Budget 2026: बजट में आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किए ये 3 ऐलान, तो झूम उठेगा शेयर बाजार

Budget 2026-27: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अब से कुछ ही देर में बजट 2026-27 पेश करने वाले है। बजट के ऐलानों पर शेयर बाजार समेत पूरे देश की निगाहें टिकी हैं। बतौर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह लगातार नौवां बजट होगा। इस बार का बजट ऐतिहासिक इसलिए भी है क्योंकि 26 साल बाद पहली बार यह रविवार को पेश हो रहा है। शेयर बाजार भी इस दिन 'स्पेशल ट्रेडिंग सेशन' के साथ इसका स्वागत करने के लिए है

अपडेटेड Feb 01, 2026 पर 8:10 AM
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Budget 2026-27: निवेशक चाहते हैं कि इक्विटी पर लगने वाले LTCG टैक्स को घटाया जाए

Budget 2026-27: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अब से कुछ ही देर में बजट 2026-27 पेश करने वाले है। बजट के ऐलानों पर शेयर बाजार समेत पूरे देश की निगाहें टिकी हैं। बतौर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह लगातार नौवां बजट होगा। इस बार का बजट ऐतिहासिक इसलिए भी है क्योंकि 26 साल बाद पहली बार यह रविवार को पेश हो रहा है। शेयर बाजार भी इस दिन 'स्पेशल ट्रेडिंग सेशन' के साथ इसका स्वागत करने के लिए है। दलाल स्ट्रीट के गलियारों में इस समय केवल एक ही सवाल तैर रहा है कि क्या इस बार का बजट शेयर बाजार में लंबी उछाल की नींव रखेगा?

मार्केट एक्सपर्ट्स और निवेशकों की नजरें मुख्य रूप से तीन बड़े बिंदुओं पर टिकी हैं। अगर आज वित्त मंत्री ने इन 3 मोर्चों पर राहत दे दी, तो निफ्टी और सेंसेक्स में भारी तेजी देखने को मिल सकती है।

1. पूंजीगत लाभ कर (Capital Gains Tax) में सुधार

शेयर बाजार के निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता हमेशा 'टैक्स' रहती है। बजट 2024 में जब सरकार ने शॉर्ट टर्म (STCG) और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स की दरों को बढ़ाया था, तब बाजार ने नकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी। इस बार, निवेशक उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार छोटे और मध्यम वर्ग के निवेशकों को राहत देगी।


फिलहाल LTCG की छूट सीमा ₹1.25 लाख है, जिसे बढ़ाकर ₹2 लाख करने की पुरजोर मांग उठ रही है। इसके पीछे तर्क यह है कि बढ़ती महंगाई और शेयर बाजार में बढ़ती खुदरा भागीदारी को देखते हुए छूट की सीमा में विस्तार जरूरी है। साथ ही, निवेशक चाहते हैं कि इक्विटी पर लगने वाले LTCG की दर को वापस 12.5% से घटाकर 10% और STCG को 20% से घटाकर 15% किया जाए। अगर टैक्स स्लैब में यह सुधार होता है, तो बाजार में कैश फ्लो बढ़ेगा और घरेलू निवेशक उत्साहित होंगे।

2. STT में कटौती: ट्रेडिंग लागत कम करने की मांग

शेयर बाजार में सक्रिय रूप से काम करने वाले ट्रेडर और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लंबे समय से सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को तर्कसंगत बनाने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल ट्रेडिंग लागत के चलते भारतीय शेयर बाजार को ग्लोबल बाजारों की तुलना में महंगा माना जाता है।

बाजार की उम्मीद है कि वित्त मंत्री इस बजट में डिलीवरी आधारित ट्रेडों के लिए STT को पूरी तरह खत्म कर सकती हैं या इसमें महत्वपूर्ण कटौती का ऐलान कर सकती हैं। विदेशी निवेशकों के लिए नीतिगत स्थिरता और टैक्स में कमी सबसे बड़ा 'ग्रीन सिग्नल' होगा। अगर STT में कमी आती है, तो बाजार में ट्रेडिंग वॉल्यूम में भारी उछाल आने की संभावना है, जिससे लिक्विडिटी बेहतर होगी और बाजार को मजबूती मिलेगी।

3. इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपेक्स (Capex) में भारी बढ़ोतरी

किसी भी देश की आर्थिक प्रगति उसके बुनियादी ढांचे पर निर्भर करती है। मोदी सरकार का ट्रैक रिकॉर्ड हमेशा से बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च का रहा है। बाजार को उम्मीद है कि इस बार वित्त मंत्री पूंजीगत व्यय यानी कैपिटल एक्सपेंडिचर में 10% से 15% तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं।

अगर कैपेक्स का लक्ष्य ₹12 लाख करोड़ से ₹12.5 लाख करोड़ के बीच रखा जाता है, तो यह शेयर बाजार के लिए 'बूस्टर' साबित हो सकता है। इसका सीधा लाभ रेलवे, सड़क निर्माण, डिफेंस और शहरी विकास से जुड़ी कंपनियों को मिलेगा। खास तौर से लार्सन एंड टुब्रो (L&T), टाटा प्रोजेक्ट्स और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर दिग्गज कंपनियों के शेयरों पर निवेशकों की पैनी नजर है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ने से न केवल रोजगार पैदा होता है, बल्कि स्टील, सीमेंट और ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी मांग बढ़ती है, जो बाजार के लिए 'विन्स-विन्स' की स्थिति है।

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