West Bengal Loksabha Election: पश्चिम बंगाल लोकसभा चुनाव में छाए रहेंगे भ्रष्टाचार और संदेशखालि जैसे मुद्दे

West Bengal Loksabha Election 2024: विधानसभा चुनाव में BJP को 294 सदस्यीय सदन में केवल 77 सीटों से संतोष करना पड़ा था। लेकिन इस चुनाव में उसने बनर्जी के शासन में कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे, संदेशखालि में तृणमूल कांग्रेस नेताओं के खिलाफ जमीन कब्जाने और महिलाओं के उत्पीड़न के आरोपों के सहारे पूरी ताकत झोंक दी है

अपडेटेड Apr 18, 2024 पर 9:04 PM
West Bengal Loksabh Election: पश्चिम बंगाल लोकसभा चुनाव में छाए रहेंगे भ्रष्टाचार और संदेशखालि जैसे मुद्दे

West Bengal Loksabha Election 2024: पश्चिम बंगाल (West Bengal) में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) नीत तृणमूल कांग्रेस (TMC) और उसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच टकराव की बिसात बिछ चुकी है, जहां 42 लोकसभा सीटों के लिए चुनाव होगा। पश्चिम बंगाल में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद देश में तीसरी सबसे ज्यादा सीट हैं, जिनके लिए मतदान 19 अप्रैल से एक जून के बीच सात चरणों में होगा।

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के 'एकला चलो रे' के रुख को अपनाने के साथ उनके विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की संभावना समाप्त हो गई है। हालांकि, प्रदेश कांग्रेस अब भी वाम दलों के साथ गठजोड़ पर विचार कर रही है।

दोनों दलों ने 2021 के राज्य विधानसभा चुनाव मिलकर लड़े थे। हालांकि, आगामी लोकसभा चुनाव के लिए उनके बीच आधिकारिक रूप से गठबंधन की घोषणा अभी नहीं की गई है।


BJP राज्य के मतदाताओं को लुभाने के लिए पहले की तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व और उनकी लोकप्रियता का सहारा लेगी।

BJP भुनाने में लगी है संदेशखाली का मुद्दा

विधानसभा चुनाव में BJP को 294 सदस्यीय सदन में केवल 77 सीटों से संतोष करना पड़ा था। लेकिन इस चुनाव में उसने बनर्जी के शासन में कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे, संदेशखालि में तृणमूल कांग्रेस नेताओं के खिलाफ जमीन कब्जाने और महिलाओं के उत्पीड़न के आरोपों के सहारे पूरी ताकत झोंक दी है।

इस तरह BJP 18 लोकसभा सीटों पर जीत के अपने पिछले आम चुनाव के आंकड़े से आगे निकलना चाहती है।

राज्य में BJP के पास शायद सबसे बड़ा हथियार तृणमूल कांग्रेस में कथित भ्रष्टाचार का है, जिससे राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी को बड़ा झटका लगा है। अलग-अलग मामलों में तृणमूल के कई नेता जेल में हैं।

इसके अलावा संदेशखालि में तृणमूल के वरिष्ठ नेता शाहजहां शेख के आवास पर छापे के दौरान ED के दल पर हमले के बाद इलाके में ग्रामीणों ने शेख और उनके साथियों पर जबरन तरीके से जमीन हड़पने और महिलाओं ने यौन उत्पीड़न के आरोपों के साथ प्रदर्शन शुरू कर दिया। चुनाव में यह बड़ा मुद्दा रहने वाला है। प्रधानमंत्री मोदी भी प्रदेश के हालिया दौरों में अपनी सभाओं में यह संकेत दे चुके हैं कि संदेशखालि का मुद्दा भाजपा के BJP अभियान के केंद्र में होगा।

TMC उठा रही बाहरी लोगों का मुद्दा

तृणमूल कांग्रेस राज्य में बीजेपी के खिलाफ बाहरी लोगों का मुद्दा उठाती रही है। तृणमूल कांग्रेस ने गत 10 मार्च को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में विशाल रैली में नारा भी दिया कि ‘‘जनता का गर्जन, बांग्ला विरोधियों का विसर्जन।"

मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी परियोजनाओं में केंद्रीय धन रोकने के पश्चिम बंगाल सरकार के आरोप भी चुनाव प्रचार का हिस्सा रहने वाले हैं।

इनके अलावा नागरिकता संशोधन कानून (CAA) एक बड़ा मुद्दा रहने वाला है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस हफ्ते की शुरुआत में केंद्र की तरफ से CAA के नियमों को नोटिफिकेशन किए जाने के तत्काल बाद इसका विरोध शुरू कर दिया।

बनर्जी इसे ‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ (NRC) से जुड़ी कवायद बता रही हैं।

BJP को चुनाव से पहले CAA को लागू करने से राजनीतिक लाभ की और खासतौर पर बंगाल के मतुआ बहुल क्षेत्रों में समर्थन मिलने की उम्मीद है।

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