जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Zee Entertainment Enterprises Ltd (ZEEL) के शेयर 25 मई को लगभग 1.65 प्रतिशत नीचे खुले। लेकिन जल्द ही थोड़ा चढ़कर ट्रेड करने लगे। फर्म द्वारा मार्च तिमाही में घाटा दर्ज करने के बाद कई ब्रोकरेज फर्मों ने अर्निंग ग्रोथ टारगेट को घटा दिया है। आज सुबह 9.18 बजे, जी एंटरटेनमेंट का स्टॉक बीएसई पर 179 रुपये पर कारोबार कर रहा था। जो पिछले बंद से 0.18 प्रतिशत ऊपर था। जबकि भारत का बेंचमार्क सेंसेक्स 0.18 प्रतिशत बढ़कर 61,985 अंक पर पहुंच गया। इससे पहले शुरुआती कारोबार में जी का शेयर 1.65 प्रतिशत टूटकर 175.80 रुपये प्रति शेयर पर आ गया था। जबकि 10.54 मिनट पर शेयर 1.96 प्रतिशत चढ़कर 182.35 रुपये पर पहुंच गया।
ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अपने FY24-25E EPS में 9-15 प्रतिशत की कटौती की है। जबकि JM Financial ने FY24-25 E के लिए अपने EPS में 4-5% की कटौती की है। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने विज्ञापन बाजार में धीमी रिकवरी और निरंतर निवेश के कारण अपने FY24 आय अनुमान में 16% की कटौती की है। लेकिन मोटे तौर पर अपने FY25 अनुमान को बनाए रखा है। ब्रोकरेज फर्म नुवामा ने FY24-25E के लिए अपने ईपीएस में 19 प्रतिशत की कटौती की है।
फर्म ने मार्च 2023 में समाप्त तिमाही के लिए 196 करोड़ रुपये के घाटे की सूचना दी। जबकि एक साल पहले की अवधि में कंपनी को 182 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था। इसकी कुल आय पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 2,360 करोड़ रुपये से सालाना आधार पर 10 प्रतिशत घटकर 2,126 करोड़ रुपये रह गई। Q4FY23 में विज्ञापन आय 1119.7 करोड़ रुपये से 11 प्रतिशत गिरकर 1,006 करोड़ रुपये हो गई।
Kotak Institutional Equities ने जी का लक्ष्य 255 रुपये से घटाकर 225 रुपये तय किया है।
Nuvama ने Zee Entertainment का लक्ष्य पहले के 325 रुपये से घटाकर 265 रुपये तय किया है। हालांकि इन्होंने स्टॉक पर खरीदारी की रेटिंग बरकरार रखी है।
B&K Securities ने जी पर टैक्टिकल बाय की रणनीति अपनाई है। उन्होंने इसके शेयर का लक्ष्य 274 रुपये से घटाकर 236 रुपये तय किया है।
जी ने एक बयान में कहा कि उसके मार्च-तिमाही के घरेलू विज्ञापन रेवन्यू में 0.10 प्रतिशत की गिरावट आई है। जो कि "विज्ञापन खर्च में मंदी" के कारण आई है। जी एंटरटेनमेंट के मुख्य वित्तीय अधिकारी रोहित गुप्ता ने FY23 को मीडिया और मनोरंजन उद्योग के लिए एक चुनौतीपूर्ण वर्ष बताया। कमजोर विज्ञापन खर्च, न्यू टैरिफ ऑर्डर (NTO) के कार्यान्वयन में देरी ने पूरे वर्ष जी के प्रदर्शन को प्रभावित किया।
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