विदेशी ब्रेकरेज हाउस UBS का कहना है कि अगले साल निफ्टी में वर्तमान स्तरों से 4 फीसदी की गिरावट देखने को मिल सकती है और ये दिसंबर 2023 तक 18000 के आसपास दिख सकता है। UBS की राय है कि देश में रिटेल निवेशकों के तरफ से आने वाले निवेश में कमी, विदेशी निवेश में गिरावट और बैंक डिपॉजिट रेट में बढ़त के साथ ही अगले साल हमें बाजार पर दबाव देखने को मिल सकता है। बता दें कि पिछले हफ्ते बाजार में भारी गिरावट के बाद कल के कारोबार में निफ्टी करीब 151 अंक की बढ़त के साथ 18452 के स्तर पर बंद हुआ था। लेकिन आज बैंक ऑफ जापान के अपने बैंक दरों में बढ़ोतरी के बाद भारतीय बाजार दूसरे ग्लोबल बाजारों की तरह दबाव में नजर आ रहे हैं।
2023 के नजरिए से भारत उभरते बाजारों में टॉप अंडरवेट मार्केट
UBS सिक्योरिटीज के सुनील तिरुमलाई (Sunil Tirumalai)ने सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि निफ्टी में वर्तमान लेवल से हमें 4 फीसदी की गिरावट देखने को मिल सकती है। निफ्टी 2023 के दिसंबर तक हमें 18000 के लेवल पर नजर आ सकता है। उन्होंने ये भी कहा कि 2023 के नजरिए से भारत उभरते बाजारों में उनकी लिस्ट में टॉप अंडरवेट मार्केट है। स्विस ब्रोकरेज UBS Securities का ये भी मानना है कि बेहतर परिस्थितियों में 2023 में निफ्टी हमें 19700 का स्तर भी दिखा सकता है। वहीं सबसे खराब परिस्थिति में 15,800 तक भी जा सकता है।
UBS Securities ने अपने इस नोट में सेंसेक्स का कोई लक्ष्य नहीं दिया है। UBS का ये भी मानना है कि निफ्टी के EPS में अगले 3 साल में सालाना आधार पर 10.5 फीसदी की बढ़त देखने को मिल सकती है। इसके साथ ही अगले 12 महीने में बाजार की दिशा तय करने में सबसे बड़ा योगदान वैल्यूएशन का होगा। UBS का मानना है कि आगे हमें भारतीय इक्विटी बाजार में रिटेल निवेशकों का पैसा कम होता नजर आएगा। जिसके चलते धीरे-धीरे वैल्यूएशन सामान्य स्तरों पर आता दिखेगा।
घरेलू रिटेल निवेशकों के निवेश में कमी आने की संभावना
UBS का कहना है कि जून 2020 से भारतीय इक्विटी बाजार में लाखों नए और पहली बार के निवेशकों की तरफ से भारी मात्रा मे पैसा आता दिखा था। यह मार्च 2022 में 140000 करोड़ रुपए के अपने पीक पर पहुंच गया। उसके बाद से इसमें गिरावट आनी शुरू हो गई। सितंबर 2022 के आसपास यह 32000 करोड़ रुपये के आसपास आ गया। इसी अवधि में फॉरेन पोर्टफोलियो निवेशकों की तरफ से आने वाले पैसे में भी गिरावट देखने को मिली। आगे भी हमें घरेलू रिटेल निवेशकों से इक्विटी बाजार में आने वाले पैसे में कमी आने की संभावना नजर आ रही है। इस बात को ध्यान में रखते हुए UBS ने 2023 के लिए निफ्टी के लक्ष्य में कटौती कर दी है।
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