Bajaj Housing Finance Shares: बजाज ग्रुप की हाउसिंग फाइनेंस कंपनी बजाज हाउसिंग फाइनेंस ने लिस्टिंग के दिन ही ऐसा तगड़ा धमाल मचाया कि वैल्यू के हिसाब से यह देश की सबसे बड़ी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी बन गई। लिस्टिंग के दिन यानी 16 सितंबर को यह 114 प्रीमियम पर लिस्ट होकर 10 फीसदी के अपर सर्किट पर चला गया और इसी पर बंद भी हुआ। अब आज की बात करें तो यह फिर 10 फीसदी के अपर सर्किट पर पहुंच गया। इस प्रकार 70 रुपये का शेयर दो दिन में ही 181.48 रुपये के लेवल तक पहुंच गया यानी आईपीओ निवेशकों का पैसा दोगुने से अधिक हो गया। दिन के आखिरी में यह इसी लेवल पर बंद भी हुआ। इसका मार्केट कैप 1.51 लाख करोड़ रुपये है।
किस भाव तक जाएगा Bajaj Housing Finance?
बजाज हाउसिंग फाइनेंस की लिस्टिंग के बाद इसे पहली बाय रेटिंग फिलिपकैपिटल ने दी है। ब्रोकरेज का मानना है कि इसके शेयर 210 रुपये के भाव तक पहुंच सकते हैं यानी कि आईपीओ निवेशकों का पैसा तीन गुना हो सकता है। फिलिपकैपिटल के मुताबिक होम लोन सेगमेंट में 50 लाख रुपये के टिकट साइज पर इसके फोकस के चलते बजाज हाउसिंग फाइनेंस की ग्रोथ मजबूत दिख रही है। इस सेगमेंट में होम लोन मार्केट में इसकी 65 फीसदी हिस्सेदारी है। इसका फोकस होम लोन सेक्टर पर है लेकिन इसके लोनबुक में 8-10 फीसदी हिस्सेदारी कंस्ट्रक्शन फाइनेंस की बने रहने की उम्मीद है। फिलिपकैपिटल का अनुमान है कि तीन साल के भीतर इसका बैलेंस शीट 2 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच सकता है।
आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स के इक्विटी रिसर्च (फंडामेंटल) हेड नरेंद्र सोलंकी का कहना है कि बजाज हाउसिंग फाइनेंस में अभी जो निवेशक पैसे डाल रहे हैं, उन्हें शॉर्ट टर्म की बजाय लॉन्ग टर्म का नजरिया अपनाना चाहिए।
RBI के इस नियम के चलते लिस्ट हुआ शेयर
बजाज हाउसिंग फाइनेंस के 6560 करोड़ रुपये के आईपीओ के तहत 3560 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा 3 हजार करोड़ रुपये के शेयरों की पैरेंट कंपनी बजाज फाइनेंस ने ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री की है। कंपनी ने यह आईपीओ आरबीआई के एक नियम के चलते लाया। आरबीआई के नियम के मुताबिक अपर लेयर एनबीएफसी को तीन साल के भीतर लिस्ट होना अनिवार्य है और बजाज हाउसिंग फाइनेंस के लिए यह डेडलाइन सितंबर 2025 थी।
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