपालमणि महाराज के बड़ी तादाद में फॉलोअर्स हैं, ऐसे में उन्हें लगा कि चुनाव के दौरान ये अनुयायी वोट में तब्दील हो जाएंगे, लेकिन जब लोकसभा चुनाव का परिणाम सामने आया, तो हर कोई हैरान था।

जिन्हें लोग एक मजबूत प्रत्याशी मान रहे थे, वे केवल 1.2 प्रतिशत वोट यानी सिर्फ 10,686 मत ही लेकर आए, और उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। आलम यह था कि उनके गृहक्षेत्र चिन्यालीसौड़ से भी उन्हें बहुत कम वोट मिले।

जनता ने नहीं जताया भरोसा

गोपालमणि महाराज भले ही गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने के मुद्दे को लेकर देवभूमि के टिहरी लोकसभा से चुनावी रण में उतरे हो, लेकिन नतीजे ये बताते हैं कि एक क्षेत्र में लोकप्रियता और प्रभाव जरूरी नहीं कि दूसरे क्षेत्र में भी सफलता मिल ही जाएगी।

जनता नेता को चुनते समय केवल उसका व्यक्ति विशेष काम नहीं देखती है, बल्कि उसके अलग-अलग तरह की गतिविधियों, सामाजिक सरोकारों के साथ लोगों की अपेक्षाओं पर खरे उतरने की संभावना भी देखती है।

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