Budget impact : बजट 2026 में बायबैक टैक्स में बदलाव के बाद IT इंडेक्स दिन के निचले स्तर से 4% तक बढ़ा, विप्रो और TCS में 3% तक की बढ़ोतरी

Budget impact : यूनियन बजट 2026 में बायबैक टैक्स में बदलाव के बाद IT इंडेक्स 4% बढ़ा है। बायबैक से होने वाली कमाई पर कैपिटल गेन्स के तौर पर टैक्स लगाया गया है। इससे IT दिग्गज TCS और विप्रो को फायदा हुआ है। निफ्टी IT और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स ही एकमात्र सेक्टोरल इंडेक्स हैं आज जो हरे निशान में हैं

अपडेटेड Feb 01, 2026 पर 3:39 PM
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IT Stocks : नए प्रस्ताव के तहत, बायबैक से मिलने वाले पैसे में सभी शेयरहोल्डर्स पर कैपिटल गेन्स के तौर पर टैक्स लगेगा। इससे यह पक्का होगा कि टैक्स सिर्फ़ असल आर्थिक फ़ायदे पर ही लगे

IT Stocks : 1 फरवरी को बजट के बाद IT इंडेक्स में तेज़ रिकवरी देखने को मिली है। यूनियन बजट 2026 में शेयर बायबैक के टैक्सेशन में बदलाव के प्रस्ताव के बाद यह दिन के निचले स्तर से 4 प्रतिशत तक चढ़ गया। 16 अहम सेक्टरों में से निफ्टी IT और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स ही हरे निशान में ट्रेड कर रहे हैं। हालांकि ब्रॉडर मार्केट दबाव में है। बेंचमार्क निफ्टी 1 प्रतिशत से ज़्यादा गिर गया है। विप्रो के शेयरों में 3.6 प्रतिशत तक की तेजी आई है। जबकि, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शेयर 3 प्रतिशत तक बढ़े हैं। टाटा कंसल्टेंसी IT सेक्टर में टॉप गेनर है।

IT शेयरों में यह उछाल तब आया जब वित्त मंत्री ने घोषणा की कि शेयर बायबैक से होने वाली कमाई पर इनकम के बजाय कैपिटल गेन के तौर पर टैक्स लगेगा। हाल के सालों में, IT कंपनियां शेयरधारकों को कैश लौटाने के लिए बायबैक का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल करने वाली कंपनियों में से रही हैं।

वेल्थ मिल्स सिक्योरिटीज के इक्विटी स्ट्रैटेजी के डायरेक्टर क्रांति बथिनी का कहना है कि आईटी सेक्टर के टैक्स सिस्टम में यह बदलाव TCS, इंफोसिस और विप्रो जैसी भारतीय IT कंपनियों के लिए एक बड़ा पॉजिटिव है। क्योंकि यह शेयरहोल्डर्स को फायदा पहुंचाने का एक टैक्स-एफिशिएंट तरीका है। कैश-रिच कंपनियां सरप्लस कैपिटल वापस करने के लिए लंबे समय से बायबैक पर निर्भर रही हैं।


जनवरी में निफ्टी IT इंडेक्स फ्लैट रहा, जबकि इसी दौरान बेंचमार्क निफ्टी में 3.1 प्रतिशत की गिरावट आई। ट्रस्टलाइन होल्डिंग्स के CEO एन अरुणागिरी का कहना है कि निवेशकों के लिए बायबैक टैक्सेशन में बदलाव एक और अच्छी बात है। माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के फायदे को अब रेगुलर इनकम के बजाय कैपिटल गेन्स की तरह माना जाएगा। यह निवेशकों की एक पुरानी परेशानी को दूर करता है और मार्केट के लिए फायदेमंद है।

इस प्रस्ताव के तहत, बायबैक से मिलने वाले पैसे में सभी शेयरहोल्डर्स पर कैपिटल गेन्स के तौर पर टैक्स लगेगा। इससे यह पक्का होगा कि टैक्स सिर्फ़ असल आर्थिक फ़ायदे पर ही लगे। इससे नॉन-प्रमोटर इन्वेस्टर्स को होने वाली परेशानी खत्म होगी।

 

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