पुनरोद्धार की उम्मीदों के बीच कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज के शेयरों में तेजी,लेकिन एक्सपर्ट्स को इसकी सफलता को लेकर शक, जानिए क्यों

पश्चिम बंगाल सरकार की रिवाइवल योजना को लेकर बनी उम्मीदों के कारण कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज के अनलिस्टेड शेयरों में तेज़ी आई है,हालांकि एक्सपर्ट्स एक्सचेंज के लंबे समय तक चलने की क्षमता को लेकर अभी भी सतर्क नजर आ रहे हैं। इसे फिर से शुरू करने में रेगुलेटरी,टेक्नोलॉजी और लिक्विडिटी से जुड़ी चुनौतियां हैं

अपडेटेड Jun 30, 2026 पर 5:33 PM
1923 में स्थापित कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज में अप्रैल 2013 के बाद से इक्विटी ट्रेडिंग नहीं हुई है। SEBI ने मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों के लिए ज़रूरी नियमों का पालन न करने के कारण इस एक्सचेंज पर ट्रेडिंग रोक दी थी

Calcutta Stock Exchange Revival : वेस्ट बंगाल सरकार ने एक सदी पुराने कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज (CSE) को फिर से शुरू करने का इरादा ज़ाहिर किया है। इसके बाद अनलिस्टेड शेयर प्लेटफॉर्म्स पर कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज के शेयरों में ज़बरदस्त तेज़ी आई है। हालांकि,मार्केट एक्सपर्ट्स को इस एक्सचेंज के फिर से चालू होने की संभावना पर अभी भी शक है। एक्सचेंज के अनलिस्टेड शेयरों की कीमत 21 जून को लगभग 1,500 रुपये थी। 30 जून तक बढ़कर यह लगभग 1,800 रुपये पर पहुंच गई। कुछ प्लेटफॉर्म पर इस शेयर की कीमत 2,000 रुपये के करीब भी बताई जा रही है। हालांकि,इसका ट्रेडिंग वॉल्यूम बहुत कम है।

एक्सचेंज की प्रति शेयर बुक वैल्यू 3,000 रुपये से ज़्यादा है। बता दें कि 22 जून को पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वपन दासगुप्ता ने राज्य के बजट में CSE को फिर से शुरू करने की घोषणा की थी।

उम्मीद है कि राज्य सरकार के प्रस्ताव के बाद,CSE के अधिकारी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI)के पास जमा किए गए एक्सचेंज के वॉलंटरी एग्जिट (स्वेच्छा से बाहर निकलने) के आवेदन को वापस ले लेंगे। एक्सचेंज ने फरवरी 2025 में वॉलंटरी एग्जिट के लिए आवेदन किया था,जिसके बाद SEBI ने एग्जिट प्रोसेस के तहत एक वैल्यूअर नियुक्त किया था। हालांकि,इस आवेदन पर अभी कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया है।


यह तेजी सरकार के रिवाइवल प्रपोजल को लेकर बनी उम्मीद दिखाती है। हालांकि,बाजार के जानकारों का कहना है कि किसी भी रिवाइवल के लिए SEBI की मंज़ूरी और बड़ी रेगुलेटरी,टेक्नोलॉजिकल और कमर्शियल दिक्कतों से पार पाने की जरूरत होगी।

क्या हैं बड़ी चुनौतियां?

बाजार जानकारों का कहना है कि आज किसी स्टॉक एक्सचेंज को फिर से शुरू करने के लिए सिर्फ़ रेगुलेटरी मंज़ूरी से कहीं ज्यादा की ज़रूरत होती है। कम से कम 100 करोड़ रुपये की नेट वर्थ की शर्त पूरी करने के अलावा,एक आधुनिक एक्सचेंज के लिए एडवांस्ड टेक्नोलॉजी प्लेटफ़ॉर्म,सर्विलांस सिस्टम, साइबर सिक्योरिटी क्षमताएं,क्लियरिंग और सेटलमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर और खास तौर पर ट्रेंड स्टाफ़ की ज़रूरत होती है।

हालांकि कम से कम पूंजी की शर्त को पूरा करना शायद सबसे बड़ी बाधा न हो,लेकिन क्लियरिंग कॉरपोरेशन बनाना या क्लियरिंग की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती है। मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार,CSE ने पहले देश के प्रमुख क्लियरिंग कॉरपोरेशन के साथ क्लियरिंग व्यवस्थाओं पर करार करने का प्रयास किया था,लेकिन वह कोशिश सफल नहीं हो पाई।

हालांकि,सबसे बड़ी बाधा लिक्विडिटी यानी अलग-अलग प्राइस लेवल पर पर्याप्त खरीदारों और विक्रेताओं की मौजूदगी है,ताकि आसानी से और कुशलता से ट्रेडिंग हो सके।

बाजार जानकारों का कहना है कि मजबूत टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर होने के बावजूद,कुछ मौजूदा एक्सचेंज भी ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर और ब्रोकर आम तौर पर ऐसे एक्सचेंज को पसंद करते हैं जहां लिक्विडिटी सबसे ज़्यादा होती है। इसके चलते किसी दोबारा शुरू किए गए एक्सचेंज के लिए बड़ी ट्रेडिंग एक्टिविटी को आकर्षित करना मुश्किल हो सकता है।

ANMI के नेशनल प्रेसिडेंट कमलेश श्रॉफ का कहना है कि भारत के कैपिटल मार्केट अब टेक्नोलॉजी और लिक्विडिटी पर आधारित इकोसिस्टम बन गए हैं। भले ही कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज की विरासत सम्मान के काबिल है,लेकिन इसे फिर से शुरू करने का आधार पुरानी शान के बजाय भविष्य की ज़रूरतें होनी चाहिए। अगर यह SME फाइनेंसिंग,रीजनल एंटरप्रेन्योरशिप,नए एसेट क्लास या मार्केट इनोवेशन के क्षेत्र में अपनी खास जगह बना पाता है,तो यह भारत की विकास यात्रा में अहम योगदान दे सकता है।

CSE के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO माधव रेड्डी कहते हैं कि इस एक्सचेंज को फिर से सफल बनाने के लिए,उसे एक ऐसा आकर्षक वैल्यू प्रपोज़िशन देना होगा जो अनोखा हो,किफायती हो और मौजूदा प्लेयर्स से काफी अलग हो। अगर इसमें साफ़ तौर पर कोई अलग औक खास बात नहीं होगी,तो इसके सफल पुनरुद्धार की संभावनाएं सीमित ही रहेंगी।

इसे बंद करना भी साबित हुआ मुश्किल

अजीब बात यह है कि इस एक्सचेंज को बंद करना भी उसे फिर से शुरू करने जितना ही मुश्किल साबित हुआ है। CSE ने इस साल की शुरुआत में SEBI की एग्जिट पॉलिसी के तहत स्वेच्छा से बाहर निकलने(वॉलंटरी एग्जिट)के लिए आवेदन किया था और इसके बाद रेगुलेटर ने एक वैल्यूअर नियुक्त किया। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि SEBI की 2012 की एग्जिट पॉलिसी के तहत,जो स्टॉक एक्सचेंज स्वेच्छा से बाहर निकलना चाहता है,उसे एग्जिट प्रोसेस पूरी होने से पहले ब्रोकर्स की ओर से आए दावों और देनदारियों का निपटारा करना होगा। मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि ये देनदारियां कुछ सौ करोड़ रुपये तक हो सकती हैं।

एक्सर्ट्स आगे कहते हैं कि हालांकि SEBI कुछ रेगुलेटरी बकाया राशि माफ़ कर सकता है,लेकिन कानूनी जुर्माने सरकारी बकाया राशि के दायरे में आते हैं और उन्हें अकेले SEBI माफ़ नहीं कर सकता। इससे एग्ज़िट की प्रक्रिया और भी जटिल हो जाती है।

फिलहाल,CSE के अनलिस्टेड शेयरों में तेजी राज्य के रिवाइवल प्रपोज़ल को लेकर बनी उम्मीद दिखाती है,लेकिन जानकारों का कहना है कि एक्सचेंज का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या वह NSE और BSE के दबदबे वाले बाजार में लिक्विडिटी लाने में सक्षम एक अलग बिजनेस प्लेटफ़ॉर्म बना पाता है या नहीं।

क्यों बंद हुआ CSE?

1923 में स्थापित कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज में अप्रैल 2013 के बाद से इक्विटी ट्रेडिंग नहीं हुई है। SEBI ने मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों के लिए ज़रूरी नियमों का पालन न करने के कारण इस एक्सचेंज पर ट्रेडिंग रोक दी थी। रेगुलेटर ने इसका कारण ऑपरेशनल और रेगुलेटरी नियमों का पालन न करना बताया था। साथ ही,CSE काट्रेडिंग वॉल्यूम धीरे-धीरे NSE और BSE की ओर शिफ्ट हो गया,क्योंकि ये दोनों एक्सचेंज बेहतर टेक्नोलॉजी,देश भर में कनेक्टिविटी और काफी ज़्यादा लिक्विडिटी की सुविधा देते हैं।

जब ब्रोकर्स और इन्वेस्टर्स ने ऐसे एक्सचेंज को प्राथमिकता दी जहां बेहतर मार्केट और कीमतों का सही पता लगाने की सुविधा थी,तो CSE में ट्रेडिंग लगभग खत्म हो गई। हालांकि एक्सचेंज ने कानूनी रास्ते अपनाए और बाद में SEBI के एग्जिट फ्रेमवर्क के तहत स्वेच्छा से बाहर निकलने की कोशिश की। एक दशक से भी ज़्यादा समय से यहां कोई एक्टिव इक्विटी ट्रेडिंग नहीं हुई है।

 

 

 

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