झारखंड में सरकार भले ही इन्वेस्टर समिट बुला रही है लेकिन निवेश का माहौल बन नहीं रहा है। इस वजह से निवेशक या तो आते नहीं और अगर कुछ आते भी हैं तो वो लौट कर चले जाते हैं। ये सब हो रहा है सरकारी नीतियों में कन्फ्यूजन से। खुद झारखंड लघु उद्योग संघ का मानना है कि इंडस्ट्री की राह आसान करने के लिए राज्य सरकार को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर ठोस कदम उठाने होंगे। उनका कहना है कि जब तक सिंगल विंडो सिस्टम मजबूत नहीं होगा तब तक ये परेशानी दूर नहीं होगी। इसके साथ ही सरकार को छोटे उद्योगपति को बुलाने पर फोकस करना पड़ेगा।
हेमंत सोरेन सरकार का यह तीसरा इन्वेस्टर बैठक बुलाई है इस मामले परनझारखंड में नई इंडस्ट्री की राह में लघु उद्योग संघ के अध्यक्ष फिलिप मैथ्यू ने बताया कि सबसे पहले तो सरकार को सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत करना पड़ेगा। छोटे छोटे पहलुओं पर फोकस करना होगा ताकि नए नए उद्योग लगाया जा सकता है लेकिन सरकार की मंशा साफ करनी होगी तभी कोई उद्योगपति रुचि दिखा सकता है यह ठीक है की बड़े बड़े यूडी उद्योगपति को आमंत्रण कर रहे हैं लेकिन छोटे छोटे उद्योगपति पर भी ध्यान देना होगा तभी ज्यादा से संपर्क लोगो को रोजगार मिलेगा।
रणधीर शर्मा ने बताया सरकार द्वारा लाई गई नई औद्योगिक नीति में ही खामियां हैं सबसे पहले तो सरकार में कोई भी अधिकारी सुनता नही है सबसे पहले तो सरकार को एक अलग मंत्रालय बनानी चाहिए ताकि किसी भी उद्योगपति को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
सबसे बड़ी बात यह है कि कोई भी आईएएस अधिकारी के उद्योग को बढ़ावा देने को लेकर कोई जानकारी नहीं है। अब मान लिया जाए की कोई बीमारी का इलाज़ कराने के लिए विशेषज्ञ के पास जाते हैं तभी सही तरीके से इलाज होता है ठीक उसी प्रकार इंडस्ट्री को लेकर सरकार को एक विशेषज्ञ की टीम गठन करनी चाहिए।