Stock market : भारतीय इक्विटी इंडेक्स 21 जनवरी को लगातार तीसरे सेशन में गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबार बंद होने पर, सेंसेक्स 270.84 अंक या 0.33 प्रतिशत गिरकर 81,909.63 पर और निफ्टी 75 अंक या 0.30 प्रतिशत गिरकर 25,157.50 पर बंद हुआ। लगभग 1357 शेयरों में तेज़ी आई, 2509 शेयरों में गिरावट आई और 127 शेयर अपरिवर्तित रहे। मेटल और ऑयल एंड गैस को छोड़कर, बाकी सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए।
जियोपॉलिटिकल और जियोइकोनॉमिक अनिश्चितताओं, FII की लगातार बिकवाली, मिले-जुले Q3 नतीजों और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी के बीच भारतीय शेयर बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली।
BSE मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट आई। फार्मा, IT, प्राइवेट बैंक, रियल्टी और PSU बैंक में लगभग 0.5 प्रतिशत की गिरावट आई। जबकि इटरनल, मैक्स हेल्थकेयर, इंटरग्लोब एविएशन, हिंडाल्को और JSW स्टील गेनर्स में शामिल रहे।
एक ही सेशन में इन्वेस्टर्स को करीब ₹2 लाख करोड़ का नुकसान हुआ, क्योंकि BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन पिछले सेशन के ₹456 लाख करोड़ से घटकर ₹454 लाख करोड़ हो गया।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर का कहना है कि आज घरेलू बाज़ारों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। ग्लोबल रिस्क फैक्टर्स ने सेंटीमेंट को खराब कर दिया। हालांकि, क्लोजिंग के समय वैल्यू बाइंग से बाज़ार को शुरुआती नुकसान से उबरने में मदद मिली। इस मुश्किल माहौल में, बैंकिंग और IT सेक्टर के कमजोर नतीजे इक्विटी मार्केट पर दबाव बढ़ा रहे हैं।
कमज़ोर होता रुपया और ट्रेड संबंधों को लेकर बनी अनिश्चितताएं इस उतार-चढ़ाव को और बढ़ा सकती हैं। फिर भी, चालू नतीजों के मौसम में चुनिंदा खरीदारी के मौके मिल सकते हैं क्योंकि अगले सेशन में मज़बूत घरेलू मांग के कारण बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स ने कहा कि निफ्टी में गिरावट जारी रहेगी, हालांकि बीच-बीच में थोड़ी रिकवरी से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, उन्होंने कहा कि जब तक अहम रेजिस्टेंस लेवल को निर्णायक रूप से पार नहीं किया जाता, तब तक किसी भी रिकवरी की कोशिश के टिकने की संभावना नहीं है।
बोनान्ज़ा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि आगे बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की उम्मीद है। 1 फरवरी, 2026 को पेश होने वाला यूनियन बजट सेंटीमेंट को बेहतर बना सकता है, खासकर अगर इसमें रेलवे और डिफेंस जैसे क्षेत्रों में ज़्यादा खर्च पर फोकस किया जाए। जब तक ग्लोबल ट्रेड की चिंताएं कम नहीं हो जातीं, तब तक सावधानी देखने को मिलेगी, हालांकि घरेलू निवेशकों की खरीदारी से बाजार को कुछ सपोर्ट मिल सकता है।
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