चीन ने सेमीकंडक्टर चिप्स में इस्तेमाल होने वाले मेटल्स के एक्सपोर्ट पर लगाया प्रतिबंध, भारत पर कितना पड़ेगा असर!

चीन ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए इन दो धातुओं के निर्यात को प्रतिबंधित करने का फैसला किया है। अब इन दोनों धातुओं को चीन से बाहर भेजने के लिए निर्यातकों को लाइसेंस के लिए आवेदन करना होगा और विदेशी खरीदारों और उनके साथ हुए सौदे का पूरा विवरण चीन की सरकार को देना होगा। सेमीकंडक्टर बनाने में इस्तेमाल होने वाली इन धातुओं के निर्यात पर लगाया गया ये प्रतिबंध चीन, अमेरिका और यूरोप के बीच छिडे़ टेक्नोलॉजी वार का नतीजा है

अपडेटेड Jul 05, 2023 पर 10:53 PM
Story continues below Advertisement
आयात पर निर्भरता को देखते हुए इन दोनों धातुओं के निर्यात पर चीन के प्रतिबंधों से भारत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होगा

चीन ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए सेमीकंडक्टर चिप्स को बनाने में इस्तेमाल होने वाली दो महत्वपूर्ण धातुओं गैलियम (gallium) और जर्मेनियम (germanium) के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। चीनी सरकार ने 3 जुलाई को ऐलान किया कि 1 अगस्त से इन दोनों धातुओं के निर्यात पर अंकुश लगाया जाएगा। इसके साथ ही इनके केमिकल कम्पाउंड्स (chemical compounds) के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगाया जाएगा। ये खबर ऐसे समय में आई हैं जब भारत सहित तमाम देश सेमीकंडक्टर चिप्स के लिए चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए आक्रामक रूप से अपनी सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

दूरसंचार, सेमीकंडक्टर और रक्षा उद्योग पर पड़ेगा असर 

यूरोप एक औद्योगिक संगठन क्रिटिकल रॉ मटेरियल एलायंस (सीआरएमए) का कहना है कि चीन ये ऐलना काफी अहम है क्योंकि चीन ग्लोबल जर्मेनियम उत्पादन में लगभग 60 फीसदी और गैलियम उत्पादन में लगभग 80 फीसदी हिस्सेदारी रखता है। इस प्रतिबंध से भारत के दूरसंचार, सेमीकंडक्टर और रक्षा उद्योग पर असर पड़ सकता है।


बीजिंग ने कहा है कि चीन ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन दो धातुओं के निर्यात को प्रतिबंधित करने का फैसला किया है। अब इन दोनों धातुओं को चीन से बाहर भेजने के लिए निर्यातकों को लाइसेंस के लिए आवेदन करना होगा और विदेशी खरीदारों और उनके साथ हुए सौदे का पूरा विवरण चीन की सरकार को देना होगा।

चीन,अमेरिका और यूरोप के बीच छिडे़ टेक्नोलॉजी वार का नतीजा है ये प्रतिबंध

सेमीकंडक्टर बनाने में इस्तेमाल होने वाली इन धातुओं के निर्यात पर लगाया गया ये प्रतिबंध चीन, अमेरिका और यूरोप के बीच छिडे़ टेक्नोलॉजी वार का नतीजा है। बता दें कि अमेरिका ने अक्टूबर 2022 में चीन के होने वाले सेमीकंडक्टर और उपकरणों के निर्यात में कटौती करने के लिए नए नियम लागू किए थे। इसका बदला लेने के लिए चीन ने गैलियम और जर्मेनियम के निर्यात पर प्रतिबंध का ऐलान किया है।

बताते चलें कि गैलियम और जर्मेनियम प्राकृतिक रूप से नहीं मिलते। आमतौर पर ये धातुएं एल्यूमीनियम और जिंक जैसी धातुओं को बनाते वक्त बॉय प्रोडक्ट के तौर पर मिलती हैं। ये दोनों धातुएं बहुत ज्यादा अहम इसलिए हैं क्योंकि इनका इस्तेमाल सेमीकंडक्टर, कम्यूनिकेशन और डिफेंस उपकरणों में लगने वाले चिप्स को बनाने में किया जाता है।

देश में गैलियम या जर्मेनियम का प्राथमिक स्रोत नहीं 

भारत इन दोनों धातुओं के लिए मुख्य रूप से आयात पर निर्भर है। देश में गैलियम या जर्मेनियम का प्राथमिक स्रोत नहीं है। एल्युमिना का उत्पादन करते समय गैलियम को बॉय प्रोडक्ट के तौर पर हासिल किया जाता है। भारत में दो प्लांट्स में पहले गैलियम बना था। उत्तर प्रदेश के रेनुकूट में स्थित हिंडाल्को के प्लांट और ओडिशा के दमनजोडी में स्थित नाल्को के एल्यूमिना रिफाइनरी में अतीत में गैलियम मिला था। जर्मेनियम भी देश में उपलब्ध नहीं है। वर्तमान में इसकी जरूत आयात के जरिए पूरी की जाती है।

पिछले महीने खनन मंत्रालय की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि 33 में से 17 एलीमेंट ऐसे हैं जिनके साथ आपूर्ति का जोखिम जुड़ा हुआ है। ये एलीमेंट देश के लिए आर्थिक तौर पर काफी अहम हैं। इस रिपोर्ट में गैलियम का नाम भी शामिल था। जर्मेनियम सहित कुल 7 एलीमेंट्स की पहचान हाई सप्लाई रिस्क वाले एलीमेंट्स के रूप में की गई है।

टमाटर की कीमत ने छुआ आसमान, कई शहरों में पेट्रोल से भी महंगा हुआ टमाटर

भारत पर क्या होगा असर

आयात पर निर्भरता को देखते हुए इन दोनों धातुओं के निर्यात पर चीन के प्रतिबंधों से भारत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होगा। गैलियम का इस्तेमाल सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बोर्ड, एलईडी डिवाइसेज, विशेष तरह के थर्मामीटर और बैरोमीटर सेंसर को बनाने में किया जाता है। जबकि जर्मेनियम का इस्तेमाल ऑप्टिकल फाइबर, सौर सेल, कैमरा और माइक्रोस्कोप लेंस, इन्फ्रारेड नाइट विजन सिस्टम और पोलीमराइजेशन कैटलिस्ट को बनाने में किया जाता है। चीन के प्रतिबंधों से इन प्रोडक्ट्स को देश में ही बनाने की भारत की योजना प्रभावित होगी। इसके अलावा निकट की अवधि में चीन के इस प्रतिबंध से चिप्स पर आधारित उपकरणों के आयात पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

क्या है भारत सरकार का रुख

भारत सरकार ने 28 जून को गैलियम और जर्मेनियम सहित 30 महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान करते हुए कहा था कि लिस्टेड खनिज देश के आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी हैं। सरकार ने कहा कि इन महत्वपूर्ण खनिजों की सूची उन खनिजों की पहचान करने और प्राथमिकता देने के लिए डिज़ाइन की गई है जो विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के लिए जरूरी हैं।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।