BSE F&O (Future & Options) की बाजार हिस्सेदारी पिछले एक महीने में 6% से बढ़कर 12 प्रतिशत हो गई। एक्सचेंज की ओर से सेंसेक्स की साप्ताहिक समाप्ति (वीकली एक्सपायरी) को शुक्रवार तक बढ़ा दिए जाने के बाद ऐसा हुआ। BSE के इस कदम का उद्देश्य है कि एनएसई के निफ्टी की साप्ताहिक समाप्ति के साथ टकराव न हो। NSE Nifty F&O वीकली कॉन्ट्रैक्ट्स की वर्तमान में एक्सपायरी गुरुवार ही है। HDFC इंस्टीट्यूशनल रिसर्च की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि बीएसई, वीकली वॉल्यूम के मामले में 12 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी रखता है। वहीं प्रमुख एक्सपायरी डे वॉल्यूम्स के लिए बाजार हिस्सेदारी 16 प्रतिशत है।
NSE ने एक डेली एक्सपायरी मॉडल अपनाया है ताकि प्रमुख इंडेक्स ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट, सप्ताह के अलग-अलग दिनों पर समाप्त हों। यह रणनीतिक कदम दोनों एक्सचेंजों के बीच सीधे टकराव को रोकता है। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि BANKEX कॉन्ट्रैक्ट्स की साप्ताहिक समाप्ति को सोमवार तक बढ़ाए जाने से बाजार में और तेजी आएगी। एनालिसिस में अनुमान लगाया गया है कि बीएसई का डेरिवेटिव नोशनल या प्रीमियम एवरेज डेली ट्रेडिंग वॉल्यूम (एडीटीवी) वित्त वर्ष 2026 तक 81 लाख करोड़ रुपये या 5,500 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। वॉल्यूम के मामले में बाजार हिस्सेदारी 21.7 प्रतिशत और प्रीमियम के मामले में 8.7 प्रतिशत हो जाने का अनुमान है।
डेरिवेटिव मार्केट में बीएसई की ग्रोथ विशेष रूप से उल्लेखनीय है। आगामी BANKEX लॉन्च और सेंसेक्स वीकली कॉन्ट्रैक्ट की सफलता की वजह से 13 अक्टूबर को बीएसई की बाजार हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो गई। सोमवार को एक्सपायरी वाले BANKEX कॉन्ट्रैक्ट के जुड़ने से अन्य दिनों में भी बाजार हिस्सेदारी में विस्तार की उम्मीद है।
और बढ़ेगी बाजार हिस्सेदारी
रिपोर्ट में कहा गया है कि साप्ताहिक आधार पर बीएसई की बाजार हिस्सेदारी लगभग 12 प्रतिशत है। इसका मुख्य कारण शुक्रवार को दर्ज किया जाने वाला बल्क वॉल्यूम है। इस मामले में बाकी दिन शुक्रवार की तुलना में कमजोर रहते हैं। अगर बीएसई के सेंसेक्स की बाजार हिस्सेदारी की तुलना निफ्टी के वीकली परफॉरमेंस से करें तो सामने आता है कि बीएसई ने 30 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी हासिल की है। रिपोर्ट में बीएसई की बाजार हिस्सेदारी में और वृद्धि का अनुमान जताया गया है, जो बीएसई प्लेटफॉर्म पर डिस्काउंट ब्रोकरों के सक्रिय होने और नए प्रोडक्ट लॉन्च के कारण है। इस वृद्धि का श्रेय प्रोपराइटरी और रिटेल ट्रेडर्स को जाता है।
BSE जल्द कर सकता है ऑप्शन प्राइसिंग रीसेट
बीएसई की ऑप्शन प्राइसिंग वर्तमान में एनएसई के वन-सेंवथ पर है। एचडीएफसी को जल्द ही इस प्राइसिंग के रीसेट होने की उम्मीद है। इससे ऑप्शंस प्राइसिंग संभावित रूप से तीन गुना तक बढ़ जाएगी। इस वृद्धि के साथ भी बीएसई की प्राइसिंग, एनएसई की तुलना में 57 प्रतिशत डिस्काउंट पर होगी। वर्तमान में बीएसई ऑप्शंस प्रीमियम पर लगभग 1 बेसिस पॉइंट शुल्क लेता है, जबकि एनएसई लगभग 7 बेसिस पॉइंट का शुल्क लेता है। ऑप्शंस क्लियरिंग की लागत दोनों एक्सचेंजों के लिए समान है, जो कि लगभग 1 बेसिस पॉइंट है।
BSE स्टॉक कॉल: HDFC सिक्योरिटीज का कहना है 'खरीदें'
HDFC Securities ने बीएसई के लिए 'बाई' रेटिंग बरकरार रखी है और 1,600 रुपये का सम ऑफ द पार्ट्स (SoTP) बेस्ड टार्गेट प्राइस निर्धारित किया है। यह प्राइस 33 गुना कोर FY26E PAT, CDSL हिस्सेदारी और सेटलमेंट गारंटी फंड को छोड़कर शुद्ध नकदी के आधार पर सेट किया गया है। रिपोर्ट में रेवेन्यु के 26 प्रतिशत और कोर PAT CAGR के 53 प्रतिशत रहने की बात कही गई है।