अर्निंग्स रिकवरी में कंजम्प्शन सहित 3 सेक्टर का होगा बड़ा हाथ, क्या यह दांव लगाने का सही मौका है?

एलजीटी वेल्थ इंडिया के सीआईओ (इक्विटी) चकरी लोकप्रिय ने कहा कि इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में प्रॉफिट ग्रोथ साल दर साल आधार पर 5-8 फीसदी रह सकती है। उसके बाद प्रॉफिट ग्रोथ रफ्तार पकड़ेगी

अपडेटेड Oct 11, 2025 पर 5:03 PM
जीएसटी में कमी से चीजों के दाम 10-15 फीसदी घट गए हैं। फरवरी में इनकम टैक्स घटने से लोगों के पास ज्यादा पैसे बच रहे हैं।

इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में अर्निंग्स ग्रोर्थ में रिकवरी दिख सकती है। एलजीटी वेल्थ इंडिया के सीआईओ (इक्विटी) चकरी लोकप्रिय ने यह उम्मीद जताई है। उनका मानना है कि इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में प्रॉफिट ग्रोथ साल दर साल आधार पर 5-8 फीसदी रह सकती है। उसके बाद प्रॉफिट ग्रोथ रफ्तार पकड़ेगी। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच ट्रेड डील हो जाती है और 25 फीसदी टैरिफ हट जाता है तो यह बड़ी जीत होगी। मनीकंट्रोल से बातचीत में उन्होंने स्टॉक मार्केट और इनवेस्टमेंट के बारे में कई बड़ी बातें बताई।

जीएसटी में कमी और टैक्स घटने से जेब में ज्यादा पैसे बच रहे

उन्होंने कहा कि टैक्स में राहत, जीएसटी में कमी और मानसून की अच्छी बारिश से इकोनॉमी की तस्वीर अच्छी दिखती है। अर्निंग्स रिकवरी में कंजम्प्शन, फाइनेंशियल और मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हाथ होगा। उन्होने कहा, "कंजम्प्शन बड़ी स्टोरी बनने जा रही है। जीएसटी में कमी से चीजों के दाम 10-15 फीसदी घट गए हैं। फरवरी में इनकम टैक्स घटने से लोगों के पास ज्यादा पैसे बच रहे हैं। लोग अब ज्यादा खर्च कर सकते हैं। प्रति व्यक्ति कंजम्प्शन 3,250 डॉलर होने जा रहा है। इससे रेवेन्यू ग्रोथ बढ़ेगी। "


FY26 की दूसरी तिमाही में डिमांड पर फोकस बना हुआ है

लोकप्रिय ने कहा कि FY26 की दूसरी छमाही में डिमांड पर फोकस है। फेस्टिवल्स, शादियों और टैक्स में कमी से सेंटिमेंट बेहतर हुआ है। इससे ऊंची कीमतों के बावजूद गोल्ड की सेल्स बढ़ी है। नॉन-ज्वेलरी कैटेगरी की ग्रोथ डबल डिजिट में है। इससे पता चलता है कि डिमांड अच्छी है। इकोनॉमी में ढांचागत बदलाव आ रहा है। FY25 में जीडीपी में कंजम्प्शन की हिस्सेदारी 60 फीसदी पहुंच गई। FY20 में यह 55 फीसदी थी। लोगों के हाथ में खर्च के लिए ज्यादा पैसे हैं। इसमें जीएसटी में कमी और इनकम टैक्स में राहत जैसे उपायों का हाथ है।

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सेविंग्स का पैसा म्यूचुअल फंड-शेयरों में जा रहा

उन्होंने कहा कि कंजम्प्शन में बूम से सेविंग्स का पैसा म्यूचुअल फंड, इंश्योरेंस, इक्विटी में जा रहा है। म्यूचुअल फंड्स का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) जुलाई 2025 में 77 लाख करोड़ तक पहुंच गया। फाइनेंशियल्स में सरकारी और प्राइवेट बैंक पर फोकस बना हुआ है। बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियां भी अच्छी दिख रही हैं। ब्रोकर्स को नियमों के मामले में मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। टीसीएस 1 GW का डेटा सेंटर बनाने जा रही है। यह इंडिया के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की ताकत दिखाता है।

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