Daily Voice: ग्लोबल बाजार पर कम निर्भरता वाले ऑटो स्टॉक निवेश के लिए लग रहे अच्छे

बैंकिंग स्टॉक्स ने पिछली 4 तिमाहियों में उम्मीद से बेहतर नतीजे दिए हैं। इनको हायर नेट इंट्रेस्ट मार्जिन और कम होती कर्ज लागत का फायदा मिला है। आगे कर्ज की लागत में नरमी बनी रहेगी। लेकिन नेट इंट्रेस्ट पर मार्जिन पर कुछ दबाव देखने को मिल सकता है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय बैंकिग सेक्टर का नेट इंट्रेस्ट मार्जिन अपने कई तिमाहियों के हाई लेवल पर है

अपडेटेड Mar 02, 2023 पर 6:55 PM
बैंकिंग स्टॉक्स ने पिछली 4 तिमाहियों में उम्मीद से बेहतर नतीजे दिए हैं। इनको हायर नेट इंट्रेस्ट मार्जिन और कम होती कर्ज लागत का फायदा मिला है

नारनोलिया फाइनेंशियल सर्विसेज (Narnolia Financial Advisors) के चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर शैलेंद्र कुमार (Shailendra Kumar) का कहना है कि घरेलू बाजार के वर्तमान ट्रेंड और हाल में आए करेक्शन के बाद ऐसे ऑटो स्टॉक निवेश के नजरिए से अच्छे नजर आ रहे हैं जिनकी ग्लोबल बाजार पर निर्भरता कम है। उन्होंने आगे कहा कि ऑटो स्टॉक्स में निजी कमर्शियल व्हीकल और पैसेंजर व्हीकल स्टॉक ज्यादा बेहतर नजर आ रहे हैं। वहीं ग्लोबल मार्केट में जारी अनिश्चितता को देखते हुए टू व्हीलर कंपनियों का एक्सपोर्ट गिर सकता है। जिससे इनका प्रदर्शन कमजोर रह सकता है। बाजार पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि 18 महीने से ज्यादा के करेक्शन के बाद भारतीय बाजार का वैल्यूएशन निवेश के नजरिए से बेहतर नजर आ रहा है।

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इस सवाल का जवाब देते हुए शैलेंद्र ने कहा कि बैंकिंग स्टॉक्स ने पिछली 4 तिमाहियों में उम्मीद से बेहतर नतीजे दिए हैं। इनको हायर नेट इंट्रेस्ट मार्जिन और कम होती कर्ज लागत का फायदा मिला है। आगे कर्ज की लागत में नरमी बनी रहेगी। लेकिन नेट इंट्रेस्ट पर मार्जिन पर कुछ दबाव देखने को मिल सकता है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय बैंकिग सेक्टर का नेट इंट्रेस्ट मार्जिन अपने कई तिमाहियों के हाई लेवल पर है। बैंक RBI द्वारा ब्याज दरों में की जाने वाली बढ़ोतरी को अपने ग्राहकों पर पासऑन करने में सफल रहे हैं। लेकिन डिपॉजिट दर में बढ़त उतनी नहीं हुई है । चूंकि कर्ज की मांग में लगातार बढ़त देखने को मिली है। लेकिन बैंकों के डिपॉजिट में ग्रोथ उस अनुपात में नहीं हुई है। ऐसे में अगले फाइनेंशियल ईयर में बैंकों पर कुछ दबाव देखने को मिल सकता है।

क्या आप इस समय निवेशकों को इक्विटी मार्केट की जगह फिक्सड इनकम वाले इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश की सलाह देंगे?

इस सवाल का जबाव देते हुए शैलेंद्र ने कहा कि किसी निवेशक के लिए सवाल ये नहीं है कि वो इक्विटी मार्केट में निवेश करें या फिर रियल एस्टेट, गोल्ड और बॉन्ड जैसे इंस्ट्रूमेंट में निवेश करें। सवाल ये है कि निवेशक को किस अनुपात में इन सभी इंस्ट्रूमेंट में निवेश करना चाहिए। यह अनुपात बाजार की परिस्थितियों के मुताबिक बदलता रहता है। बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव और जोखिम होने पर निवेशक इक्विटी में निवेश कम करके बॉन्ड, गोल्ड, रियल एस्टेट जैसे निवेश विकल्पों को अपने पोर्टफोलियो में ज्यादा जगह दे सकते हैं।

 

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