फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) ने 21 फरवरी को कहा कि पिछले तीन वर्षों से बैंकों की बैलेंस शीट में लगातार हो रहे सुधार और कोविड-19 से संबंधित जोखिमों के लगभग खत्म होने के साथ ही भारतीय बैंकों के प्रदर्शन में आगे और तेजी आने की संभावना दिख रही है। फिच रेटिंग्स ने आज आई एक रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय बैंकों के वित्तीय प्रदर्शन में निरंतर हो रहा सुधार बैंकिंग सेक्टर के आंतरिक जोखिम प्रोफाइल के लिए अच्छा संकेत है।
बैंकिंग सेक्टर के असेट क्वालिटी पर बात करते हुए रेटिंग एजेंसी ने कहा कि वित्त वर्ष 2023 के पहले 9 महीनों में बैंकिंग सेक्टर का इम्पेयर्ड लोन रेशियो (खराब लोन जिसकी रिकवरी मुश्किल है) वित्त वर्ष 2022 के इसी अवधि के 6 फीसदी से घटकर 4.5 फीसदी पर आ गई है। ये अनुपात फिच रेटिंग्स के अनुमान से भी 60 बेसिस प्वाइंट यानी 0.60 फीसदी कम है।
हायर लोन ग्रोथ और नए एनपीए में कमी से मिल रहा सपोर्ट
फिच रेटिंग्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि write-offs (बट्टे खाते में डालना यानी ये मान लेना कि लोन का वापस मिलना मुश्किल है) में बढ़ोत्तरी के बावजूद हायर लोन ग्रोथ, नए एनपीए (slippages)में कमी और लोन रिकवरी में सुधार के कारण बैंकिंग सेक्टर के प्रदर्शन में मजबूती देखने को मिली है। इसके अलावा बैंकों के प्रॉविजनिंग कवरेज में आते सुधार के चलते भी बैंकों की जोखिम से निपटने की क्षमता में मजबूती आई है।
प्राइवेट बैंक, सरकारी बैंकों की तुलना में नजर आ रहे बेहतर
इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि खराब लोन अनुपात के 2.1 फीसदी के निम्न स्तर पर रहने के चलते प्राइवेट बैंक, सरकारी बैंकों की तुलना ज्यादा बेहतर दिख रहे हैं। सराकरी बैंकों का खराब लोन अनुपात 5.6 फीसदी है। फिच का कहना है कि उम्मीद से बेहतर लोन ग्रोथ और बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन में सुधार को चलते बैंकों की कमाई में बढ़त देखने को मिली है। इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि लोन ग्रोथ में टिकाऊ बढ़ोत्तरी और बढ़ते जोखिम अनुपात के साथ ही बैंकिंग सेक्टर की पूंजी पर दबाव देखने को मिल सकता है।