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SIS Shares: चार साल में चौथी बार बायबैक का ऐलान, इस भाव पर शेयरों को वापस खरीदेगी एसआईएस

SIS Shares: चार साल में चौथी बार एसआईएस शेयरों का बायबैक करने जा रही है। इसका भाव भी फिक्स हो गया है। जानिए कि कंपनी किस भाव पर शेयरों का बायबैक करेगी और इससे पहले तीन बार में किस भाव पर यह काम हुआ था? इसके अलावा जानिए कि एक साल में कंपनी के शेयरों की चाल कैसी रही?

Edited By: Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Mar 26, 2025 पर 4:06 PM
SIS Shares: चार साल में चौथी बार बायबैक का ऐलान, इस भाव पर शेयरों को वापस खरीदेगी एसआईएस
SIS Shares: एसआईएस के बोर्ड ने 5 रुपये की फेस वैल्यू वाले 37.12 शेयरों को शेयरहोल्डर्स से वापस खरीदने यानी कि बायबैक की मंजूरी दी है।

SIS Shares: एसआईएस के शेयरों में आज बिकवाली का दबाव ऐसे समय में दिखा, जब इसके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 150 करोड़ रुपये के बायबैक के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। बोर्ड ने 5 रुपये की फेस वैल्यू वाले 37.12 शेयरों को शेयरहोल्डर्स से वापस खरीदने यानी कि बायबैक की मंजूरी दी है। इसका प्राइस भी फिक्स हो चुका है। वहीं शेयर प्राइस मूवमेंट की बात करें को आज बीएसई पर यह 3.80 फीसदी की गिरावट के साथ 329.00 रुपये के भाव पर बंद हुआ है। बुधवार के क्लोजिंग प्राइस से 18 फीसदी से अधिक प्रीमियम पर बायबैक के ऐलान के बावजूद संभवत: यह गिरावट इसलिए है क्योंकि कंपनी ने अभी बायबैक के लिए रिकॉर्ड डेट का खुलासा नहीं किया है।

किस भाव पर SIS अपने शेयरों को खरीदेगी वापस?

एसआईएस के बोर्ड की 25 मार्च की बैठक में 37.12 लाख शेयरों के बायबैक को मंजूरी मिली है। इन शेयरों की खरीदारी 404 रुपये के भाव पर होगी जो मंगलवार को बीएसई पर 342.00 रुपये के क्लोजिंग प्राइस से 18.13 फीसदी प्रीमियम पर है। कंपनी जितने शेयरों का बायबैक करेगी, वह इसकी 2.57 फीसदी हिस्सेदारी के बराबर है। यह बायबैक टेंडर ऑफर रूट के जरिए होगा यानी कि कंपनी पहले से फिक्स भाव पर शेयर खरीदेगी। हालांकि अभी इस बायबैक के लिए रिकॉर्ड डेट नहीं फिक्स हुआ है। अभी इस प्रस्ताव पर शेयरहोल्डर्स की भी मंजूरी लेनी है।

यह पहली बार नहीं है, जब कंपनी बायबैक करेगी बल्कि चार साल में यह चौथी बार होगा। इससे पहले वर्ष 2021, वर्ष 2022 और वर्ष 2023 में कंपनी ने टेंडर ऑफर रूट के जरिए 550 रुपये के भाव पर बायबैक किया था। वैसे बता दें कि बजट 2024 के ऐलान के मुताबिक शेयरबायबैक के जरिए जो कमाई शेयरहोल्डर्स को होगी, उस पर अब कंपनी की बजाय शेयरहोल्डर्स को ही टैक्स भरना होता है।

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