Budget Expectations : बजट में खपत बढ़ाने के बड़े ऐलानों की उम्मीद नहीं, ग्लोबल झटकों के बीच स्थिर रहेगा भारत का बाजार

Budget Expectations: पुनीत शर्मा ने कहा कि उनका एजेंडा काफी फोकस्ड और प्रैक्टिकल होता। सबसे पहले तो कैपेक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज़ोर होना चाहिए। यह हाल के सालों में भारत द्वारा इस्तेमाल किए गए सबसे असरदार पॉलिसी टूल्स में से एक रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च का मल्टीप्लायर इफ़ेक्ट बहुत ज़्यादा होता है

अपडेटेड Jan 20, 2026 पर 1:10 PM
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Budget 2026 Expectations : पुनीत शर्मा ने कहा कि वह इन्वेस्टमेंट के नज़रिए से कंजम्पशन पर सेक्टोरल या थीमेटिक दांव नहीं लगा रहे हैं। व्हाइटस्पेस अल्फा में सिर्फ़ NIFTY50 स्टॉक्स में पोजीशन लेते हैं

Budget Expectations : अगर मैं फाइनेंस मिनिस्टर होता तो मैं कैपेक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज़्यादा फोकस करता,बड़े पैमाने पर कंजम्पशन के लिए छूट देने से बचता और मजबूत फिस्कल कंसोलिडेशन के रास्ते पर चलता। ये बातें व्हाइटस्पेस अल्फा के CEO और फंड मैनेजर पुनीत शर्मा ने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में कही हैं। उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने GST को आसान बनाने और मिडिल क्लास को टैक्स में राहत देने के लिए पहले ही काफी कुछ किया है। उनका मानना ​​है कि इस समय कंजम्पशन को सपोर्ट करने का ज़्यादा असरदार तरीका इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और प्राइवेट कैपिटल खर्च से रोज़गार पैदा करना और इनकम बढ़ाना है,न कि और ज़्यादा फिस्कल मदद देना।

उन्हें भरोसा है कि जियोपॉलिटिकल और टैरिफ से जुड़े झटकों के बावजूद भारत का बाजार आगे भी स्टेबल रहेगा। उन्होंने कहा, “आज भारत की सबसे बड़ी ताकतों में से एक यह है कि इसका ग्रोथ इंजन काफी हद तक घरेलू इकोनामी पर निर्भर है। ऐसे में जब ग्लोबल ट्रेड धीमा होता है या जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ती है, तब भी घरेलू खपत और इन्वेस्टमेंट ग्रोथ को सपोर्ट करते रहते हैं।”

अगर आप वित्त मंत्री होते, तो बजट 2026 के लिए आपका एजेंडा क्या होता?


इसके जवाब में पुनीत शर्मा ने कहा कि उनका एजेंडा काफी फोकस्ड और प्रैक्टिकल होता। सबसे पहले तो कैपेक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज़ोर होना चाहिए। यह हाल के सालों में भारत द्वारा इस्तेमाल किए गए सबसे असरदार पॉलिसी टूल्स में से एक रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च का मल्टीप्लायर इफ़ेक्ट बहुत ज़्यादा होता है। यह नौकरियां पैदा करता है, कोर सेक्टर में डिमांड बढ़ाता है, प्रोडक्टिविटी सुधारता है, और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करता है। ऐसे में सड़कों,रेलवे,लॉजिस्टिक्स, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजली और रिन्यूएबल एनर्जी को प्राथमिकता देना जारी रखना चाहिए।

सरकार को बड़े पैमाने पर कंजम्पशन से जुड़े उपायों के ऐलान से बचने की जरूरत है। सरकार पहले ही GST रैशनलाइज़ेशन और मिडिल क्लास को टैक्स में राहत देने के लिए काफी कुछ कर चुकी है। इस स्टेज पर कंजम्पशन को सपोर्ट करने का बेहतर तरीका ज़्यादा फिस्कल मदद देने के बजाय इंफ्रास्ट्रक्चर और प्राइवेट कैपेक्स से जॉब क्रिएशन और इनकम ग्रोथ को सपोर्ट करना है।

बजट में स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स पर पूरा ज़ोर होना चाहिए। इसमें कंप्लायंस को आसान बनाना,बिज़नेस के लिए दिक्कतों को कम करना,मैन्युफैक्चरिंग इंसेंटिव बढ़ाना और स्किलिंग, R&D और फ्यूचरिस्टिक सेक्टर्स में ज़्यादा निवेश करने जैसे कदम शामिल हैं। ये लंबे समय तक कॉम्पिटिटिव बने रहने के लिए बहुत ज़रूरी हैं। इसके साथ ही साथ ही मजबूत फिस्कल कंसोलिडेशन के रास्ते पर कायम रहने की जरूरत। मैक्रो स्टेबिलिटी आज भारत की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है और इससे समझौता नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर कहें तो कैपेक्स,सुधारों और फिस्कल डिसिप्लिन पर फोकस करते हुए ग्रोथ को बढ़ावा देने पर फोकस होना चाहिए।

क्या आपको बजट में खपत बढ़ाने वाले उपायों की उम्मीद है? क्या आप कंजम्पशन स्टॉक्स में अपना एक्सपोज़र बढ़ा रहे हैं?

इस बजट में खपत बढ़ाने के लिए किसी बड़े ऐलान की उम्मीद नहीं है। सरकार पहले ही GST रैशनलाइज़ेशन और टैक्स कटौती के ज़रिए ज़रूरी कदम उठा चुकी है। फिर भी, चुनाव से पहले का बजट होने के नाते, ग्रामीण खर्च, हाउसिंग और रोज़गार पैदा करने के लिए कुछ छोटे और टारगेटेड उपाय हो सकते हैं, जो डिमांड को थोड़ा सपोर्ट कर सकते हैं।

पुनीत शर्मा ने कहा "इन्वेस्टमेंट के नज़रिए से कंजम्पशन पर सेक्टोरल या थीमेटिक दांव नहीं लगा रहे हैं। व्हाइटस्पेस अल्फा  सिर्फ़ NIFTY50 स्टॉक्स में पोजीशन लेता है। हमारा नज़रिया सिर्फ़ भारत की ग्रोथ स्टोरी पर लॉन्ग रहने का है। हमारे लिए, NIFTY50 भारत की आर्थिक और कमाई की दिशा का सबसे अच्छा सिंगल इंडिकेटर और प्रॉक्सी है"।

ऐसे में "कंजम्पशन" में खास पोजीशन बनाने के बजाय, हम हाई-क्वालिटी लार्ज-कैप बिज़नेस में इन्वेस्टेड रहते हैं जो कई साइकल में भारत की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ को कैप्चर करते हैं। जैसे-जैसे भारत ग्रोथ करता है,डिमांड बेहतर होती है और इनकम बढ़ती है। इसका असर स्वाभाविक रूप से कई NIFTY50 कंपनियों की कमाई में दिखता है। हम इसी तरह से सोचते हैं।"

क्या जियोपॉलिटिकल और टैरिफ झटकों के बावजूद भारत स्थिर रहेगा?

आगे भी भारत की स्थिरता पर पूरा भरोसा है। आज भारत की सबसे बड़ी ताकतों में से एक यह है कि इसका ग्रोथ इंजन काफी हद तक घरेलू इकोनॉमी पर निर्भर है। ऐसी स्थिति मेंजब ग्लोबल ट्रेड धीमा होता है या जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ता है, तब भी अंदरूनी खपत और निवेश से ग्रोथ को सपोर्ट मिलता रहता है।

भारत के मैक्रो फंडामेंटल्स भी पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत हैं। फॉरेक्स रिज़र्व अच्छे हैं, महंगाई कंट्रोल में है,राजकोषीय अनुशासन बेहतर हो रहा है और बैंकिंग सिस्टम अच्छी हालत में है। टैरिफ झटके या जियोपॉलिटिकल घटनाओं से कुछ खास सेक्टरों में थोड़े समय के लिए उतार-चढ़ाव आ सकता है, लेकिन इनसे भारत के ग्रोथ की गाड़ी के पटरी से उतरने की संभावना नहीं है।

 

 

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