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RBI ला सकता है शेयर बाजार में तेजी? निवेशकों पर लटकी है दोधारी तलवार

भारतीय निवेशकों पर इस समय ऐसा लग रहा है, जैसे मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ा है। यहां तक कि SEBI भी F&O सेगमेंट पर शिंकजा कस रहा है। हालांकि फिलहाल यह बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात नहीं है। बाजार के लिए असल चिंता है मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता तनाव, जिसने क्रूड ऑयल के मार्केट में खलबली मचा दी है। इस सबके बीच एक्सपर्ट्स को RBI में उम्मीद की किरण दिख रही है

Moneycontrol Newsअपडेटेड Oct 04, 2024 पर 7:31 PM
RBI ला सकता है शेयर बाजार में तेजी? निवेशकों पर लटकी है दोधारी तलवार
China weighs on Indian markets: विदेशी निवेशकों के लिए लंबे समय से चीन फेवरेट मार्केट रहा है

भारतीय निवेशकों पर इस समय ऐसा लग रहा है, जैसे मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ा है। यहां तक कि SEBI भी उन दबाव बना रहा है और उनमें अनुशासन लाने के लिए F&O सेगमेंट पर शिंकजा कस रहा है। हालांकि फिलहाल यह बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात नहीं है। बाजार के लिए असल चिंता है मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता तनाव, जिसने क्रूड ऑयल के मार्केट में खलबली मचा दी है। साथ ही चीन भी एक नई चुनौती बनकर उभरा है। इस सबके बीच एक्सपर्ट्स को RBI में उम्मीद की किरण दिख रही है। क्या है यह उम्मीद और बाजार के सामने किस किस तरह के खतरे हैं, आइए जानते हैं

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव से शेयर बाजार सहमा हुआ है। बाजार को डर है कि अगर दोनों देशों के बीच बड़े स्तर पर युद्ध हुआ तो ग्लोबल स्तर पर व्यापर और सप्लाई में दिक्कतें आएंगी। इसका सबसे पहला असर क्रूड ऑयल पर पड़ेगा और ये अभी से दिखने भी लगा है। पिछले कुछ दिन में ही क्रूड ऑयल की कीमतें लगभग 7% तक बढ़ गई हैं। अब इसके दाम के 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की भविष्यवाणियां की जा रही है, जो भारत जैसे क्रूड ऑयल खरीदने करने वाले देशों के लिए चिंता की बात है।

युद्ध से क्रूड ऑयल का पूरा मार्केट चरमरा सकता है। उससे भी बुरी बात यह होगी कि ईरान गुस्से में आकर होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते को बंद कर दे। यह एक संकरा सा समुद्री रास्ता है, जहां से ईरान, ईराक और सऊदी अरब जैसे अपना एक्सपोर्ट करते हैं। होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से दुनिया के लगभग 20% तेल का व्यापार होता है, और इसके बंद होने से पूरी दुनिया की सप्लाई चेन चरमरा सकती है। तेल के दाम बढ़ने का सीधा असर भारत के इंपोर्ट बिल, महंगाई दर और फ्यूल की कीमतों पर पड़ेगा। इन सभी का शेयर बाजार नेगेटिव असर हो सकता है।

यही पर भारतीय रिजर्व बैंक की भूमिका अहम हो जाती है। क्योंकि ये सभी कारण मिलकर बाजार को उतना प्रभावित नहीं कर सकते, जितना RBI अपने फैसले से कर सकती है। RBI के मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की अगले हफ्ते 9 अक्टूबर को बैठक होने वाली है। हाल ही में RBI ने बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाने की कोशिशें की हैं। लेकिन मौजूदा ग्लोबल हालातों को देखते हुए अधिकतर इकोनॉमिस्ट का यही मानना है ब्याज दरों में किसी भी तरह कटौती की उम्मीद करना अभी सही नहीं होगा। यहां तक कि RBI अपनी पॉलिसी की भाषा में भी किसी तरह की नरमी नहीं दिखाएगा। उनका यह भी कहना है कि भारत इन स्थितियों से निपटने के लिए पहले से बेहतर तैयार है और इसीलिए मिडिल ईस्ट का बाजार पर लंबा रहने की उम्मीद नहीं है।

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