FMCG कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट, एक दिन में 9% से ज्यादा टूटा, ब्रोकरेज ने फिर भी लगाया दांव!

AWL Agri Business के शेयर बुधवार को 9.5% तक गिरकर 159.75 रुपये के नए 52 हफ्ते के निचले स्तर पर आ गए। सितंबर तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 2.3% घटकर 239 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू 26% बढ़ा, लेकिन EBITDA 10% घट गया। हालांकि, इसके बाद भी ICICI Securities ने स्टॉक पर Buy की रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस 250 रुपये दिया है

अपडेटेड Oct 28, 2026 पर 1:14 PM
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AWL Agri Business के शेयर बुधवार को 9.5% तक गिरकर 159.75 रुपये के नए 52 हफ्ते के निचले स्तर पर आ गए।

AWL Agri Business के शेयरों में बुधवार, 28 अक्टूबर को भारी बिकवाली देखने को मिली। पहले अदाणी विल्मर के नाम से जानी जाने वाली इस कंपनी का शेयर 9.5% तक टूटकर 159.75 रुपये पर आ गया, जो इसका नया 52 हफ्ते का निचला स्तर है। यह गिरावट सितंबर तिमाही के नतीजों के एक दिन बाद आई है। तिमाही में कंपनी की बिक्री तो अच्छी बढ़ी, लेकिन बढ़ते खर्च और एक बार के टैक्स खर्च ने मुनाफे को नीचे खींच लिया। हालांकि, इसके बाद भी शेयर पर ब्रोकरेज फर्म ICICI Securities ने 250 रुपये के टारगेट के साथ खरीदारी की सलाह दी है.

52-वीक के लो पर शेयर

बाजार खुलने के साथ ही शेयर पर जो दबाव बना, वह कुछ घंटे तक बना रहा। यहां तक कि शेयर अपने पिछले बंद भाव से 9% से ज्यादा गिर गया और 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान यह NIFTY500 इंडेक्स से कहीं ज्यादा कमजोर रहा, जो उस वक्त सिर्फ 0.35% नीचे था।


यानी पूरे बाजार में हल्की सुस्ती थी, लेकिन AWL Agri पर मार कहीं ज्यादा पड़ी। हालांकि, बाद में शेयर में थोड़ी रिकवरी आई। दोपहर 12:25 बजे तक शेयर 5.90% की गिरावट के साथ 165.80 रुपये पर कारोबार कर रहा था। यानी दिन के निचले स्तर 159.75 रुपये से देखें तो शेयर 6.05 रुपये ऊपर आ चुका था.

मुनाफा 2.3% घटा

कंपनी ने मंगलवार को बाजार बंद होने के बाद जुलाई-सितंबर तिमाही के नतीजे जारी किए थे। इस तिमाही में AWL Agri Business का नेट प्रॉफिट 239 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी ने 245 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। यानी मुनाफे में 2.3% की गिरावट आई।

मुनाफा घटने के पीछे दो वजहें रहीं। पहली, तिमाही के दौरान खर्चों का बढ़ना। दूसरी, एक बार का टैक्स खर्च। कंपनी ने इस टैक्स की पूरी कहानी भी बताई। कंपनी के मुताबिक, PAT में आई मामूली गिरावट की मुख्य वजह बांग्लादेश की सब्सिडियरी का टैक्स है। वहां के स्थानीय नियमों के तहत इस सब्सिडियरी के रेवेन्यू पर मिनिमम कॉरपोरेट टैक्स कैलकुलेट किया गया, जिसका असर तिमाही के कंसॉलिडेटेड टैक्स खर्च पर पड़ा।

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कमाई बढ़ी, लेकिन खर्च भी बढ़ा

नतीजों की असली उलझन कमाई और खर्च की इस दौड़ में छिपी है। कंपनी का रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस पिछले साल के 17,605 करोड़ रुपये से 26% बढ़कर 22,202 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह एक मजबूत बढ़त है।

लेकिन इसी दौरान कंपनी का कुल खर्च 27.5% उछलकर 21,939 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले 17,213 करोड़ रुपये था। यानी कमाई जितनी तेजी से बढ़ी, खर्च उससे भी तेज रफ्तार से बढ़े। जब खर्च कमाई से आगे निकल जाए, तो बढ़ी हुई बिक्री का फायदा मुनाफे तक पूरा नहीं पहुंच पाता और यही इस तिमाही में हुआ।

EBITDA 10% गिरा, मार्जिन 2.8% पर सिमटा

ऑपरेशन के मोर्चे पर भी तस्वीर कमजोर रही। कंपनी का EBITDA यानी ऑपरेटिंग प्रॉफिट 10% घटकर 623 करोड़ रुपये पर आ गया। EBITDA मार्जिन 110 बेसिस पॉइंट घटकर 2.8% रह गया।

आसान शब्दों में समझें तो कंपनी अपने कारोबार से हर 100 रुपये की कमाई पर अब सिर्फ 2.8 रुपये का ऑपरेटिंग मुनाफा बना पा रही है। बिक्री का आकार बढ़ने के बावजूद ऑपरेटिंग मुनाफा घटना ही बाजार को सबसे ज्यादा खटका।

फूड एंड FMCG बना ग्रोथ का इंजन

कमजोर नतीजों के बीच कंपनी के फूड एंड FMCG कारोबार ने अच्छी खबर दी। अहमदाबाद की इस कंपनी के इस कारोबार का रेवेन्यू सालाना आधार पर 32% बढ़कर 2,216 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसका EBITDA मार्जिन 3.2% रहा, जो FY27 के गाइडेंस के मुताबिक है।

कंपनी के हेल्थ एंड कन्वीनियंस पोर्टफोलियो ने भी एक बड़ा पड़ाव पार किया है। पिछले 12 महीनों यानी LTM के आधार पर इस पोर्टफोलियो का रेवेन्यू 1,400 करोड़ रुपये के पार निकल गया है। AWL Agri के मुताबिक, यह कंपनी के अलग तरह के फूड और खाने के तेल वाले प्रोडक्ट्स के बढ़ते दायरे को दिखाता है।

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इंडस्ट्री एसेंशियल्स और खाने के तेल का हाल

कंपनी के इंडस्ट्री एसेंशियल्स कारोबार ने 26% की वॉल्यूम ग्रोथ दी। इस बढ़त को ओलियोकेमिकल्स और स्पेशियलिटी केमिकल्स के बढ़े योगदान ने सहारा दिया।

वहीं खाने के तेल यानी एडिबल ऑयल सेगमेंट में सालाना आधार पर 5% की वॉल्यूम ग्रोथ दर्ज की गई। इस सेगमेंट का EBITDA करीब 4,100 रुपये प्रति मीट्रिक टन रहा। मैनेजमेंट ने इसके लिए 4,000 से 4,500 रुपये प्रति मीट्रिक टन का गाइडेंस दिया था। यानी यह सेगमेंट मैनेजमेंट की उम्मीद के दायरे के अंदर ही रहा।

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