किसी फंड मैनेजर या इनवेस्टर के लिए Zomato या Swiggy जैसी कंपनियों का फंडामेंटल एनालिसिस मुश्किल हो सकता है। इसकी वजह फ्यूचर के फाइनेंशियल डेटो को तो छोड़ दीजिए इनके फ्यूचर बिजनेस मॉडल तक का अंदाजा लगाना मुश्किल है। Zomato के फाउंडर दीपेंदर गोयल ने कहा कि शुरुआत के 16 साल बाद जोमैटो काफी बदल चुकी है। हाल में एक बातचीत में गोयल ने कहा था कि हमारे लिए यह मायने रखता है कि बिजनेस में हम क्या नई चीज लाते हैं। कंपनी ऐसे कॉनसेप्ट में निवेश कर रही है, जिसमें मौजूदा कामकाज में बड़ा बदलाव लाने की क्षमता है।
निवेशकों के रास्ता आसान नहीं
गोयल ने ब्लिंकिट के एक साल के अंदर जोमैटो से बड़ी हो जाने का अनुमान जताया है। ऐसे में उन्होंने लंबी अवधि में जोमैटो के वजूद को लेकर अनिश्चितता जताई है। यह सोच स्टार्टअप कॉन्फ्रेंस में तारीफ बटोर कर सकती है, लेकिन फंड मैनेजर्स के लिए यह डराने वाली तस्वीर पेश करती है। जब फाउंडर को खुद अपने बिजनेस मॉडल पर भरोसा नहीं है तो दूसरों की बात करने का क्या फायदा।
ब्लिंकिट की प्रति ऑर्डर वैल्यू बढ़ाने पर फोकस
Blinkit एक जुआ था, जो गोयल के लिए फायदेमंद साबित हुआ। अब यह कंपनी का कोर बिजनेस मॉडल बन गया है। वैल्यू चेन में यह लगातार ऊपर जा रही है और यह ई-कॉमर्स की बड़ी कंपनियों के लिए चैलेंज पेश कर सकती है। ब्लिंकिट के क्विक डिलीवरी के ज्यादा ऑर्डर्स फूड से जुड़े हैं। कंपनी ऑर्डर वैल्यू बढ़ाने के लिए अपने ऑफरिंग में डायवर्सिफिकेशन कर रही है। हालांकि एक साल पहले के मुकाबले प्रति ऑर्डर वैल्यू 553 रुपये से बढ़कर 635 रुपये हो गई है।
कुल मार्केट 2.5 करोड़ परिवारों का
बैंक ऑफ अमेरिकी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, क्यू-कॉमर्स के मार्केट करीब 2.5 करोड़ परिवार हैं। इनमें से हर परिवार का मासिक खर्च करीब 4,000-5,000 रुपये के बीच है। अगले तीन से पांच साल में क्यू-कॉमर्स की सेवाएं और 45-55 शहरों में शुरू हो सकती हैं। अभी यह 25 शहरों में उपलब्ध है।
गोयल ने कहा है कि अभी के बिजनेस मॉडल के एक दशक बाद तक टिके रहने की उम्मीद नहीं है। इसकी वजह टेक्नोलॉजी और डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम में तेजी से होने वाला बदलाव है। ऐसे निवेशक जो रिस्क ले सकते हैं और ऐसी कंपनियों में निवेश करना चाहते हैं जिनका फोकस रेवेन्यू ग्रोथ और मार्केट शेयर बढ़ाने पर है, वे जोमैटो के स्टॉक में निवेश कर सकते हैं।
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