रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 4 जनवरी को बताया है कि उसको अन्नपूर्णा फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड से यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस के लिए आवेदन प्राप्त हुआ है। बता दें कि भुवनेश्वर स्थित यह माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशन 31 दिसंबर 2022 में समाप्त तिमाही में यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाली अकेली कंपनी है।
आइये जानते हैं अन्नपूर्णा फाइनेंस के बारे में
अन्नपूर्णा फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड का (AFPL) का पुराना नाम Annapurna Microfinance Pvt Ltd था। AFPL एक गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) है। यह MSME,स्मॉल इंडस्ट्री और महिला स्वयं-सहायता समूहों को माइक्रो फाइनेंसिंग की सुविधा देती है। इसके अलावा कंपनी हाउसिंग और इंडीविजुअल लोन भी देती है। कंपनी ने 2013 में रिजर्व बैंक में NBFC-MFI के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन कराया था। कंपनी मुख्यत: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के ग्राहकों को अपनी सेवाएं देती है। इसके प्रोडक्ट और सर्विसेज की सूची में स्वयं सहायता समूहों (SHG)और संयुक्त दायित्व समूहों (JLG) के लिए 100000 रुपये तक के इनकम जेनरेशन ग्रुप लोन शामिल हैं। इसके अलावा ये NBFC-MFI 2500000 रुपये तक का MSME और हाउसिंग लोन भी प्रदान करती है। कंपनी आर्थिक रूप से कमजोर ग्राहकों को सेक्टर और उनकी जरूरत के मुताबिक, कर्ज सुविधा भी उपलब्ध कराती है।
कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन
मार्च 2022 में खत्म हुए वर्ष के कंपनी के एनुअल रिपोर्ट के मुताबिक, इस NBFC-MFI का कारोबार देश के 20 राज्यों में है। यह 984 ब्रांचों की सहायता से अपना कोराबार करती है। कंपनी का कस्टमर बेस 23 लाख ग्राहकों का है। इसका लोन पोर्टफोलियो 6553.4 करोड़ रुपये का है। वित्त वर्ष 2022 में कंपनी की आय 1147 करोड़ रुपये रही थी। जबकि इसका मुनाफा 17.13 करोड़ रुपये रहा था। कंपनी का नेट NPA और ग्रास एनपीए 2.63 फीसदी और 9.80 फीसदी रहा था।
यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस के लिए आरबीआई के नियम
प्राइवेट सेक्टर में यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस के लिए "on tap" यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस के लिए निर्धारित आरबीआई की गाइडलाइन के तहत इस तरह के बैंकिंग परमिट के लिए बड़े इंडस्ट्रियल हाउसेज आवेदन नहीं कर सकते हैं। इसके अलावा आवेदन करने वाली कंपनी के प्रमोटर का पिछला रिकॉर्ड और वित्तीय प्रदर्शन मजबूत होना चाहिए। इसके साथ ही कंपनी को कम से कम 10 साल का सफल कारोबारी अनुभव होना चाहिए। इसके अलावा आवेदन करने वाली कंपनी के प्रारंभिक निम्नतम पेडअप वोटिंग इक्टिवटी कैपिटल कम से कम 500 करोड़ रुपये होनी चाहिए। साथ ही आवेदन करने वाली कंपनी की मिनिमम नेटवर्थ हर समय कम से कम 500 करोड़ रुपये होनी चाहिए।
इसके साथ ही आवेदक कंपनी के प्रमोटर या होल्डिंग कंपनी की आवेदन करने वाली कंपनी में कम से कम 40 फीसदी पेडअप इक्विटी हिस्सेदारी होनी चाहिए। जिसकी लॉकिंग पीरियड 5 साल होनी चाहिए। बता दें कि इसके पहले RBI ने 2015 में IDFC फर्स्ट बैंक और बंधन बैंक को यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस दिया था।