अमेरिका में सोमवार को जैसे ही बाजार खुला जबरदस्त गिरावट रही। इससे अमेरिकी शेयर मार्केट में मंदी की आशंका बढ़ गई है। डाउ जोंस 954 अंक यानि करीब 2.4 फीसदी तक गिर गया। वहीं नैस्डेक कंपोजिट 3.2 फीसदी टूट गया। जबकि S&P में 2.7 फीसदी की गिरावट देख गई। शुक्रवार को अमेरिका में जॉब रिपोर्ट्स के डेटा आए जो अनुमान से ज्यादा खराब थे। इस रिपोर्ट से अमेरिका में मंदी आने का डर बढ़ गया है जिससे शेयर बाजार में बिकवाली हो रही है। अक्टूबर 2021 के बाद अमेरिका में बेरोजगारी की दर सबसे ज्यादा रही।
निवेशकों को इस बात की चिंता सता रही है कि फेड रिजर्व रेट कट नहीं कर रहा है जिसकी वजह से आर्थिक मंदी बढ़ रही है। अमेरिका का फेड रिजर्व भारत के RBI की तरह है। अमेरिका के सेंट्रल बैंक ने पिछले हफ्ते भी इंटरेस्ट रेट में कोई बदलाव नहीं किया था जिसकी वजह से अमेरिका में ब्याज दर 23 साल में सबसे ज्यादा है।
वहीं दूसरी तरफ जापान के निक्केई में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। अमेरिका में मंदी के डर से निक्केई 13 साल की सबसे बड़ी गिरावट से जूझ रहा है। 2011 के फुकुशिमा क्राइसिस के बाद निक्केई पहली बार एक दिन में 12 फीसदी से ज्यादा टूटा है। निक्केई 4451.28 अंक गिर चुका है।
यूरोपीय मार्केट में भी नए हफ्ते की शुरुआत बिकवाली के साथ हुई है। रीजनल Stoxx 600 इंडेक्स 2.17 फीसदी गिरकर बंद हुआ। लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में बंद हुए हैं। यूरोपीय मार्केट में डर का इंडेक्स यानि VIX सोमवार को 100 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 64.06 पर पहुंच गया था। लेकिन बाद में यह गिरकर 35 पर आया। वैसे अभी भी यह 2020 के बाद हाइएस्ट लेवल पर है।
एशिया पैसेफिक मार्केट में सोमवार को जबरदस्त बिकवाली हुई है। और जापान बेयर मार्केट में दाखिल हो चुकी है। 1987 के बाद जापान के निक्केई में सबसे बड़ी गिरावट दिखी है। जापान की करेंसी Yen डॉलर के मुकाबले मजबूत हो गया है। और अब यह जनवरी के बाद अपने सबसे हाइएस्ट लेवल पर है।
जापान में कैरी ट्रेड करने वाले कारोबारियों ने माहौल और खराब कर दिया है। क्योंकि येन में कैरी ट्रेड करने वाले ट्रेडर्स ने अब अमेरिका में बिकवाली करना शुरू कर दिया है। कैरी ट्रेड में बड़े-बड़े इनवेस्टर्स सस्ते रेट पर लोन लेकर मार्केट में इनवेस्ट करते हैं और पैसा कमाते है।
दरअसल जापान के सेंट्रल बैंक ने इंटरेस्ट बढ़ाकर 0.25 फीसदी कर दिया है। इस वजह से ट्रेडर्स अपना सौदा काटकर कर्ज चुका रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ डॉलर के मुकाबले येन मजबूत हो रहा है जिसकी वजह से भी ट्रेडर्स अमेरिकी बाजार में अपना सौदा काट रहे हैं।