कैपिटल मार्केट से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में आज 1 अप्रैल को जोरदार तेजी देखने को मिली। बीएसई, एंजेल वन, ग्रो की पैरेंट कंपनी बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स, CDSL और मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयर कारोबार के दौरान 4% से लेकर 7% तक उछल गए। इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का एक हालिया फैसला रहा, जिसमें कैपिटल मार्केट एक्सपोजर से जुड़े नए नियमों को लागू करने की समयसीमा बढ़ा दी गई है।
RBI ने इन नियमों को 1 अप्रैल से लागू करने के बजाय अब 1 जुलाई 2026 तक टाल दिया है। इससे ब्रोकर्स और ट्रेडर्स को अतिरिक्त समय मिल गया है, जिससे उनके ऊपर तत्काल दबाव कम हुआ है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फैसला ब्रोकिंग इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी राहत के रूप में आया है, खासकर ऐसे समय में जब बाजार पहले से ही ग्लोबल अनिश्चितताओं से जूझ रहा है।
बाजार खुलते ही शेयरों में जोरदार खरीदारी
बाजार खुलने के साथ ही इन कंपनियों के शेयरों में तेज उछाल देखने को मिला। BSE के शेयर करीब 6.5% तक उछले Angel One में भी लगभग इतनी ही तेजी देखने को मिली। Groww के शेयर करीब 4.2% तक चढ़ गए। वहीं CDSL और Motilal Oswal के शेयरों में 6 से 7% तक की उछाल देखी गई।
किन नियमों में मिली राहत?
RBI ने अपने संशोधित निर्देशों में कई अहम बदलाव किए हैं-
- मार्केट मेकर्स को सिक्योरिटीज के खिलाफ फाइनेंसिंग पर लगी पाबंदियों में राहत दी गई
- बैंक अब कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज़ के प्रोपाइटरी ट्रेडिंग को फंड कर सकते हैं, लेकिन 100% कैश या कैश-इक्विवेलेंट कोलेटरल के साथ
- नॉन-डेट म्यूचुअल फंड्स के लिए इंट्राडे फंडिंग को कैपिटल मार्केट एक्सपोजर नहीं माना जाएगा
- एक्विजिशन फाइनेंस की परिभाषा को बढ़ाकर मर्जर और अमलगमेशन को शामिल किया गया
- शेयरों के बदले लोन की सीमा ₹1 करोड़ प्रति व्यक्ति तय की गई
- IPO, FPO और ESOP फाइनेंसिंग की सीमा ₹25 लाख प्रति व्यक्ति रखी गई
ग्लोबल ब्रोकरेज जेफरीज का कहना है कि RBI का यह कदम ब्रोकर्स और प्रोप ट्रेडर्स के लिए ट्रांजिशन को आसान बनाएगा। ब्रोकरेज का कहना है कि बैंक गारंटी अब एक साल तक रिन्यू की जा सकती है, जिससे फंडिंग से जुड़ी अनिश्चितता कम होगी। जेफरीज ने यह भी संकेत दिया कि इस फैसले का सबसे ज्यादा फायदा BSE जैसे एक्सचेंज ऑपरेटर्स को मिल सकता है।
STT बढ़ोतरी के बावजूद पॉजिटिव संकेत
दिलचस्प बात यह है कि यह तेजी उस दिन आई जब बाजार में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी लागू हुई है, जो आमतौर पर ट्रेडिंग वॉल्यूम को प्रभावित कर सकती है। लेकिन इसके बावजूद निवेशकों का रुझान इन शेयरों की ओर बढ़ता नजर आया।
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