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Daily Voice: मांग में गिरावट भारत की इकोनॉमी के लिए सबसे बड़ी चुनौती, दूसरी छमाही से बाजार पकड़ेगा रफ्तार

Daily Voice: उमेश कुलकर्णी ने कहा कि आगे हमें खुदरा महंगाई आरबीआई के 2-6 फीसदी के टारगेट रेंज में आती नजर आएगी। अब आरबाई द्वारा ब्याज दरों में की गई बढत का असर मांग पर दिखना शुरू हो गया है। इसके अलावा ग्लोबल मार्केट में कमोडिटी और कच्चे तेल की कीमतों में काफी गिरावट आई है। ये भारत में महंगाई में कमी आने के नजरिए से एक अच्छा संकेत हैं

Sunil Matkarअपडेटेड Mar 06, 2023 पर 3:49 PM
Daily Voice: मांग में गिरावट भारत की इकोनॉमी के लिए सबसे बड़ी चुनौती, दूसरी छमाही से बाजार पकड़ेगा रफ्तार
Daily Voice उमेश कुलकर्णी ने कहा कि वो बैंकिंग शेयरों पर पहले से ही पॉजिटिव रहे हैं और अभी भी पॉजिटिव हैं। आगे इस सेक्टर की क्रेडिट मांग में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है

Daily Voice:घरेलू बाजार खास कर ग्रामीण क्षेत्रों के घटती मांग इस समय भारत की इकोनॉमी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसके अलावा बढ़ती ब्याज दरें और मानसून से संबंधित कोई भी निगेटिव खबर अर्थव्यवस्था पर और दबाव बढ़ा सकते हैं। ये बातें भारत में जूलियस बेयर के मैनेजिंग डायरेक्टर, सीनियर एडवाइजर और मार्केट्स एंड एडवाइजरी सॉल्यूशंस के हेड उमेश कुलकर्णी ने मनीकंट्रोल के साथ एक साक्षात्कार में कही हैं। इस बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि जूलियस बेयर को घरेलू इकोनॉमी से जुड़े बीएफएसआई ( BFSI),इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रा, ऑटो और बिल्डिंग मटेरियल सेक्टर में आगे अच्छी तेजी आने की उम्मीद है।

उमेश कुलकर्णी का मानना है कि देश में इकोनॉमिक गतिविधियों में तेजी आने और क्षमता विस्तार पर कंपनियों के निवेश और सरकार की तरफ से इंफ्रा पर फोकस के चलते घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और घरेलू इकोनॉमी से जुड़े दूसरे सेक्टरों में अच्छी तेजी देखने को मिलेगी। इसके अलावा आईटी, केमिकल और इंजीनियरिंग जैसे कुछ सेक्टरों को ग्लोबल बाजार में बढ़ती संभावनाओं का फायदा मिलेगा।

आगे कैसी रहेगी महंगाई की दिशा और दशा?

इस सवाल का जवाब देते हुए उमेश कुलकर्णी ने कहा कि आगे हमें खुदरा महंगाई आरबीआई के 2-6 फीसदी के टारगेट रेंज में आती नजर आएगी। अब आरबाई द्वारा ब्याज दरों में की गई बढत का असर मांग पर दिखना शुरू हो गया है। इसके अलावा ग्लोबल मार्केट में कमोडिटी और कच्चे तेल की कीमतों में काफी गिरावट आई है। ये भारत में महंगाई में कमी आने के नजरिए से एक अच्छा संकेत हैं।

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