Budget 2026 : कॉर्पोरेट बॉन्ड के बजट प्रस्तावों से डेट मार्केट को बड़ा सपोर्ट मिलने की उम्मीद -एक्सपर्ट्स

Budget 2026 : इकोनॉमिक सर्वे में कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट को विस्तार देने के लिए इंसेंटिव सहित कई सुधारों की बात कही गई थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कॉर्पोरेट बॉन्ड के लिए बजट प्रस्तावों से डेट मार्केट को बहुत ज़रूरी सपोर्ट मिलने की संभावना है

अपडेटेड Feb 02, 2026 पर 12:33 PM
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Union Budget 2026 : नॉर्दर्न आर्क सिक्योरिटीज के CEO,प्रियाशिस दास ने बजट को भारतीय डेट मार्केट के लिए एक बड़ा बदलाव बताया। उन्होंने कहा,"सरकार आखिरकार 'लिक्विडिटी पैराडॉक्स'की समस्या को सुलझा रही है

Budget 2026 : सरकार ने भारत के कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट को मज़बूत करने के लिए कई उपायों का प्रस्ताव रखा है। इसमें मार्केट-मेकिंग फ्रेमवर्क और नए डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट्स शामिल हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा कि सरकार कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट के लिए इंसेंटिव शुरू करने के लिए एक फ्रेमवर्क लाएगी, जिसका मकसद लिक्विडिटी और निवेशकों की भागीदारी को बेहतर बनाना है।

सीतारमण ने कॉर्पोरेट बॉन्ड इंडेक्स पर फंड और डेरिवेटिव तक आसान पहुंच के लिए एक मार्केट-मेकिंग फ्रेमवर्क शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने कॉर्पोरेट बॉन्ड पर टोटल रिटर्न स्वैप शुरू करने का भी प्रस्ताव रखा है। इससे रिस्क मैनेजमेंट और सेकेंडरी मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ने की उम्मीद है। बाजार ने इन प्रपोज़ल का स्वागत किया और इन्हें डेट मार्केट में स्ट्रक्चरल दिक्कतों को दूर करने की दिशा में उठाया सही कदम बताया जा रहा है, जिसका लंबे समय से इंतज़ार किया जा रहा था।

AMFI के चीफ एग्जीक्यूटिव वेंकट एन चलासानी ने कहा कि AMFI ने हमेशा एक मज़बूत डेट मार्केट के महत्व पर ज़ोर दिया है। मजबूत मार्केट कॉर्पोरेट्स और सरकार दोनों को ज़्यादा फंडिंग फ्लेक्सिबिलिटी देता है साथ ही भारत के बड़े सेविंग्स पूल का सही इस्तेमाल भी तय करता है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित मार्केट-मेकिंग फ्रेमवर्क और टोटल रिटर्न स्वैप्स की शुरुआत के ज़रिए कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट के विकास पर फोकस करना उत्साहजनक है। इससे बॉन्ड मार्केट में गहराई,लिक्विडिटी और रिस्क मैनेजमेंट में काफी सुधार होगा।


नॉर्दर्न आर्क सिक्योरिटीज के CEO,प्रियाशिस दास ने बजट को भारतीय डेट मार्केट के लिए एक बड़ा बदलाव बताया। उन्होंने कहा,"सरकार आखिरकार 'लिक्विडिटी पैराडॉक्स'की समस्या को सुलझा रही है। इसने लंबे समय से कॉर्पोरेट बॉन्ड को दबा रखा था। सरकार के इस कदम से बॉन्ड जारी करने वालों और निवेशकों दोनों को फायदा होगा।"

क्रेडिट-रिस्क के नज़रिए से,इन उपायों से मार्केट में स्थिरता आने की उम्मीद है। एक्यूइट रेटिंग्स एंड रिसर्च लिमिटेड के MD और CEO शंकर चक्रवर्ती ने कहा,“बॉन्ड मार्केट में ज़्यादा लिक्विडिटी से इश्यू करने वालों के लिए प्राइस डिस्कवरी,रीफाइनेंसिंग में आसानी और तनाव को झेलने की क्षमता बेहतर होती है। मार्केट-मेकिंग और टोटल रिटर्न स्वैप जैसे डेरिवेटिव ओवरले,उतार-चढ़ाव के समय फोर्स सेलिंग को कम कर सकते हैं,जिससे ज़्यादा स्थिर स्प्रेड को सपोर्ट मिलता है।”

इकोनॉमिक सर्वे में कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट को विस्तार देने के लिए इंसेंटिव सहित कई सुधारों की बात कही गई है। इकोनॉमिक सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉन्ग-टर्म स्ट्रक्चरल डेवलपमेंट में यूनिफाइड ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और बेहतर मार्केट-मेकिंग क्षमताओं के ज़रिए मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने को प्राथमिकता देनी चाहिए। साथ ही बॉन्ड के लिए आसान टैक्स स्ट्रक्चर और पेंशन फंड और इंश्योरेंस कंपनियों को मिड-रेटेड सिक्योरिटीज में निवेश करने के लिए रेगुलेटरी फ्लेक्सिबिलिटी जैसे टारगेटेड इंसेंटिव के ज़रिए इन्वेस्टर बेस का विस्तार करना चाहिए।

सर्वे में नीति आयोग का हवाला देते हुए, SEBI, RBI और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के बीच रेगुलेटरी ओवरलैप को दूर करने, लो रेटिंग वाले जारीकर्ताओं को रोकने वाली व्यापक डिस्क्लोजर ज़रूरतों,संस्थागत निवेशकों के लिए सीमित निवेश जनादेश और एक अविकसित जोखिम प्रबंधन इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण होने वाली संरचनात्मक बाधाओं को दूर करने की भी बात कही गई है।

 

 

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