सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया लिमिटेड के शेयरों में 22 मई को शुरुआती कारोबार में 6 प्रतिशत तक की गिरावट आई। बीएसई पर शेयर 31.85 रुपये के लो तक गया। इसकी वजह है कि सरकार ने ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया शुरू कर दी है। निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के अनुसार, केंद्र सरकार OFS के जरिए बैंक में अपनी 4 प्रतिशत इक्विटी बेचेगी। उसके पास 'ग्रीन शू विकल्प' के जरिए और 4 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का भी विकल्प है।
नॉन-रिटेल इनवेस्टर शुक्रवार, 22 मई को OFS के लिए बोली लगा सकते हैं, जबकि रिटेल इनवेस्टर्स सोमवार, 25 मई को बोली लगा सकते हैं। शेयर बाजारों पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तिमाही के अंत में केंद्र सरकार के पास सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 89.27 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास बैंक में 10.73 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। इनमें से रिटेल इनवेस्टर्स यानि कि जिनकी अधिकृत शेयर पूंजी 2 लाख करोड़ रुपये तक है, के पास 3.42 प्रतिशत तक हिस्सेदारी थी।
मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग मानदंडों (MPS) का पालन करने के लिए सरकार को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में और 14.27 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचनी होगी। शेयर में आई गिरावट के बाद बैंक का मार्केट कैप 29000 करोड़ रुपये रह गया है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। शेयर BSE 500 इंडेक्स का हिस्सा है। 2 साल में इसकी कीमत घटकर आधी हो चुकी है।
गोल्डमैन सैक्स है सलाहकार
पिछले साल अगस्त में सरकार ने पब्लिक सेक्टर के 4 बैंकों (PSBs) में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए गोल्डमैन सैक्स को एकमात्र लेनदेन सलाहकार नियुक्त किया था। लिस्ट में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया भी शामिल था। जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 30 प्रतिशत घटकर 724.4 करोड़ रुपये रह गया। शुद्ध ब्याज आय (NII) पिछले साल के मुकाबले 17.8 प्रतिशत बढ़कर 4,002 करोड़ रुपये हो गई।
ग्रॉस नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) रेशियो तिमाही आधार पर घटकर 2.67% और नेट NPA बढ़कर 0.49% हो गया। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने मार्च 2025 में QIP यानि कि क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट के जरिए 1,500 करोड़ जुटाए थे।
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