Chemical Stocks: अगर आप केमिकल शेयरों में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो थोड़ा संभल जाइए। पिछले एक महीने में केमिकल शेयरों में अच्छी तेजी आई है। लेकिन इसके बावजूद एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है यह तेजी बहुत ज्यादा लंबी नहीं रहने वाली है। ऐसे में आपको इन शेयरों को खरीदने से पहले थोड़ा वेट करना चाहिए। केमिकल शेयरों को लेकर एक्सपर्ट्स ऐसा क्यों कह रहे हैं, आइए इसे समझते हैं। स्पेशयलिटी केमिकल्स कंपनियों का प्रदर्शन पिछले कुछ तिमाहियों से कमजोर रहा है। अधिकतर केमिकल्स की कीमतों में गिरावट आई थी, जिससे चलते इन कंपनियों का न सिर्फ मार्जिन कम हुआ, बल्कि इनके शेयरों का भाव भी नीचे आ गया था।
लेकिन अब पिछले कुछ समय से चीन में केमिकल्स की कीमतें बढ़ी है, जिससे इनकी ग्रोथ फिर से बढ़ने की उम्मीद जगी है। ICIS के एक आंकड़े के मुताबिक, चीन में 32 मुख्य केमिकल्स में से 28 की कीमतें बढ़ी हैं। लेकिन इस बढ़ोतरी के पीछे जो वजह है, वह टेंपररी है। चीन में सितंबर-अक्टूबर को 'गोल्डन' सीजन कहते हैं, जिस दौरान हर साल मांग में बढ़ोतरी देखने को मिलती है।
भारतीय कंपनियों को भी इसकी पहले से जानकारी थी। आरती इंडस्ट्रीज सहित कई कंपनियों ने अपनी कमेंटरी में सितंबर तिमाही के दौरान मांग में बढ़ोतरी का संकेत दिया था। यही कारण है कि इनके शेयरों में तेजी आई है।
SRF, विनती ऑर्गेनिक्स, आरती इंडस्ट्रीज, नवीन फ्लोरीन, दीपक नाइट्राइट, क्लीन साइंस और अतुल लिमिटेड के शेयरों में अगस्त की शुरुआत से अब तक, यानी करीब डेढ़ महीने में 4-12 प्रतिशत का उछाल आया है। जबकि इसके पहले जनवरी से जुलाई तक इन कंपनियों के शेयरों में 5 से 23 फीसदी की गिरावट आई थी। नवीन फ्लोरीन और दीपक नाइट्राइट सिर्फ 2 ही ऐसी बड़ी केमिकल कंपनियां थीं, जिनका रिटर्न इस दौरान माइनस में नहीं गया था।
अभी केमिकल कंपनियों के शेयरों में जो तेजी आई है, वह इस उम्मीद से आई है कि कीमत बढ़ने से इनकी मांग में रिकवरी देखने को मिलेगी। लेकिन कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (KIE) ने चेतावनी दी है, यह उम्मीद कुछ ज्यादा हो सकती है। कोटक का कहना है कि कोई रिकवरी बहुत निचले स्तर पर होगी। साथ ही इन कंपनियों के अर्निंग को लेकर जो भी अनुमान जारी किए गए हैं, उसमें भी पहले से इस बात पर गौर किया गया है कि दूसरी छमाही में इनकी मांग बढ़ेगी। इसके अलावा इन कंपनियों ने अपना जो खुद से गाइडेंस जारी किया है, उसमें भी मांग में उछाल का जिक्र है।
कोटक की सबसे अधिक चिंता पर बात है कि हालिया तेजी से इन शेयरों का वैल्यूएशन पहले से और अधिक बढ़ गया है, जो इन निवेश के लिहाज से थोड़ा महंगा बनाता है। कोटक के अलावा आनंद राठी का भी लगभग ऐसा ही मानना है।
आनंद राठी ने कहा कि केमिकल कंपनियों के लिए जून तिमाही कमजोर रहा था। बाजार की स्थितियां भी चुनौतीपूर्ण है। लेकिन फिर भी इनके वैल्यूएशन में बहुत ज्यादा करेक्शन देखने को नहीं मिला है। ऐसा इसलिए क्योंकि इनका लॉन्ग-टर्म आउटलुक अभी भी मजबूत बना हुआ है। लेकिन मध्यम-अवधि के लिए सतर्क रहने की जरूरत है।
आनंद राठी ने कहा कि मांग में कमजोरी के बावजूद भारतीय केमिकल कंपनियां लगातार कैपिटल एक्सपेंडिचर पर जोर दे रही है क्योंकि उन्हें लंबी अवधि में मजबूत संभावनाएं देख रही हैं। लेकिन शॉर्ट-टर्म में यह कैपिटल एक्सपेंडिचर उनके फाइनेंशियल प्रदर्शन पर असर डालेगा।
कुल मिलाकर, लंबी अवधि में केमिकल स्टॉक्स को लेकर उम्मीदें बनी हुई हैं, लेकिन शॉर्ट-टर्म में मुश्किल कारोबारी हालात के चलते ये स्पेशयलिटी केमिकल्स स्टॉक्स काफी महंगे हो सकते हैं।
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