150 डॉलर के पार जाएगा कच्चा तेल? एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी, शेयर मार्केट में मच सकता है हाहाकार

Crude Oil Prices: मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल मार्केट में जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिल रही है। ब्रेंट क्रूड की कीमत आज 9 मार्च को उछलकर 119 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। एनालिस्ट्स का कहना है कि मौजूदा तेजी पिछले कई दशकों की तुलना में अलग है

अपडेटेड Mar 09, 2026 पर 12:48 PM
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Crude Oil Prices: क्रूड ऑयल मार्केट में पिछली बार ऐसी स्थिति 1970 के दशक में देखी गई थी

Crude Oil Prices: मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल मार्केट में जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिल रही है। ब्रेंट क्रूड की कीमत आज 9 मार्च को उछलकर 119 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। एनालिस्ट्स का कहना है कि मौजूदा तेजी पिछले कई दशकों की तुलना में अलग है क्योंकि यह केवल आशंकाओं के कारण नहीं, बल्कि वास्तव में तेल की सप्लाई बाधित होने के कारण हो रही है।

कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी और करेंसी रिसर्च के हेड, अनिंद्य बनर्जी के अनुसार मौजूदा स्थिति तेल की कीमत और सप्लाी दोनों मोर्चों पर दोहरा झटका है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें केवल सात दिनों में लगभग 65 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं, जो बेहद असामान्य है। पिछली बार ऐसी स्थिति 1970 के दशक के तेल संकट के दौरान देखी गई थी। उस समय भी तेल की सप्लाई बाधित होने से कीमतों में तेज उछाल आया था।

2022 से अलग है मौजूदा संकट

बनर्जी का कहना है कि यह तेजी 2022 के एनर्जी संकट से अलग है। उस समय कीमतों में बढ़ोतरी मुख्य रूप से भू-राजनीतिक तनाव से पैदा हुए डर और आशंकाओं के कारण हुई थी। लेकिन इस बार सप्लाई वास्तव में बाधित हो गई है। होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से बड़ी मात्रा में तेल बाजार तक नहीं पहुंच पा रहा है। पूरी दुनिया की करीब 20 प्रतिशत क्रूड सप्लाई इसी समुद्री मार्ग से आती है।


ट्रेडबुल्स सिक्योरिटीज के एनालिस्ट्स भाविक पटेल के अनुसार मौजूदा कीमतों में करीब 20 से 40 डॉलर प्रति बैरल का भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम शामिल है। यह प्रीमियम अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और इस इलाके के ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर पर संभावित हमलों की आशंका से जुड़ा है।

बाजार में बनी रहेगी भारी अस्थिरता

पटेल का मानना है कि फिलहाल ऑयल मार्केट में उतार-चढ़ाव बना रहेगी क्योंकि कीमतों में यह तेजी आर्थिक कारणों से नहीं बल्कि भू-राजनीतिक घटनाओं के चलते आई है। भाविक पटेल का कहना है कि ऐसे समय में तेल की कीमतें अचानक तेजी से बढ़ सकती हैं, लेकिन अगर तनाव कम होता है या सप्लाई सामान्य हो जाती है तो कीमतें उतनी ही तेजी से नीचे भी आ सकती हैं।

ग्लोबल सप्लाई पर बड़ा असर

अनुमान के मुताबिक फिलहाल ग्लोबल ऑयल सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित है, जो 1970 के दशक के बाद सबसे बड़ा रुकावट माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका असर केवल तेल तक ही सीमित नहीं रहेगा। अनिंद्य बनर्जी के अनुसार, “यह केवल तेल की समस्या नहीं है। गैस, फर्टिलाइजर्स, केमिकल्स, एग्रीकल्चर, हर सेक्टर इससे प्रभावित हो सकता है। जब ग्लोबल एनर्जी की सप्लाई में इस स्तर का व्यवधान होता है तो पूरी सप्लाई चेन पर असर पड़ता है।”

उन्होंने कहा कि यह केवल आशंका नहीं बल्कि वास्तविक सप्लाई संकट है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहग समुद्री मार्ग के बंद होने से बाजार जोखिम को नए सिरे से कीमतों में शामिल कर रहा है।

आगे क्या हो सकता है?

एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट जल्द खुल जाता है तो तेल की कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है और बाजार सामान्य हो सकता है। लेकिन अगर यह रुकावट कई सप्ताह तक बना रहती है तो कीमतें और बढ़ सकती हैं।

अनिंद्य बनर्जी के अनुसार क्रूड ऑयल के लिए 125 डॉलर प्रति बैरल का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस माना जा रहा है। अगर यह स्तर पार होता है तो कीमतें 2008 के उच्च स्तर के करीब 145 से 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। दूसरी ओर 90 डॉलर प्रति बैरल का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट के रूप में उभर सकता है, जो तनाव कम होने का संकेत देगा।

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