BSE मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्सों में भारी गिरावट, डॉलर में पिछले एक-साल का रिटर्न हुआ नेगेटिव

बीएसई मिडकैप (BSE MidCap) और बीएसई स्मॉलकैप (BSE SmallCap) इंडेक्स का पिछले एक साल का रिटर्न अब डॉलर के लिहाज से नेगेटिव हो गया है। दोनों इंडेक्स डॉलर के टर्म में करीब 1% तक लुढ़क गए हैं। वहीं भारतीय रुपये के टर्म में, इनका पिछले एक साल का रिटर्न अब महज 3.5 पर्सेंट रह गया है। हालांकि सेंसेक्स डॉलर के लिहाज से अभी भी 2 प्रतिशत ऊपर कारोबार कर रहे हैं

अपडेटेड Feb 12, 2025 पर 1:18 PM
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इस साल BSE MidCap और BSE SmallCap इंडेक्स में क्रमशः 11% और 13% की गिरावट आ चुकी है

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। इसके साथ ही बीएसई मिडकैप (BSE MidCap) और बीएसई स्मॉलकैप (BSE SmallCap) इंडेक्स का पिछले एक साल का रिटर्न अब डॉलर के लिहाज से नेगेटिव हो गया है। दोनों इंडेक्स डॉलर के टर्म में करीब 1% तक लुढ़क गए हैं। वहीं भारतीय रुपये के टर्म में, इनका पिछले एक साल का रिटर्न अब महज 3.5 पर्सेंट रह गया है। हालांकि सेंसेक्स और निफ्टी अब भी मजबूती दिखा रहे हैं और रुपये के लिहाज से पिछले एक साल में वे करीब 6 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। जबकि डॉलर के लिहाज से, वे करीब 2 प्रतिशत ऊपर हैं।

रुपये की कमजोरी ने बढ़ाया दबाव

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में 2025 में अब तक करीब 1.2 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। इसके साथ ही यह इस साल इंडोनेशियाई रुपिया के बाद एशिया की दूसरी सबसे कमजोर करेंसी बन गई है। 10 फरवरी को रुपया 87.95 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि साल की शुरुआत में यह 85.50 प्रति डॉलर था।

मिडकैप और स्मॉलकैप में भारी गिरावट


इस साल अब तक रुपये के टर्म में बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्सों में क्रमशः लगभग 11 प्रतिशत और 13 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है, जबकि डॉलर के लिहाज से दोनों में क्रमशः 15 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके अलावा सितंबर 2024 के हालिया शिखर से, दोनों इंडेक्स भारतीय रुपये में 19 प्रतिशत और 20 प्रतिशत से अधिक गिर चुके हैं, जबकि डॉलर के लिहाज से वे 22 प्रतिशत से अधिक गिरकर अब 'बेयर मार्केट' में प्रवेश कर चुके हैं।

Choice Broking के डेरिवेटिव एनालिस्ट, हार्दिक मतालिया ने कहा कि "यह गिरावट कंफर्म कर रही है कि बाजार अभी भी 'बेयरिश ट्रेंड' में है, क्योंकि दोनों इंडेक्स चार्ट लोअर हाई और लोअर लो बना रहे हैं, जो कमजोरी का संकेत है।"

रिकवरी के संकेत नहीं

मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि फिलहाल शेयर बाजार में रिकवरी यानी मजबूत वापसी के संकेत नहीं दिख रहे हैं। कोई भी छोटी रैली सिर्फ "Dead Cat Bounce" हो सकती है, जिसका मतलब यह होगा कि यह अस्थायी उछाल है, न कि स्थायी रिकवरी। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स अपने सभी अहम लॉन्ग, शॉर्ट और मीडियम अवधि के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) से नीचे ट्रेड कर रहे हैं, जो नेगेटिव ट्रेंड को दर्शाता है।

FIIs की बिकवाली जारी

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय इक्विटी बाजारों से लगातार बिकवाली कर रहे हैं। यह भी इन शेयरों में गिरावट का एक बड़ा कारण है। कमजोर ग्रोथ, घटते कॉर्पोरेट अर्निंग्स और टैरिफ वॉर के डर ने निवेशकों के सेंटीमेंट को बिगाड़ दिया है।

वैल्यूएशन और मार्केट आउटलुक

अगर वैल्यूएशन की बात करें, तो BSE MidCap इंडेक्स का अभी एक साल का फॉरवर्ड P/E रेशियो 26.34x है, जबकि इसका 10 साल का औसत 24.07x है। वहीं, BSE SmallCap इंडेक्स का एक साल का फॉरवर्ड P/E रेशियो 22.54x है, जबकि इसका 10 साल का औसत 19.03x है।

BSE MidCap इंडेक्स के 100 से अधिक स्टॉक्स और BSE SmallCap इंडेक्स के 760 से अधिक स्टॉक्स अपने 200-दिनों के मूविंग एवरेज से नीचे कारोबार कर रहे हैं। MidCap इंडेक्स के 63 स्टॉक्स और SmallCap इंडेक्स के 510 स्टॉक्स पिछले एक साल में निगेटिव रिटर्न दे चुके हैं।

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