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Brokerage Report : पश्चिम एशिया का संघर्ष लंबा खिंचने पर 19000 तक फिसल सकता है निफ्टी, कच्चे तेल में उबाल सबसे बड़ा सरदर्द

Brokerage Report : ब्रोकरेज का कहना कि बाजार के लिए आगे का रास्ता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और उसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ी कितने समय तक बनी रहती है। बर्नस्टीन ने कहा "हम अपना न्यूट्रल रुख बनाए हुए हैं और हमारा मानना ​​है कि इस साल अलग-अलग समय पर रुपये पर दबाव बना रहेगा

Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Mar 26, 2026 पर 12:25 PM
Brokerage Report : पश्चिम एशिया का संघर्ष लंबा खिंचने पर 19000 तक फिसल सकता है निफ्टी, कच्चे तेल में उबाल सबसे बड़ा सरदर्द
Market Outlook : ब्रोकरेज का कहना है कि पश्चिम एशिया में लड़ाई के चलते तेल और गैस के इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान का मतलब है कि अब यह मुद्दा सिर्फ़ होर्मुज़ जलडमरूमध्य तक ही सीमित नहीं रह गया है। इन तेल और गैस प्लांट्स के ठीक होने और फिर से काम शुरू करने में काफी लंबा समय लग सकता है

Brokerage Report : अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने कच्चे तेल की ऊंची कीमतों,बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों में कटौती में देरी को देखते हुए,कैलेंडर वर्ष 2026 के लिए अपने निफ्टी 50 के टारगेट को घटाकर 26,000 कर दिया है। ब्रोकरेज का कहना कि उसे इस गर्मी में महंगाई के 6% का आंकड़ा पार करने,ब्याज दरों में कटौती कम से कम दो तिमाहियों के लिए टलने और GDP ग्रोथ में नरमी आने की संभावनाएं नज़र आ रही हैं।

गौरतलब है कि इस साल निफ्टी अब तक करीब 12% गिर चुका है। ब्रोकरेज का कहना कि बाजार के लिए आगे का रास्ता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और उसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ी कितने समय तक बनी रहती है। बर्नस्टीन ने कहा "हम अपना न्यूट्रल रुख बनाए हुए हैं और हमारा मानना ​​है कि इस साल अलग-अलग समय पर रुपये पर दबाव बना रहेगा। इसका मतलब है कि 2026 में कुल मिलाकर बाज़ार सपाट या थोड़ा निगेटिव रह सकते हैं।"

बाजार में गिरावट सिर्फ सेंटीमेंटल नहीं

ब्रोकरेज के मुताबिक अभी तक,रिस्क-रिवॉर्ड न्यूट्रल ज़ोन में ही दिखा रहा है। युद्ध खत्म होने पर बाज़ार में फिर से तेजी आने की संभावना है। लेकिन कोई नहीं जानता कि युद्ध कब खत्म होगा। यह एक 'बाइनरी कॉल' है। मैक्रो-इकोनॉमिक हालात तथा कंपनियों की अर्निंग पर पड़ने वाले असर को देखते हुए,बाज़ार में आई इस गिरावट को सिर्फ़ सेंटीमेंट की वजह से हुई गिरावट नहीं माना जाना चाहिए।

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