सेंट्रम वेल्थ (Centrum Wealth) के देवांग मेहता (Devang Mehta) ने मनीकंट्रोल के साथ बाजार और इकोनॉमी की आगे की दशा-दिशा पर एक लंबी बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने कहा कि अब सभी की नजरें तीसरी तिमाही के नतीजों पर लगी हुई हैं। त्योहारी सीजन के बाद डिमांड की स्थिति और ग्लोबल मंदी के भारत पर असर का अंदाजा तीसरी के नतीजों से लगाया जा सकता है। उन्होंने इस बातचीत में आगे कहा कि अब जानकारों की नजर कंपनियों के आगे के गाइडेंस, उनके बॉडी लैंग्वेज और कमेंट्री पर रहेगी।
वित्त की दुनिया को प्रभावित करने वाले तमाम मैक्रो फंडामेंटल्स पर बात करते हुए सेंट्रम वेल्थ के देवांग मेहता ने आगे कहा कि अब उनकी नजर आने वाले बजट पर है। यह 2024 में होने वाले आम चुनाव के पहले का आखिरी पूरे साल का बजट होगा। वित्त मंत्री इस बजट में वित्तीय सुधारों, आर्थिक सुधारों और चुनावी नजरिए से लोकप्रिय ऐलानों के बीच संतुलन बैठाती नजर आएंगी।
बजट में सरकार टैक्स दरों और टैक्स कटौतियों में कर सकती है कुछ बदलाव
देवांग मेहता का ये भी मानना है कि टैक्स सिस्टम में सरलता और कार्यकुशलता बढ़ाने के नजरिए से इस बजट में सरकार टैक्स दरों और टैक्स कटौतियों में कुछ बदलाव कर सकती है। देवांग मेहता का कहना है कि इस बजट से इंडस्ट्री को इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास, पावर सेक्टर के रिफॉर्म, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर फोकस, FPI को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करने के उपाय और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए इन्सेंटिव के ऐलान की उम्मीद है।
इक्विटी बाजारों के लिए 2023 थोड़ा बेहतर रहेगा
क्या 2023 में भारत का प्रदर्शन दूसरे देशों की तुलना में बेहत रहेगा? इस सवाल का जवाब देते हुए मेहता ने कहा कि अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि साल 2023 में यूएस फेड ब्याज दरों में बढ़ोतरी के दौर पर लगाम लगा सकता है। दरों में बढ़ोतरी के कारण अमेरिका में मंदी फेड के लिए चिंता का विषय हो सकती है। जिसकी वजह से अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी थम सकती है। इसके साथ ही अमेरिका में महंगाई भी कम होती दिख रही है। पूरी दुनिया में मंदी की आहट दुनिया के तमाम केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने से रोक सकती है। ऐसे में उम्मीद है कि इक्विटी बाजारों के लिए 2023 थोड़ा बेहतर रहेगा।
भारत की इस स्थिति तुलनात्मक रूप से काफी बेहतर
देवांग मेहता की राय है कि भारत की इस स्थिति तुलनात्मक रूप से काफी बेहतर दिख रही है। भारत मजबूत रिकवरी के रास्ते पर दिख रहा है। देश में खपत, निवेश और क्रेडिट ग्रोथ की दर बढ़ती दिख रही है। जिससे कंपनियों के मुनाफे में भी बढ़त हो रही है। घरेलू मांग पर आधारित भारत को आगे कमोडिटी की कीमतों में गिरावट का फायदा भी मिलेगा।
उन्होंने आगे कहा कि तेजी से ग्रोथ करती इकोनॉमी और डेमोग्राफिक एडवांटेज के कारण भारत में हमें विदेशी पैसे का जोरदार प्रवाह आता नजर आएगा। भारत में खुदरा निवेशकों और HNI की तरफ से पहले से ही मजबूत निवेश होता दिख रहा है। 2023 में भारत अगर सभी नहीं तो अपने कुछ ग्लोबल समकक्षों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करता नजर आएगा।
ऑटो कंपनियां अगले 1-2 साल के नजरिए से अच्छी
ऑटो सेक्टर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई और चिप शॉर्टेज के नियर टर्म चैलेंज के बावजूद ऑटो कंपनियां अगले 1-2 साल के नजरिए से अच्छी नजर आ रही हैं। इसके अलावा बैंकिंग सेक्टर भी अच्छा नजर आ रहा है। बैंकिंग सेक्टर के एसेट क्वालिटी में अच्छा सुधार हुआ है। इसके साथ ही क्रेडिट ग्रोथ में भी मजबूती देखने को मिल रही है। इस समय बैंकिंग शेयरों के वैल्यूएशन भी अच्छे नजर आ रहे हैं।
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