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ब्रोकर्स को बार-बार की जांच से मिलेगा छुटकारा, SEBI बना रहा यह बड़ा प्लान

ब्रोकर्स ने इंस्पेक्शन विजिट की वजह से उनके कामकाज में आने वाली दिक्कतों के बारे में सेबी को बताया था। कई बार जांच के लिए काफी बड़ी टीम ब्रोकर के ऑफिस पहुंच जाती है। ऐसे में ब्रोकर के लिए बड़ी समस्या पैदा हो जाती है। इस प्रॉब्लम को दूर करने की कोशिश हो रही है

MoneyControl Newsअपडेटेड May 06, 2025 पर 3:43 PM
ब्रोकर्स को बार-बार की जांच से मिलेगा छुटकारा, SEBI बना रहा यह बड़ा प्लान
स्टॉक एक्सचेंजों और सेबी के प्रतिनिधि इस बात की भी जांच करते रहते हैं कि ब्रोकर की तरफ से तय नियमों का प्लान किया जा रहा है या नहीं।

ब्रोकर्स के लिए अच्छी खबर है। अब इंस्पेक्शन विजिट में उन्हें ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। सेबी इस बारे में ब्रोकर एसोसिएशंस, एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉर्पोरेशंस और डिपॉजिटरीज से बातें कर रहा है। इस बातचीत से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी। ब्रोकर्स ने इंस्पेक्शन विजिट की वजह से उनके कामकाज में आने वाली दिक्कतों के बारे में सेबी को बताया था। एक सूत्र ने कहा कि इस बारे में बातचीत चल रही है कि अगर किसी वर्टिकल का एक मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (एमआईआई) रूटीन इंस्पेक्शन के लिए ब्रोकर के ऑफिस में जाता है तो उसी वजह के लिए दूसरा एमआईआई इंस्पेक्शन के लिए नहीं जाएगा। वह अपनी जांच की रिपोर्ट दूसरे एमआईआई को शेयर कर देगा।

अभी अलग-अलग संस्थाओं के प्रतिनिधि अलग-अलग जांच करते हैं

इंस्पेक्शन की यह व्यवस्था डिपॉजिटरीज (Depositaries) और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन (Clearing Corporation) में भी लागू करने के बारे में सोचा जा सकता है। ब्रोकर्स इंस्पेक्शन विजिट की संख्या में भी कमी चाहते हैं। लेकिन, SEBI और एक्सचेंजों का मानना है कि इंस्पेक्शन विजिट की लिमिट तय करना मुमकिन नहीं है। इसकी वजह यह है कि कई बार किसी खास जानकारी, न्यूज, इनपुट्स की वजह से इंस्पेक्शन करना जरूरी हो जाता है। अभी क्लियरिंग कॉर्पोरेशन, डिपॉजिटरीज सहित दूसरी संस्थाओं के प्रतिनिधि जांच के लिए अलग-अलग ब्रोकर्स के ऑफिस में जाते हैं।

जांच के लिए बड़ी टीम पहुंचने से होती है दिक्कत

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