Budget 2026 : बजट से पहले मार्केट स्ट्रैटेजी पर चर्चा करते हुए एल्केमी कैपिटल मैनेजमेंट (Alchemy Capital Management) के क्वांट हेड (Quant Head) और फंड मैनेजर आलोक अग्रवाल ने कहा कि घरेलू इकोनॉमी के आंकड़े से कम ग्रोथ के संकेत मिल रहे हैं। GST कलेक्शन में सिंगल डिजिट ग्रोथ देखने को मिली है। जियोपॉलिटिकल घटनाओं का बाजार पर असर दिखा है। कीमती मेटल और नॉन फेरस मेटल में स्पेस में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है। घरेलू बचत का पैसा कैपिटल मार्केट में आ रहा है।
ओवरऑल मार्केट से काफी करेक्शन मोड में रहे हैं। पिछले 16 महीनों से हम करेक्शन देख रहे हैं। जो लोकल न्यूज़ और लोकल डेटा आए वो भी बहुत सपोर्टिव नहीं थे और साथ-साथ में खराब ग्लोबल सेंटीमेंट की वजह से भी बाजार कमजोर हुआ है। जब साल की शुरुआत हुई तो शुरू में हमें जीएसटी के जो नंबर्स मिले वो भी सिंगल डिजिट ग्रोथ पर आए। ये सातवा स्ट्रेट महीना रहा जहां जीएसटी कलेक्शन ग्रोथ सिंगल डिजिट में रही। जीएसटी नंबर काफी हद तक नॉमिनल जीडीपी नंबर के आसपास होता है। इस वजह से उसका उसका ग्रोथ करना एक इंडिकेशन होता है कि नॉमिनल जीडीपी भी जोर से ग्रोथ करेगी। साथ ही साथ कैपेक्स के नंबर्स भी लो आए। ऐसे में लोकल साइड में जो इकोनमिक डेटा है वह बैलेंस शीट वाइज और डेफिसिट वाइज तो स्ट्रांग है। लेकिन ग्रोथ थोड़ी कम नजर आ रही थी। यही चीज हमें अभी तक कॉर्पोरेट अर्निंग में भी देखने को मिल रही है।
इसके साथ ही स्पेशली ग्रीनलैंड वाली और वेनेजुएला वाली जियोपॉलिटिकल न्यूज़ हमारे मार्केट का मूड खराब कर रही है।। लेकिन पिछले 16 महीने के करेक्शन के बाद और खासतौर पर पिछले साल इमर्जिंग मार्केट्स एंड वर्ल्ड मार्केट्स को काफी ज्यादा अंडर परफॉर्म करने के बाद हमारे मार्केट्स का रिस्क रिवॉर्ड काफी सुधर गया है। ऐसे में जिन सेगमेंट, सेक्टर्स और स्टॉक्स में ग्रोथ विज़िबिलिटी बढ़ रही है वहां पर खरीदने का यह बहुत अच्छा मौका है।
आलोक अग्रवाल की पसंदीदा थीम्स
आपनी टॉप थीम्स बताते हुए आलोक अग्रवाल ने कहा कि इस समय प्रेशियस मेटल्स एंड नॉन फेरस मेटल्स में निवेश के अच्छे मौके हैं। इस सेगमेंट में स्ट्रक्चरल बूम और स्ट्रक्चरल ग्रोथ है। इसके अलावा मेटल्स में डिमांड, सप्लाई से काफी ज्यादा है। इसकी वजह से इनमें ऑपरेटिंग लेवरेज एंड फाइनेंसियल लेवरेज दोनों देखने को मिल रहा है। इनसे जुड़ी कंपनीज़ के रिजल्ट्स भी बहुत अच्छे आ रहे हैं।
इसके अलावा कैपिटल मार्केट थीम भी अच्छी दिख रही है। डोमेस्टिक मार्केट्स की बात करें ते पिछले दशक में हमारे सेवर्स ज्यादातर पैसे बैंकों में डाल रहे थे। लेकिन अब हमारे देश में कैपिटल मार्केट्स में लोगों का पैसा आ रहा है। ओवरऑल कैपिटल मार्केट में रिटेल इन्वेस्टमेंट्स बढ़ रहा है। ऐसे में आगे हमें एक्सचेंज, वेल्थ मैनेजमेंट, एसेट मैनेजमेंट, और ब्रोकिंग से जुड़े शेयरों में अच्छी ग्रोथ दिख सकती है। इस करेक्शन इस शेयरों में निवेश के अच्छे मौके हैं।
आलोक अग्रवाल को लेंडिंग सेगमेंट भी पसंद है। उनका कहना है कि बड़े प्राइवेट बैंकों की तुलना में पीएसयू बैंक्स और स्माल प्राइवेट बैंक्स अच्छा प्रदर्न कर रहे हैं। इन सेगमेंट में उनका व्यू ज्यादा पॉजिटिव है।
उन्होंने आगे कहा कि IT सेक्टर में ग्रोथ नहीं दिख रही है। इनमें सालाना आधार पर कमजोरी नजर आ रही है। IT सेक्टर के सामने AI की चुनौतियां हैं। वहीं, FMCG के वैल्युएशन महंगे है। इनमें ग्रोथ भी नहीं है। टैक्स राहत और लिक्विडिटी पुश के बाद भी कंजम्प्शन में खास बढ़ोतरी नहीं देखने को मिली है। डिस्क्रिशनरी कंजम्प्शन में ज्यादा ग्रोथ की उम्मीद है। ग्लोबल स्तर पर डॉलर कमजोर हो रहा है। कमजोर डॉलर के मुकाबले भी रुपए पर दबाव है। सिल्वर और गोल्ड पर उनका पॉजिटिव नजरिया है।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।